CIN : U22300BR2018PTC037551
Reg No.: 847/PTGPO/2015(BIHAR)

94714-39247 / 79037-16860
25-Nov-2019 06:46

न्यायायिक कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, असहिष्णुता, असहयोग, उदासीनता, रूखापन के खिलाफ लिखित शिकायत

पटना सिविल कोर्ट के कर्मचारियों का भ्रष्टाचार में संलिप्तता ,कार्य और कर्तब्य के प्रति उदासीनता और उनके असहयोग से मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी भी परेशान l लेकिन पटना सिविल कोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन न्यायायिक प्रणाली को चुस्त दुरुस्त करने में लापरवाह l पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को वरिष्ठ जजों की जाँच कमिटी बनाकर सभी पदस्थापित जजों से एक एक कर पूछताछ करके जाँच परक कार्रवाई होनी चाहिए l न्यायायिक कर्मियों के द्वारा किस हद तक माननीय जजों को अपने बिगड़े हुए कार्य संस्कृति द्वारा परेशान किया जाता है इसका उद्भेदन न्यायालय हित में जरूरी हो गया है l जब माननीय न्यायालय के जजों को अपने न्यायायिक सब ऑडिनेट कर्मियों के बेरुखेपन से परेशानी होता है तो आम पीड़ित परिवादी को कितना कष्ट झेलना पड़ता होगा इसकी कल्पना सहज ही किया जा सकता है l

जब माननीय न्यायालय के जजों को अपने न्यायायिक सब ऑडिनेट कर्मियों के बेरुखेपन से परेशानी होता है तो आम पीड़ित परिवादी को कितना कष्ट झेलना पड़ता होगा इसकी कल्पना सहज ही किया जा सकता है l

आज भी मैंने पटना सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी महोदय की वेवशी और लाचारी को देखा और उस लाचारी को भरी अदालत में साफ़गोई से स्वीकार करते हुए कहते देखा तो मेरे हृदय में बेदना हुई l दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि कोई अधिवक्ता किसी कोर्ट कर्मचारियों के भ्रष्टाचार,असहयोग पूर्ण व्यवहार,रूखापन, रेकॉर्ड नहीं मिलने के कृत्य के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं किया l न ही करता है और न ही करने की प्रवृत्ति है l कर्मचारियों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता के लिए बहुत हद तक अधिवक्ता भी जिमेवार हैं और अपने क्लाइंट्स से पेशी नाजायज रकम दिलवाते हैं देते हैं l अधिवक्ता गण खाली मौखिक मेंसन करते हैं कि रिकॉर्ड पुट अप नहीं हुआ आज तारीख है गवाही है लेकिन अब तक रिकॉर्ड नहीं मिला l जबकि मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी महोदय बारम्बार कहते रहे कि आपलोग लिखित शिकायत दर्ज कीजिये लिखित आवेदन देकर मेंसन कीजिये तभी तो हम कुछ कर सकते हैं l

वर्तमान मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी का अब तक चार पेशकार बदला जा चुका है l जबकि उन्होंने किसी भी पेशकार के विरुद्ध लिखित या फिर मौखिक रूप से शिकायत दर्ज नहीं किया था l प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है l मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी के व्यवहार व वर्ताव से वादी प्रतिवादी सभी खुश रहते हैं l सभी अधिवक्ता खुश रहते हैं l लेकिन उनके कोर्ट में ही असहयोगी कर्मचारियों को जानबूझकर रखा गया है l आम तौर पर न्यायालय में पग पग पर कितना बड़ा भ्रष्टाचार व लेनदेन होता है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है l मैंने आज पुनः एक बार फिर न्यायायिक कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, असहिष्णुता,असहयोग, उदासीनता,रूखापन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करने का साहस किया तो कोर्ट में खलबली मच गया l मैं स्पष्ट रूप से बोल दिया कि आज जो भी होगा देखूंगा लेकिन न्यायायिक कर्मचारियों के भ्रष्टाचार बेरुखेपन उदासिनता लेनदेन सब का लिखित शिकायत दर्ज करूँगा और मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी को नैतिक सहयोग कर उन्हें आधार दूँगा l नतीजा यह हुआ कि खलबली मच गई और मेरा रिकॉर्ड मिल गया और मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी के सामने पुट अप किया गया लेकिन जब यहाँ दुरुस्त हुआ तो रीडर बाबू गायब हो गया l लाचार मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी ने बताया कि यही कारण है कि मुकदमों में जल्दी न्याय नहीं मिलता है और कोर्ट के कर्मचारियों का असहयोग पूर्ण रवैया अपनाने के कारण न्यायायिक पदाधिकारियों को भी दिक्कत झेलना पड़ता है l

पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश से सादर आग्रह है कि सम्पूर्ण प्रकरणों की जाँच कर न्यायालय को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए कारगर उपाय करने चाहिये l आम लोगों को भी खुलकर इस तरह के कृत्य का लिखित शिकायत दर्ज करना चाहिए l माननीय अधिवक्ताओं को भी खुलकर सामने आने की जरूरत है l न्यायालय के कर्मचारियों के कुकृत्यों का विरोध सबको मिलकर करना चाहिए l इसमें अधिवक्ताओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहिये l करप्ट न्यायायिक कर्मचारियों का पर्दाफाश करने की जरूरत है l न्यायायिक कर्मचारियों के करप्शन का उद्भेदन होना चाहिए l जनहित में सार्वजनिक करता हूँ l

25-Nov-2019 06:46

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