27-Jun-2018 09:33

डा सुनीता कुमारी बनी मिसेज इंडिया फोटोजेनिक

  जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो। ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है। उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो

        जानी मानी शिक्षक डॉ सुनीता कुमारी आज फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में भी अपनी खास पहचान बना चुकी है। सुनीता कुमारी का कहना है मौके मिलते नहीं…. बनाये जाते हैं …..कामयाबी हम तक नहीं आती….हमें कामयाबी तक जाना होता है। सुनीता कुमारी ने अबतक के अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया। कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं। इस बात को साबित कर दिखाया है डा सुनीता कुमारी ने । सुनीता कुमारी को अभी हाल ही में आयोजित मिसेज इंडिया सी इज इंडिया के इस्ट जोन के सेमी फिनाले में मिसेज इंडिया फोटोजेनिक खिताब मिला है।

      बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली डा सुनीता कुमारी के पिता श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह और मां श्रीमती शीला सिंह बेटी को उच्चअधिकारी बनाने का ख्वाब देखा करते थे। बचपन के दिनों से ही डा सुनीता कुमारी काफी मेघावी छात्रा थी और उनकी रूचि पढ़ाई के साथ ही खेलकूद और कला में भी थी। सुनीता कुमारी स्कूल में होने वाले कार्यक्रम में कविता पाठ और डांस किया करती और इसके लिये उन्हें काफी सराहना मिला करती। इसके साथ ही  वह स्कूल और कॉलेज में होने वाले बास्केट बॉल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया करती और इसके लिये उन्होंने कई पदक भी अपने नाम किये। वर्ष 1990 से डा सुनीता कुमारी ने बास्केट बॉल में आंधप्रदेश , इंदौर , दिल्ली और उड़ीसा में बिहार का प्रतिनिधित्व किया और बिहार का नाम रौशन किया।

        डा सुनीता की रूचि फैशन और मॉडलिंग की ओर भी रही थी।उन्होंने मिस बांकीपुर और मिस फ्रेशर का खिताब भी अपने नाम किया है। इसके अलावा वह साइकिलिंग में भी गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी है। वर्ष 1997 में सुनीता कुमारी ने श्रीलंका में हुये नेटबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और इसके साथ ही वह वुमेन कोच भी बनायी गयी। डा सुनीता कुमारी के दो बच्चे आदरिका सिंह और रक्षित राज है जो अपनी मां को पूरा सपोर्ट करते हैं। डाँँ सुनीता कुमारी शिक्षक के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। इसी को देखते हुये उन्होंने वर्ष 2001 में एमए किया और इसके बाद वर्ष 2002 में बीएड की पढ़ाई पूरी की। सुनीता कुमारी का कहना है कि समाज के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है इसलिए जरूरी है कि समाज के सभी लोग शिक्षित हो। शिक्षा ही विकास का आधार है। समाज के लोग ध्यान रखें कि वह अपने बेटों ही नहीं बल्कि बेटियों को भी बराबर शिक्षा दिलवाएं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की महत्ता सर्वविदित है. स्पष्ट है कि सामाजिक सरोकार से ही समाज की दशा एवं दिशा बदल सकती है।

        डा सुनीता कुमारी वर्ष 2002 में बतौर शिक्षिका डीएभी स्कूल से जुड़ गयी। वर्ष 2004 में डा सुनीता कुमारी शादी के अटूट बंधन में बंध गयी। उनके पति श्री संजय कुमार शैक्षनिक संस्थान गोल में ब्रांच मैनेजर हैं जो उन्हें हर कदम सर्पोट करते हैं। जहां आम तौर पर युवती की शादी के बाद उसपर कई तरह की बंदिशे लगा दी जाती है लेकिन सुनीता कुमारी साथ ऐसा नही हुआ। सुनीता कुमारी के पति के साथ ही ससुराल पक्ष के लोगों उन्हें हर कदम सर्पोट किया। डा सुनीता कुमारी ने बताया कि उन्हें उनकी दो बहन विनीता कुमारी और संगीता कुमारी ने भी उनका काफी सपोर्ट किया है।             जरा  पंख खोलो फिर उड़ान देखना ,ज़रा मौका तो दो फिर आसमान देखना ,         बराबर की लाइन तो खींचो ज़रा फिर हिम्मत बड़ी या भगवान देखना ,         देदे मौका दे दे दे दे देदे मौका दे इक चांस तो दे दे मेरी         जान तुम मेरी जान तुम फिर उड़ान देखना         वर्ष 2009 में सुनीता कुमारी ने पीएचइडी की पढाई पूरी की। बहुमुखी प्रतिभा की धनी डा सुनीता कुमारी ने वर्ष 2012 में किताब भी लिखी। जानकी पब्लिकेशन की ओर से प्रकाशित किताब वुमेन ,पॉलटिक्स एंड पार्टिपिटेशन को लोगों ने बेहद पसंद किया। डा सुनीता कुमारी महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना चाहती थी और इसी को देखते हुये वह वर्ष 2014 में महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम करने वाली दैनिक जागरण संगिनी क्लब से जुड़ गयी और इस दिशा में आज भी काम कर रही है।                   वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ                     हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है         डा सुनीता कुमारी फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहती थी। डा सुनीता कुमारी को अभी हाल ही में आयोजित मिसेज इंडिया सी इज इंडिया के इस्टजोन सेमीफिनाले में मिसेज इंडिया फोटोजेनिक खिताब मिला है।उन्होने बताया कि शो के टैलेंट राउंड में उनकी बेटी ने श्रीदेवी के गाने पर उन्हें कोरियोग्राफ किया था जिसे लोगो ने बेहद पसंद किया।डा सुनीता कुमारी  का मानना है कि जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना ,सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें ,बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना। डा सुनीता कुमारी आज कामयाबी की बुलंदियों पर हैं। वह अपनी सफलता का विजयी मंत्र अपने पिता श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह  को देती हैं जिन्होंने उन्हें हर कदम सपोर्ट किया। डा सुनीता कुमारी की नजर में उनके पिता ही उनके सुपरहीरो हैं। डा सुनीता कुमारी का मानना है कि घर में सबसे सख्त इंसान, हर बार डांटने वाले, रोक-टोक करने वाले पापा ही होते हैं. जब बचपन में घर वाले पूछते हैं कि पापा पसंद हैं कि मम्मी, तो ज़्यादातर बच्चों के मुंह से मम्मी ही निकलता है क्योंकि मम्मी का लाड-प्यार दिखता है लेकिन पापा की सिर्फ़ डांट. हम बचपने में जिसे लाइफ का विलेन मानते थे, असल में वो हीरो की तरह हमारी सारी इच्छाओं को पूरा करने में जुटे रहते थे. ये वो इंसान है, जो अपने सपनों को किसी संदूक में बंद कर हमारी ख्वाहिशों को पंख देने में जुटा रहता है, और हां, कभी जताता ​भी नहीं।       डा सुनीता कुमारी पनी सफलता का मूल मंत्र इन पंक्तियो में समेटे हुये हैं।                 रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा,                 प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा;                 थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर,           मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा।

27-Jun-2018 09:33

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