11-Jul-2018 10:54

नाच परंपरा के जीवित किवंदिति रामचंद्र माँझी

भारतीय रंगमंच के प्रसिद्ध हस्ताक्षर भिखारी ठाकुर के रंगसंगी रामचन्द्र माँझी को ‘संगीत नाटक अकादमी सम्मान 2017’ प्रदान किए जाने की घोषणा हुई है। इस घोषणा से देश के कई रंगकर्मियों, विद्वानों, सामाजिक एवं राजनैतिक कार्यकर्ताओं में ख़ुशी की लहर है। रामचन्द

रामचंद्र माँझी बिहार की नाच परंपरा जिसे लौंडा नाच भी कहा जाता है के जीवित किवंदती लेकिन गुमनाम कलाकार रहे हैं। भिखारी ठाकुर से प्रशिक्षित एवं उनके साथ काम कर चुके जीवित बचे कलाकारों में से रामचंद्र माँझी सबसे वरिष्ठ ऐसे कलाकार हैं जो उम्र के 93वें वर्ष में भी लगातार भिखारी ठाकुर की नाच मंडली (अब भिखारी ठाकुर रंगमंडल) में भिखारी ठाकुर कृत हर नाटकों में मुख्य भूमिका निभाते हैं। रंगमंडल में स्त्री भूमिका करने के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं। इन्होंने बिदेसिया नाटक में रखेलिन के किरदार को अपनी अभिनय, गायकी एवं नृत्य से एक ऐसी ऊँचाई प्रदान किया है जिसके आसपास फटकना भी आज के रंगकर्मियों के लिए चुनौती है। छपरा (बिहार) के एक छोटे से गाँव तज़ारपुर में जन्मे रामचन्द्र माँझी दलित समुदाय के दुसाध जाति से हैं। रामचंद्र माँझी का जन्म का कोई लिखित प्रमाण नहीं है परंतु चुनाव पहचान पत्र के अनुसार उनका जन्म 1930 में हुआ है जबकि रामचंद्र माँझी अपनी यादों की गिनती से ख़ुद को 93 वर्ष का बताते हैं। श्री माँझी 12 वर्ष की उम्र में भिखारी ठाकुर के नाच दल से जुड़े थे। परंतु वो बताते हैं कि भिखारी ठाकुर से पहले उन्होंने गाँव के हीं दीनानाथ माँझी के नाच मंडली में नाच का प्रशिक्षण लेना एवं नाचना-गाना शुरू कर दिया था। उसके बाद उन्हें भिखारी ठाकुर के नाच पार्टी में शामिल होने का ऑफ़र मिला। जहाँ उन्होंने आंगिक-वाचिक अभिनय सहित धोबिया नाच, नेटुआ नाच, गजल, कव्वाली, निर्गुण, भजन, दादरा, खेमटा, कजरी, ठुमरी, पूर्वी, चइता गायन का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के पश्चात भिखारी ठाकुर कृत सभी नाटकों में मुख्य कलाकार के रूप में अपनी भूमिका प्रदान की। रामचंद्र माँझी अब तक भिखारी ठाकुर के एक-एक नाटकों की हजारों हज़ार प्रस्तुतियाँ देश-विदेश के विभिन्न समारोहों एवं गाँव के शादी-विवाह तथा त्योहारों में कर चुके हैं। रामचंद्र माँझी अब तक मोतीलाल नेहरु, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, जगजीवन राम, जयप्रकाश नारायण, लालू प्रसाद यादव, नितीश कुमार, राबड़ी देवी, शरद यादव, रामविलास पासवान तथा दारोगा राय जैसे देश के बड़े राजनेताओं के समक्ष अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं।

परंतु समाज में आज भी रामचंद्र माँझी के इस कला को सम्मानित दृष्टि से नहीं देखा जाता है। रामचंद माँझी हीं क्यों इस विधा से जुड़े हर कलाकार को समाज एवं परिवार में हे दृष्टि से देखा जाता है। आपको यह बताते हुए मुझे अपने समाज पर शर्म आ रही है कि रामचंद्र माँझी के नाच को आज तक उनके परिवार के लोगों ने नहीं देखा है। भिखारी ठाकुर के नाटकों में रामचंद्र माँझी की भूमिका बिदेसिया: रखेलिन/प्यारी सुंदरी, गबरघिचोर: गलीज बहु , बेटी-बेचवा: हजामिन , पिया निसइल: रखेलिन , गंगा-स्नान: मलेछू बहु , पुत्र-बध: छोटकी , भाई-बिरोध: छोटकी , कृष्णलीला: यशोदा , ननद-भाउजाई: भाउजाई , बिधवा-बिलाप: बिधवा स्त्री।

रामचन्द्र माँझी का बायोडाटा बना कर तथा विभिन्न प्रस्तुतियों के प्रमाण के साथ रंगमंडल पिछले तीन वर्ष से इन्हें संगीत नाटक अकादमी सम्मान दिलाने के लिए प्रयास कर रही थी। परंतु कामयाबी नहीं मिली। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2015 के लिए पहली बार जब रामचंद्र माँझी का नॉमिनेशन हुआ था उस वर्ष यह सम्मान बिहार से रंगकर्मी परवेज़ अख़्तर एवं रामचंद्र सिंह को मिला। रामचंद्र माँझी जब दूसरी बार नॉमिनेट हुए तब यह सम्मान बिहार से लोक गायक ब्रजकिशोर दुबे को प्राप्त हुआ। अंततः तीसरी बार में श्री रामचंद्र माँझी इस पुरस्कार के लिए चुने गए।

भिखारी ठाकुर रंगमंडल में रामचंद्र माँझी ने वर्ष २०१५ से अबतक देश के कई सम्मानित रंगमहोत्सवों में अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं। जिसमें मुख्य है- # भिखारी ठाकुर रंगमंच शताब्दी समारोह - 2017 (छपरा, बिहार) # देशज - 2016 (आज़मगढ़, उ प्र) # संस्कृति संगम - 2017 (नालंदा, बिहार) # नाट्य समागम - 2015 (अगरतला, त्रिपुरा) # नाट्य समागम - 2015 (गुवाहाटी, असम) # नाट्य समागम - 2016 (दिल्ली) # लोक जात्रा - 2017 (मोतिहारी, बिहार) # देशज - 2015 (पुस्तक मेला, पटना) # भिखारी ठाकुर जयंती उत्सव - 2017 (छपरा, बिहार) # सिरजन -2016 (इलाहाबाद) # भिखारी ठाकुर रंग महोत्सव -2016 एवं 2017 (छपरा, बिहार) # राष्ट्रीय लोक नाट्य महोत्सव - 2017 (मधुबनी, बिहार)। # छठ महोत्सव - 2017 (गुड़गाँव, हरियाणा) # भिखारी ठाकुर के रंगमंच के सौ वर्ष - 2017 (जेएनयू, दिल्ली) छपरा एवं क़ुतुबपुर में आयोजित भिखारी ठाकुर रंगमंच शताब्दी समारोह (दिसंबर 2017) में रामचंद्र माँझी ने कमाल का परफ़ॉर्मेंस दिया था। इस समरोह में उन्होंने ने पिया निसइल नाटक सहित तीन प्रस्तुतियाँ की। इसमें सबसे अहम था इनके ख़ुद के नृत्य संयोजन में किया गया ‘नेटुआ नाच’।

11-Jul-2018 10:54

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