04-Jun-2018 03:20

बनारस आज और कल

रजनीकांत पाठक जी मूलतः बेगूसराय जिले के बखरी के रहने वाले हैं विलक्षण प्रतिभा के धनी पाठक जी की कलम से आज के बनारस की दशा और दिशा क्वेटा जैसा तो बनारस नही दिखा लेकिन बनारस में कुछ नही हुआ ये कहना भी बेईमानी होगा।

बनारस से 40 किलो मीटर पहले सकलडीहा है पटना से निकलते ही मुकुंद जी पुत्रवत (पारिवारिक सदस्य) को कह दिए थे कि बनारस आ रहा हूँ।उन्होंने कहाँ बाबा भोजन करते हुए जायेगा।हमलोग 2 जून के 11 बजे सकलडीहा पहुँच गए।भोजन ग्रहण करने के बाद रात 2 बजे बनारस के लिये निकल पड़े। सुबह 3 बजे बनारस पहुँचते ही मैदागिन लहुराबीर चौराहा पर बनारस निगम के सफाई कर्मचारी शहर के साफ सफाई में लगे लगे हुए थे। पहले के वनिस्पत इस बार बनारस साफ़ सुथरा दिख रहा है।ऐसा लग रहा है कि लोग ईमानदारी से काम कर रहे हैं। पूर्व में कई वर्षों से यहां आते रहा हूँ। लेकिन... इस बार यानी मोदी जी के शासन में पहली बार आया हूँ।सो पहले के बनारस और अब के बनारस में फरक दिख रहा है।हालांकि बनारस की तंग गलियों का समाधान निकालना बालू से तेल निकालने के समान है।फिर भी सड़क को चौड़ा किया गया है।जहां पूर्व में आदमी की भीड़ से ट्राफिक जाम की समस्या थी वहां गाड़ी निकल रहा है।मैदागिन से होते हुए बुलानाला और बाबा के द्वार तक पैदल जाना भी कठिन था लेकिन इस बार गाड़ी से पहुँच गए।रोड पर डिवाइडर दिया गया है।यानी एकतरफा ट्रैफिक जो सुगम यात्रा के लिये जरूरी है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि बनारस की आम जिंदगी व्यवस्थित होने के राह पर अग्रसर हुआ है। क्या कहते हैं बनारसी जनमानस... मैं अपनी आदत के अनुसार लोगो की राय जानने के लिये सबसे अलग प्रयोग करता हूँ।जैसे चाय वाला के दुकान पर बैठकर या किसी ऐसे दुकान पर जाकर एक आम चर्चा करने की प्रयास करता हूँ।बनारस के चौक पर एक दुकान में चाय का आर्डर देकर वहां के अनजाने लोगों से बिना परिचय के पोलटिकल चर्चा शुरू कर दिए।एक बात और यह है कि जब आपको सही चीज का पता लगाना हो तो उल्टा बात बोलिये यानी विपरीत बात जब कहियेगा तब सामने से आपको असली बात पता चलेगा।दुकान पर जब हम कहे कि बनारस और बेकार कर दिया है,वहां के लोगों ने कहां नही साहब काबात करते है।बनारस पहले से अच्छा हुआ है।आदि आदि.... पूजा हेतु जब फूलवाला से हमलोग बात करने लगे तो वह कहने लगा साहब ये मोदी नही बल्कि मोदीश्वर नाथ है।मैंने कहा वह कैसे? उसके बाद वह विश्वनाथ नगरी का दम्भ भरते हुए कहाँ कि ये बात आपको समझ में नही आएगी।मोदी साक्षात शिव का अवतार है।तरह तरह की जोशीले बाते कह कर दुकानदार हमे समझाने लगा।मैंने कहाँ 19 में नही आएंगे तब वह और भरक गया।कहने लगा आपके कहने से क्या होगा।अगर नही आएगा तो समझो हिन्दू खत्म हो जाएगा और हम अपने अगली पीढ़ी को अंधकार में छोड़ जाएंगे।उससे फूल प्रसाद लेकर हम कतार में आगे बढ़ने लगे।लम्बी लाइन के बीच उससे संवाद होता रहा।

गंगा साफ़ हो रही है.... हालांकि स्नान के लिये हमलोग उसपार गए। दशासुमेघ घाट पर सफाई दिखी।नाव पर चढ़ने के लिये रेम्प बनाया हुआ था।पहले के भांति गंगा साफ़ दिखी। बाबा विश्वनाथ के अंदर.... लंबी कतार के बाद हम मंदिर के अंदर प्रवेश किये।2 घँटे तक लंबी लाइन के बाद बाबा का दर्शन।हालांकि वहां की पुलिस महिमा के कारण समय ज्यादा लग रहा था।पुलिस वाला जल्दवाजी श्रद्धालु से दक्षिणा लेकर उसे VIP दर्शन करवा रहे थे।बीच बीच मे हमने इस गलत प्रथा को लेकर आवाज भी उठाए।लेकिन पुलिस वाले कहाँ मानने वाले थे।

मंदिर परिसर में अदभुत दृश्य..पूजा अर्चना के बाद मस्जिद से सटे कुआं की परिक्रमा के बाद ज्यादा थकने के बाद थोड़ा बिश्राम करने लगे।ठीक सटे हुए मस्जिद के ऊपर देखने लगा। मंदिर के छत पर एक बंदर जो कूदक कूदक कर कभी मस्जिद पर तो कभी मंदिर पर जा रहा था।बड़े गौर से यह नज़ारा हम देखने लगे।यह क्रम कई बार हुआ।बंदर कभी कभी हमलोगों को घूर कर देख भी रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे वह कह रहा हो कि तुमसे अच्छा तो हम बंदर है जो जब मन करे मंदिर में जब मन करे मस्जिद में। बनारस की सुखद यात्रा को अपने जेहन में समेटते हुए हम वहां से विदा हुए।अपने दोनों मित्र क्रमश प्रदीप जी व मनोज जी के साथ।रास्ते में मोदी जी के बनारस की चर्चा वहां की विकास की चर्चा पर प्रदीप जी इठलाते रहे इसका कारण भी है क्योंकि वे बेगूसराय नगर मंडल भाजपा के अध्यक्ष भी हैं।

मेरी राय :- बनारस PM का निर्वाचन क्ष्रेत्र हैं।स्वाभाविक तौर पर यहां स्पेसल अटेंसन होनी भी चाहिए।प्रधानमंत्री के एक इशारे पर यहां बहुत कुछ हो सकता है।देश के नामी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत अपनी भूमिका निभा सकते है।बनारस की सौंदर्यकरण, यहां की बुनियादी जरूरत,श्रद्धालु के लिये सुविधा आदि जैसे विषयों पर काम हो तो क्वेटा क्या बल्कि एक भव्य और नया बनारस दिख सकता है।मेरी राय में बनारस को अतीत और वर्तमान के बीच का फासला देख यह कहा जा सकता है कि बनारस को प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र होने का फ़ायदा मिलना शुरू हुआ है।इसलिय मैं भी कहता हूं कि क्वेटा जैसा तो बनारस नही दिखा लेकिन बनारस में कुछ नही हुआ यह कहना बेईमानी है।

04-Jun-2018 03:20

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