13-Apr-2020 06:56

गन्ने मील व समिति के कुप्रबंधन का खामियाजा भुगने को मजबूर किसान-चन्द्रमणि पाण्डेय

आचानक गन्ना पर्चियों के बाढ व क्रय-केन्द्रों के फ्री होने से लाकडाउन में उमड रहा हुजूम समाजसेवी ने की पर्याप्त संसाधन की मांग

एक तरफ कोरोना के बढ़ते संक्रमण को ध्यान में रखते हुए पूरे देश में लाकडाउन किया गया है। वहीं दूसरी तरफ किसानों को अपने कृषि कार्यो के निष्पादन हेतु भारी समस्या का सामना कर रहा है। जहां गेहूं की मड़ाई हेतु उसे समूह में कटाई व मड़ाई के लिए एकत्रित होना पड़ रहा है। वहीं गन्ना समिति व मिलों के कुप्रबंधन के चलते गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ना किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कारण आने वाले दिनों में मिलों के बंद होने को देखते हुए ।अचानक किसानों के सभी पक्षों के सभी कालमों की पर्चियां निर्गत कर दी गई हैं कुछ गन्ना क्रय केंद्रों को तो फ्री कर दिया गया है। ऐसे में किसान आनन-फानन में अपने गन्ने को लेकर गन्ना क्रय केंद्र पहुंच रहे हैं। किंतु क्रय केंद्रों पर आवश्यक ट्रक व मजदूर न होने की वजह से उन्हें दिन दिन भर बैठ कर अपनी पारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

हर्रैया क्रय केंद्र के कुछ किसानों ने समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी से इस संदर्भ में शिकायत करते हुए सहयोग की मांग की तो उन्होंने क्षेत्र के हर्रैया व बसडीला सहित आधा दर्जन केंद्रों पर पहुंच कर वहां पर किसानों के उमड़ी भीड़ का हवाला देते हुए। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा व बभनान चीनी मिल के डिप्टी जी.एम.आर.सी.राय सहित गन्ना आयुक्त संजयधूस रेड्डी को फोन कर तत्काल आवश्यक मात्रा में मजदूर व मालवाहक ट्रकों के उपलब्धता की मांग की है श्री पांडे ने कहा कि जब नवंबर दिसंबर जनवरी में किसानों को गन्ना पर्ची की जरूरत होती है जिससे वह अपने गन्ने की समय से बिक्री कर नई फसलों की बुआई कर सकें। तब उन्हें आवश्यक मात्रा में पर्ची मुहैया नहीं कराई जाती। मार्च-अप्रैल में किसान अपने सरसों, मटर, अरहर व गेहूं की कटाई मड़ाई में व्यस्त हो जाता है तो हर साल उसे अधिकांश गन्ना पर्ची निर्गत की जाति इसके पीछे मिलों व समितियों का उद्देश होता है। किसानों से समय से गन्ना पर्ची के नाम पर धन उगाही करना, उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान के गन्ना फसल का पड़ताल होता है।

जिसमें तय होता है कि वह कितनी पर्ची गन्ना इस वर्ष बेचेगा यदि किसी किसान के पास 50 ट्राली गन्ना है और 5 महीना क्रय केंद्र चलते हैं। तो हर माह उसे 10 पर्ची दी जानी चाहिए। किन्तु शुरुआत में तो उसे एक या दो पर्चियां मिलती हैं और बाद में उसे सप्ताह में दो दो तीन तीन पर्चियां मिलती हैं। जिसे जहां गन्ने को तैयार करने में किसानों को परेशानी होती है वहीं उसे गन्ना तौल में भी भारी समस्या का सामना करना पडता है।

श्री पाण्डेय ने व्यवस्था में सुधार करते हुए पारदर्शिता लाने व वर्तमान में कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में क्रय-केन्द्रों पर। मजदूर व ट्रक तत्काल मुहैया कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि दो दिनों में व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो मजबूरन किसान हितों को लेकर मिल प्रबंधन का घेराव करने को बाध्य होना पडेगा। परिणाम कुछ भी हो हम किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगें।

13-Apr-2020 06:56

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