13-Jun-2018 04:30

पार्श्वगायन के क्षेत्र में खास पहचान बनायी कुमार संभव ने

        आसमां क्या चीज़ है         वक्त को भी झुकना पड़ेगा         अभी तक खुद बदल रहे थे         आज तकदीर को बदलना पड़ेगा         संभावनाओं की कोई कमी नहीं है और अगर आपके पास जूनून है तो कोई मंजिल दूर नहीं है।

        जाने माने पार्श्वगायक और बिरला सन लाइन इंशोरेस में ऐसोशियेट पार्टनर कुमार संभव आज के दौर में न सिर्फ संगीत जगत में धूमकेतु की तरह छा गये हैं बल्कि इंशोयेरेंस की दुनिया के क्षितिज पर भी सूरज की तरह चमके। उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदम्य साहस का इतिहास बयां करता है। कुमार संभव ने हर असंभव बात को संभव कर दिखाया है , उन्होंने अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया। बिहार के वैशाली जिले के महनार थाना के महनार गांव में वर्ष 1975 में जन्में कुमार संभव के पिता शिव शंकर प्रसाद रत्नाकर और मां उषा सिन्हा बेटे को उच्चाधिकारी बनाने का ख्वाब  देखा करती थी। संभव के पिता जाने माने अभिनेता हैं और उन्होंने कई भोजपुरी सिनेमा और रंगमंच पर अपने अभिनय का जौहर दिखाया जबकि उनकी मां लोकगायिका हैं। कुमार संभव को कला विरासत में मिली। बचपन के दिनों से ही कुमार संभव गायिकी में रूचि रखा करते थे।आवाज की दुनिया के बेताज बादशाह किशोर कुमार से प्रभावित होने की वजह से कुमार संभव उन्हीं की तरह संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का ख्वाब देखा करते।कुमार संभव स्कूल और कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर गायक शिरकत किया करते जिसके लिये उन्हें काफी सराहना मिला करती।रोचक तथ्य है किशोर कुमार की मौत 13 अक्टूबर को हुयी थी और इसी दिन कुमार संभव का जन्म हुआ वहीं किशोर कुमार का जन्म 04 अगस्त को हुआ था और इसी दिन कुमार संभव के घर चिराग रौशन हुआ।         जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना             सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना             कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें            बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।

        कुमार संभव ने अपनी प्रारभिक शिक्षा हाजीपुर से पूरी की और इसके बाद वह वह आंखों में बड़े सपने लिये बेहतर शिक्षा के लिये राजधानी पटना आ गये जहां उन्होंने स्नातक की पढाई पूरी की।पढ़ाई पूरी करने के बाद कुमार संभव ने बैंक और रेलवे की परीक्षायें दी लेकिन बात नही बन सकी। कुमार संभव ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 2002 में स्टॉक कंपनी में बतौर मार्केटिंग एक्सक्यूटिव के तौर पर की।तीन साल तक यहां काम करने के बाद कुमार संभव टाटा आईजी कंपनी के साथ बतौर एडवाजइर जुड़ गये और तीन साल तक इस पद पर काम किया। वर्ष 2007 कुमार संभव के जीवन के लिये न सिर्फ व्यवसायिक बल्कि पारिवारिक जीवन में भी अहम मोड़ लेकर आया।इसी वर्ष  कुमार संभव बिरला सन लाइफ के साथ जुड़ गये और दस साल से अधिक समय से बतौर ऐशोसियेट पार्टनर के तौर पर काम कर रहे हैं। कमार संभव के जीवन में इसी वर्ष जानी मानी गायिका और कत्थक डांस में निपुण प्रगति पल्लवी बहार बनकर आयी और दोनो विवाह के अटूट बंधन में बंध गये।                       वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ                 हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है

        कुमार संभव के दिल में  कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश थी । वह संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। इसी को देखते हुये कुमार संभव ने संगीत कार्यक्रम में  हिस्सा लेना शुरू कर दिया । कुमार संभव की मेहनत रंग लायी और वह बतौर गायक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये।         ज़िन्दगी की असली उड़ान अभी बाकी है,         ज़िन्दगी के कई इम्तेहान अभी बाकी है,         अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीं हमने,         अभी तो सारा आसमान बाकी है...

कुमार संभव बिहार,झारंखंड के अलावा दिल्ली ,मुंबई ,कोलकाता ,गोआ और नेपाल में भी हजारो शो में बतौर गायक शिरकत कर चुके हैं। बतौर गायक कुमार संभव को कई सम्मान से नवाजा गया है। इनमें सहारा सम्मान ,इनर व्हील सम्मान , कला कुंज , कला त्रिवेणी ,कला संगम , रोटरी समेत अन्य शामिल है।कुमार संभव अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ ही पत्नी और अपने शुभचिंतको को भी देते हैं जिन्होंने उन्हे हर कदम उन्हें सपोर्ट किया है।

13-Jun-2018 04:30

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