17-Jun-2018 01:12

पिता के बिना जीवन की कल्पना नही की जा सकती : मनीषा दयाल

      पिता दिवस अर्थात पितृ दिवस पिताओं को सम्मानित करने के लिए दुनिया के प्रत्येक देशों में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मकसद एक पिता की अहमियत और उसके कार्यों के सराहने के लिए मनाया जाता है। जैसे मातृ दिवस माताओं को सम्मानित किया जाता है उसी प्र

    जानी मानी समाजसेविका मनीषा दयाल अपनी सफलता का विजयी मंत्र अपने पिता विजय दयाल को मानती है जिन्होंने उन्हें हर कदम सपोर्ट किया। मनीषा दयाल के नजर में उनके पिता विजय दयाल ही उनके सुपरहीरो हैं।         मनीषा दयाल अपने पिता को याद कर कहती है ।घर में सबसे सख्त इंसान, हर बार डांटने वाले, रोक-टोक करने वाले पापा ही होते हैं. जब बचपन में घर वाले पूछते हैं कि पापा पसंद हैं कि मम्मी, तो ज़्यादातर बच्चों के मुंह से मम्मी ही निकलता है क्योंकि मम्मी का लाड-प्यार दिखता है लेकिन पापा की सिर्फ़ डांट. हम बचपने में जिसे लाइफ का विलेन मानते थे, असल में वो हीरो की तरह हमारी सारी इच्छाओं को पूरा करने में जुटे रहते थे. ये वो इंसान है, जो अपने सपनों को किसी संदूक में बंद कर हमारी ख्वाहिशों को पंख देने में जुटा रहता है, और हां, कभी जताता ​भी नहीं।

          पिता एक ऐसा व्यक्तितिव है जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती । यह एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जिसकी तुलना किसी भी रिश्ते से नहीं की जा सकती । बचपन में जब कोई बच्चा चलना सीखता है तो सबसे पहले अपने पिता की उंगली थामता है । नन्हा सा बच्चा पिता की उँगली थामे और उसकी बाँहों में रहकर बहुत सुकून पाता है । बोलने के साथ ही बच्चा जिद करना शुरू कर देता है और पिता उसकी सभी जिदों को पूरा करता है । बचपन से लेकर जवानी तक जब तक पिता जिंदा रहता है बच्चे की हर मांग को पूरी करने का प्रयास करता है । जैसे की चॉकलेट, खिलौने, बाइक, कार, लैपटॉप आदि । उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने तक सभी माँगों को वो पूरा करता है लेकिन कभी-कभी एक समय ऐसा भी आता है जब भागदौड भरी इस ज़िंदगी में बच्चों के पास अपने पिता के लिए समय नहीं होता है ।

     पिता शब्द के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं है। पिता एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जिसकी तुलना किसी अन्य रिश्ते से नहीं की जा सकती। पिता को सम्मानित करने का इतिहास कई सौ सालों से चला आ रहा है। माता-पिता तथा गुरू तीनों को देवता माना जाता है। पितृ दिवस के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनांए! मनीषा दयाल अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता को देती है। मनीषा पिता को याद कर भावुक हो जाती है और कहती है।

        थाम के मेरी नन्ही उंगली , पहला सफ़र आसान बनाया ,हर एक मुश्किल कदम में पापा, तुमको अपने संग ही पाया। कितना प्यारा बचपन था। जब गोदी में खेला करती। पाकर तुम्हारे स्नेह का साया बड़े-बड़े मैं सपने बुनती, लेकर व्यक्तित्व से तुम्हारे प्रेरणा ,देखो आज कुछ बन पाई तुम्हारे हौसले और विश्वास के दम पर एक राह सच्ची मैं चुन पाई।

17-Jun-2018 01:12

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