01-Jul-2018 05:00

मॉडलिंग के साथ ही अभिनय की दुनिया में भी सशक्त पहचान बनायी राहुल वर्मा ने

         खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,         जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,         लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,         जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है…

      राहुल वर्मा ने मॉडलिंग और फैशन की दुनिया के साथ ही अभिनय की दुनिया में भी अपनी अलहदा पहचान बनायी है लेकिन  उन्हें इस कामयाबी को पाने के लिये अथक परिश्रम का सामना भी करना पड़ा है। बिहार के नवादा शहर के देवी स्थान मुहल्ला के रहने वाले राहुल वर्मा के पिता श्री अशोक कुमार और मां श्रीमती रेखा वर्मा ने घर के लाडले बड़े बेटे को अपनी राह खुद चुनने की आजादी दे रखी थी। बचपन के दिनों से ही राहुल का रूझान गीत-संगीत और अभिनय की ओर था और वह स्टार बनने का ख्वाब देखा करते। राहुल स्कूल और कॉलेज में होने वाले सांस्क़ृतिक कार्यक्रमों में शिरकत किया करते जिसके लिये उन्हें काफी सराहना मिली करती थी। वर्ष 2011 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आंखो में बड़े सपने लिये राहुल वर्मा पुणे चले गये जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की।

        जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो         मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो         ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है         उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो पुणे में राहुल वर्मा की मुलाकात मशहूर मॉडलिंग कोरियोग्राफर से वैंकी से हुयी और उनका रूझान मॉडलिंग की तरफ हो गया। राहुल ने निश्चय किया कि वह मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनायेंगे। राहुल ने खुद से ही अपनी ग्रुमिंग शुरू की। राहुल ने पुणे में आयोजित मैक्स फैशन आइकॉन ऑफ इंडिया में हिस्सा लिया जहां वह सेकेंड रनर अप चुने गये।शो में जज के तौर मौजूद सोफी चौधरी , पूजा चोपड़ा , सोनाली कुलकर्णी और मार्क राबिनसन ने राहुल की काफी प्रशंसा की। राहुल शो के विजेता नही बन सके लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी।  इसी दौरान राहुल को स्टाइल फैशन आइकॉन में रैंप वाक का अवसर मिला जिसके लिये उन्हें काफी सरहना मिली।  राहुल का मानना है कि         रात नहीं ख्वाब बदलता है,         मंजिल नहीं कारवाँ बदलता है;         जज्बा रखो जीतने का क्यूंकि,         किस्मत बदले न बदले ,         पर वक्त जरुर बदलता है |

         वर्ष 2016 में राहुल वर्मा की मुलाकात जाने माने अभिनेता नाना पाटेकर ,नसीरउद्दीन साह और विक्रम गोखले से हुयी। इन लोगों ने राहुल को सलाह दी कि आप अभिनय के क्षेत्र में अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं। राहुल ने पुणे में रहते हुये अभिनय का एक वर्षीय कोर्स पूरा किया। राहुल की मेहनत जल्द ही रंग लायी और उन्हें उनके दोस्त पंकज की मदद से फिल्म अकीरा में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद राहुल ने हॉलीवुड फिल्म श्वान जांगा में काम किया। यह फिल्म ऑस्कर के लिए भी नामित हुई थी। राहुल जल्द ही अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये। इसके बाद उन्होंने टीवी सीरियल मेरी आवाज ही पहचान है , ये है आशिकी , इश्कबाज , मस्तानगी और 24 सीजन 02 में काम किया और अपने अभिनय का जौहर दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राहुल यदि चाहते तो पुणे में रहते हुये मॉडलिंग और फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बना सकते थे लेकिन वह बिहार के लिये कुछ करना चाहते थे। इसी को देखते हुये राहुल बिहार की जन्मभूमि को कर्मभूमि मानते हुये अपने गृह जिले नवादा आ गये।          बंदे है हम उसके हम पर किसका जोर | उम्मीदो के सूरज, निकले चारो और ||

        इरादे है फौलादी, हिम्मती है कदम ||| अपने हाथो किस्मत लिखने आज चले है हम। वर्ष 2017 में राहुल ने एक्टिंग क्लास और फिल्म प्रोडक्शन इंस्टीच्यूट की स्थापना की। अपने प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले राहुल ने सेव वाटर , तिरंगा ,फरिश्ते और हैप्पी पीरियडस समेत कई लघु फिल्मों का निर्माण किया है। वर्ष 2018 में राहुल की भोजपुरी फिल्म हिंदुस्तानी छोरा पाकिस्तानी छोरी प्रदर्शित हुयी जिसमें उनके अभिनय के विविध रंग देखने को मिले। राहुल इन दिनों हिंदी फिल्म आई लव दुबई और भोजपुरी फिल्म कैदी चांद में काम कर रहे हैं। राहुल अपने पिता को रियल हीरो मानते हैं और उनका सपना पिता के जीवन पर फिल्म बनाने का है।

01-Jul-2018 05:00

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