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18-Dec-2019 11:17

न्यायपालिका को जनता के प्रति जबाबदेह होना चाहिए : रमेश कुमार चौबे

आज मोदी सरकार में सूचना अधिकार कानून पूर्णरूपेण पंख कतरा बाज की तरह है और अब ऊपर से सुप्रीम कोर्ट के जजों की यह टिप्पड़ी सरकार के नीतियों की चापलूसी की हद हो गई है

न्यायपालिका को जनता के प्रति जबाबदेह होना चाहिए न कि कोलैप्स और भ्रष्ट सिस्टम के बचाव के लिए कुतर्कों का सहारा लेकर आलतू फालतू अनावश्यक टिक्का टिप्पणी करनी चाहिए l मोदी सरकार ने तो सूचना अधिकार कानून का बधियाकरण कर दिया है या यूं कहें तो उसका पर कतर दिया है l आज मोदी सरकार में सूचना अधिकार कानून पूर्णरूपेण पंख कतरा बाज की तरह है और अब ऊपर से सुप्रीम कोर्ट के जजों की यह टिप्पड़ी सरकार के नीतियों की चापलूसी की हद हो गई है l न्यायपालिका को जनता के प्रति और न्याय के प्रति जवाबदेह होना चाहिए न कि सरकार और मोदी शासन पद्धति के चापलूसी के प्रति l सुप्रीम कोर्ट के इस तरह के टिप्पणी की कड़ी आलोचना और घोर निंदा करता हूँ और सुप्रीम कोर्ट के जजों को कहना चाहता हूँ कि समयसीमा के अंदर मुकदमों में न्याय देना सुनिश्चित करें l

टाईम बॉन्ड न्याय प्रणाली विकसित करें न कि उलूर जुलूर राजनीतिक टिक्का टिप्पणी l न्यायायिक भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए आज तक न्यायपालिका क्यों नहीं कारगर उपाय कर रहा है l जजों के सामने पेशी रूपी भ्रष्टाचार निरंतर फलफूल रहा है और आज तक इसको समाप्त करने के लिए कारगर उपाय नहीं किये गए हैं l आज जनता के टैक्स से न्यायपालिका को जो भी सुविधाओं का अंबार प्राप्त है उसका एक अंश भी न्यायपालिका के लोग कार्य नहीं कर रहे हैं और जबाबदेही नहीं ले रहे हैं जो कि अत्यंत ही लज्जा जनक गंभीर बात है l तारीख पर तारीख ,वहस नहीं सुनने की मनमानी, गवाहों की गवाही न लेने की मनमानी ,जजमेंट में देरी की मनमानी, सिरिस्तेदारों की मनमानी, तामिला कराने वाले कर्मियों को मनमानी, रिकार्ड रूम से कागज देने में मनमानी इत्यादि इत्यादि ये सब कुछ बंद होना चाहिए था लेकिन अब तक निरंतर जारी है l

न्यायपालिका की अति अनावश्यक उतशृंखलता पर अंकुश लगाया जाना चाहिए क्योंकि न्यायपालिका जनता के प्रति और संविधान और कानून के प्रति जबाबदेह है l न्यायपालिका के समस्त सिस्टम के लोग लोकसेवक हैं न कि अघोषित ईश्वरीय सर्व शक्तिमान न्यायमूर्ति और उन्हें जनता के प्रति जबाबदेही का निर्वहन करना चाहिए l न्यायायिक चारित्र संवेदनशीलता और न्यायायिक जबाबदेही के दायरे में रहना चाहिए l

सुप्रीम कोर्ट के जजों को मालूम होना चाहिए कि देश में अनेकानेक भ्रष्टाचार आरटीआई के कारण ही उजागर हुआ है और इसके लिए अनेकानेक भ्रष्टाचारियों को जेल जाना पड़ा जिसमें सिस्टम के ही भ्रष्टाचारी जेल गए हैं l अगर न्यायपालिका में भी पूर्णरूपेण आरटीआई लागू हो गया जैसा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति श्री तरुण गोगोई जी का ऐतिहासिक फैसला आया है l अगर आरटीआई कार्यकर्ता ईमानदारी से न्यायपालिका पर आरटीआई आवेदन लगाकर भ्रष्टाचार कदाचार और न्यायायिक गड़बड़ियों को उजागर करना शुरू कर दे तो देश की जनता के सामने न्यायपालिका के अंदर की खामियों गड़बड़ियों का वास्तविक तस्वीरों को प्रकट करने में मदद मिलेगा l

18-Dec-2019 11:17

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