11-Apr-2020 10:03

कोरोना जंग के साथ साथ अन्नदाता का भी दर्द जाने सरकार : - सुदामा

खाद्यान्न भण्डारण को मजबूर किसानों को आपदा राहत कोरोना बचाव किट देते हुए मशीनों के प्रयोग की मिले छूट-चन्द्रमणि पाण्डेय

समाजसेवी के मांग को जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान कृषि कार्य निष्पादन हेतु दिया छूट, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जहां आज पूरा देश लाकडाउन से जूझ रहा है। कोई अपने ही घर में कैदी की भांति जीवन यापन करने को मजबूर है तो कोई सूदूर क्षेत्र में अपने कुटुम्बीजनों के मध्य आने को बेचैन है तो वहीं विद्यालय से छूट घर पर धमाचौकड़ी करने वाले बच्चों का मन लूडो गेम व टी.वी.में नहीं लग रहा है। अब वो बेताब हैं कि कब उनका विद्यालय खुले व वो अपने गुरूजनों तथा अन्य साथियों से मिल सकें किन्तु देश का पालनहार अन्न उत्पादक किसान लाकडाउन के दौरान भी जीवन की परवाह किये बिना दिन रात एक करके अपनी फसलों को समेटने में लगा हुआ है। कारण अपने खून पसीने से अन्न उत्पादन करके लोगों के भूख निवारण करने वाले अन्नदाता की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। जहां उनकी नगदी फसल गन्ने का विगत तीन साल से दाम नहीं बढाया गया । वहीं जंगली व छुट्टा जानवर उसकी फसल बर्बाद करते चले आ रहे हैं। शेष बची फसलें भी इस बार बेमौसम बरसात व ओलावृष्टि से समाप्त हो चुकी है। फलतः अधिकांश किसानों को इस बार उत्पादन लागत भी मिलना मुश्किल है। ऐसे ही कुछ किसानों से जनपद के समाज सेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी ने सम्पर्क कर बात की। तो अपना दर्द बयां करते हुए किसानों ने कहा कि पात्रों अपात्रों का चयन किये बिना जहां किसी को निःशुल्क राशन दिया जा रहा है। किसी के खाते में पैसा भेजा जा रहा है तो किसी का पचास लाख का बीमा हो रहा है। वहीं सरकार या प्रसासन का ध्यान कभी हमारी समस्या पर नहीं पडता। कभी आपदा राहत का पैसा आता भी है तो बिचौलिए खा जाते हैं। इस बार तो हमें कोई आपदा राहत भी नहीं मिला। ऐसे में भूखों मरने से बेहतर है पहले हम अपना अनाज खेतों से सुरक्षित घर पहुंचा लें वरन जो कुछ बचा है वो भी चला जायेगा।

समाजसेवी ने किसानों की दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए आग्रह किया है कि सरकार तत्काल किसानों को आपदा राहत उपलब्ध कराने के साथ साथ किसानों को कोरोना से बचाव हेतु आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराये। कृषि कार्य निष्पादन हेतु समस्त कृषि उपकरणों के दुकनों को खोलने व मशीनरी प्रयोग की छूट प्रदान करे। अन्यथा अन्नदाता के साथ साथ देश में भी खाद्यान्न की समस्या उत्पन्न हो जायेगी। खेद का विषय है कि सरकार किसानों को राहत देना तो दूर सुरक्षा के संसाधन भी मुहैया नहीं करा रही है।

इस दौरान समाजसेवी ने राधेश्याम, घनश्याम, हनुमान, रोहित, अतुल, दिलीप, रामप्रकाश सहित एक दर्जन से अधिक किसानों से मिलकर उनकी फसलों की दुर्दशा सरकार व समाज तक पहुंचाने व दिखाते हुए ध्यान आकृष्ट कराया जिसे शोषल मीडिया पर भी काफी समर्थन मिला। श्री पाण्डेय द्वारा किसान हित में उठाये गये मांग को जिलाधिकारी बस्ती ने गम्भीरता से लेते हुए। शनिवार शाम को कृषि से सम्बन्धित उपकरणों व मशीनरियों की दुकानों को खोलने व कृषि कार्य निष्पादित करने की छूट देते हुए, आग्रह किया कि कार्य के दौरान दूरी बनाये रखें ।

जिलाप्रसासन के फैसले का स्वागत करते हुए श्री पाण्डेय ने कहा कि देखना है प्राकृतिक आपदा के शिकार किसानों को आपदा राहत देने की मांग पर सरकार पहल करती है या नहीं । आज जब देश संक्रमण काल से गुजर रहा है तो सिर्फ कृषि उत्पाद ही लोगों काम आ रहा है। अतः सरकारो को ये नहीं भूलना चाहिए कि कृषि प्रधान देश में किसानों की उन्नति के बिना देश की उन्नति महज सपना है।

11-Apr-2020 10:03

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