15-Jun-2018 04:01

वकालत के साथ ही फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में खास पहचान बनायी रिंकू भगत ने

           खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,         जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,         लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,         जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है…

वकालत के साथ ही  फैशन की दुनिया में पहचान बनायी रिंकू भगत ने        रांची की राजकुमारी कही जाने वाली मिसेज इंडिया और अधिवक्ता रिंकू भगत ने न सिर्फ वकालत के पेशे में अपनी खास पहचान बनायी बल्कि वह अब फैशन और मॉडलिंग की क्षितिज पर भी सूरज की तरह चमक रही हैं। उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदभ्य साहस का इतिहास बयां करता है। रिंकू भगत ने अबतक के अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।         झारखंड की राजधानी रांची में वर्ष 1977 में जन्मी रिंकू भगत के गोपाल चंद्र भगत और मां उत्तला भगत घर की छोटी बेटी को  उच्चअधिकारी बनाना चाहते थे हालांकि रिंकू वकालत के क्षेत्र में अपना नाम रौशन करना चाहती थी। रिंकू ने वर्ष 1994 में इंटरमीडियट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद रिंकू वकालत की पढाई पूरी करने के बाद कोलकाता चली गयी जहां उन्होंने वर्ष 1999 में हाजरा लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई पूरी की।         जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना         सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना         कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें         बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना। वर्ष 1999 रिंकू भगत के व्यवसायिक जीवन के साथ ही पारिवारिक जीवन में भी अहम मोड़ लेकर आया। वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद रिंकू रांची चली आयी और वहां के सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगी।इसी वर्ष रिंकू सेना में चिकित्सक के तौर पर कार्यरत नरेन्द्र कुमार मधुकर के साथ विवाह के अटूट बंधन में बंध गयी।  जहां आम तौर पर युवती की शादी के बाद उसपर कई तरह की बंदिशे लगा दी जाती है लेकिन रिंकू भगत के के साथ ऐसा नही हुआ। रिंकू भगत के पति के साथ ही ससुराल पक्ष के लोगों उन्हें हर कदम सर्पोट किया। रिंकू शादी के बाद भी अधिवक्ता के तौर पर काम करती रही।     आज बादलों ने फिर साज़िश की     जहाँ मेरा घर था वहीं बारिश की     अगर फलक को जिद है ,बिजलियाँ गिराने की     तो हमें भी ज़िद है ,वहि पर आशियाँ बनाने की         रिंकू भगत यदि चाहती तो विवाह के बंधन में बनने के बाद एक आम नारी की तरह जीवन गुजर बसर कर सकती थी लेकिन वह फैशन की दुनिया में भी पहचान बनाना चाहती थी। इसी दौरान उन्हें पता चला कि हिमाचल प्रदेश में मिसेज हिमाचल का आयोजन किया जा रहा है।रिंकू ने शो में हिस्सा लिया और विजेता का ताज अपने नाम कर लिया। इसके बाद रिंकू ने चेन्नई में हुयेमिसेज इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और इस बार भी विजेता का ताज अपने नाम कर लिया।

                  रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा,                 प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा;                 थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर,           मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा। रिंकू भगत ने वर्ष 2017 में ही चीन के शंघाई में आयोजित मिसेज एशिया इंटरनेशनल में हिस्सा लिया और विजेता का ताज अपने नाम कर लिया। रिंकू भगत झारखंड स्टेट बार कौंसिल के गठन के बाद से पहली महिला एडवोकेट सदस्य बनायी गयी है। रिंकू भगत के सपने सपने यूं ही पूरे नही हुये , यह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है, हर पहलू ज़िन्दगी का इम्तेहान होता है। डरने वालो को मिलता नहीं कुछ ज़िन्दगी में, लड़ने वालो के कदमो में जहां होता है। रिंकू  ने बताया कि वह अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने पति और ससुराल पक्ष  के साथ ही खासकर अपनी को देती है जिन्होंने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया है। रिंकू ने बताया कि जब वह महज दो वर्ष की थी तो उनके पिता की मौत हो गयी थी और इसके बाद उनकी मां ने अपनी जिम्मेवारी का निवर्हन किया और उन्हें इस लायक बनाया। ।रिंकू अपनी मां को अपना  रियल हीरो मानती है। रिंकू अपनी मां के लिये गुनगुनाती है।

        बसे प्यारी, सबसे न्यारी,कितनी भोली भाली माँ.        तपती दोपहरी में जैसे,शीतल छैया वाली माँ.         मुझको देख -देख मुस्काती, मेरे आँसु सह न पाती.मेरे सुख के बदले अपने,सुख की बलि चढ़ाती माँ.      इसकी 'ममता' की पावन,मीठी बोली है मन भावन,कांटो की बगिया में         सुन्दर,फूलों को बिखराती माँ. इसका आँचल निर्मल उज्जवल,जिसमे हैं, नभ -जल -थल. अपने शुभ आशिषों से, हम को सहलाती माँ. माँ का मन न कभी दुखाना, हरदम इसको शीश झुकाना, इस धरती पर माता बनकर,ईश कृपा बरसाती माँ. प्रेमभाव से मिलकर रहना,आदर सभी बड़ो का करना,सेवा, सिमरन, सत्संग वाली,सच्ची राह दिखाती माँ. सबसे भोली सबसे प्यारी,सबसे न्यारी मेरी माँ.

        रिंकू महिला सशक्तीकरण और डायन प्रथा के अभिशाप को समाप्त करने की दिशा में भी काम कर रही है। रिंकू भगत महिलाओं को मधुबनी पेंटिंग, सुराही पेंटिंग समेत कई कलाओं का प्रशिक्षण देती हैं, जिससे वे स्वावलंबी बन सकें। रिंकू भगत ने सभी से अपील की है वे किसी को डायन न कहें, उन्हें सम्मान दें। डायन शब्द अपमान का सूचक है। महिलाओं को आहत करता है। उनकी आत्मा पर चोट करता है। महिला मां होती है। उसे डायन कहना, डायन-बिसाही के मामले में पिटाई करना, हत्या करना जघन्य अपराध है।

15-Jun-2018 04:01

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