CIN : U22300BR2018PTC037551
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02-Dec-2019 12:01

विश्व विख्यात हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला में हिंदी साहित्य सम्मेलन का वार्षिक अधिवेशन वार्षिक अधिवेशन

सारण जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन का वार्षिक अधिवेशन वार्षिक अधिवेशन विश्व विख्यात हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के पर्यटन विभाग के मुख्य मंच पर रविवार को सम्मान समारोह परिचर्चा भारत की राष्ट्र भाषा का निर्णय कब तक ?" पर परिचर्चा आयोजित की गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता सारण जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष  बृजेन्द्र कुमार सिन्हा ने की। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति, जय प्रकाश विश्विद्यालय, छपरा  प्रो0 हरिकेश  सिंह एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अध्यक्ष, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना डॉ अनिल सुलभ, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्री दिनेश कुमार शर्मा  ने व अन्य आगत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की।

हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के पर्यटन विभाग के मुख्य मंच पर रविवार को सम्मान समारोह परिचर्चा भारत की राष्ट्र भाषा का निर्णय कब तक ?" पर परिचर्चा आयोजित की गयी

आगत अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष, वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन डॉ शशि भूषण कुमार ने की। इस मौके पर आयोजित कवि सम्मेलन में  कवि मृत्युंजय मिश्र 'करुणेश' ने पांव रस्तों से रिश्ते निभाते रहे, जिंदगी में कई मोड़ आते रहे से तालियां बटोरी। वहीं डॉ शंकर प्रसाद ने उनकी नजरों का मेरे दिल पर असर होता रहा, धीरे धीरे मैं जहां से बेखबर होता रहा से वाहवाही पाई। तो दिनेश कुमार शर्मा ने ग़ज़ल तेरा पता पूछना एक खता थी,तेरी मोहब्बत ही मेरा पता थी, चर्चित कवियित्री आराधना प्रसाद ने मौका भी हैं फुरसत भी है और गुलों पर रंगत भी , मौसम का अंदाज सुहाना में भी देखूं तुभ देख से श्रोताओं के दिल जीता।

डॉ अर्चना त्रिपाठी ने जिंदगी के सघन तम मर दीप्तमने ही जलाई, सत्य और असत्य को तब तो मैं पहचान पाई, जब क्वभी मैं लड़खड़ाई, तुमने थामी मेरी कलाई तुम हमारी सब की माई को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। रश्मि गुप्ता ने कभी पर्वत  कभी सागर, कभी दरिया की सूरत, वो मुझको घेर का रखा ,सदा एक द्वीप की सूरत, आचार्य आनंद कुमार शास्त्री ने हिन्दी से है आजाद हिन्द, यह आजादी की भाषा है। हिंदी मेरी पहचान, मुहर, हिंदी मेरी परिभाषा है से रसबग जमाया।

डॉ शशि भूषण कुमार  ने पी के लहू सब झूम रहे है, इंसानों के देश में,  बापू तेरे देश में, सुप्रशांत सिंह मोहित ने  कहां से बाजुओं में फौजी अपने इतनी जान ले आये, वतन पर हंसते हंसते मर मिटने अभिमान ले आये और शंकर  शरण शिशिर  ने कभी तो बुद्ध रहते हो, कभी श्रीराम हटे हो, इसी पावन धरा पर तो कभी घनश्याम रहते थे,राकेश कुमार विद्यार्थी ने जल के भीतर गज के ऊपर, ग्राह परा है जारी, आओ  चक्र सुदर्शन धारी, खतरे में जान हमारी की प्रस्तुति की। इसके अलावे डॉ शिववंश पांडेय,कवि राज कुमार प्रेमी, योगेन्द्र प्रसाद मिश्र, डॉ ललन पांडेय, हीरा लाल अमृत, डॉ अरुण कुमार 'निराला',आशुतोष सिंह, मेदिनी कुमार 'मेनन', रेणु शर्मा, युवा कवि अंशुमन आर्यव ने भी अपनी प्रस्तुति से रंग जमा दिया।

02-Dec-2019 12:01

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