20-Sep-2019 10:52

भारत में न्याय और न्यायालय भी राजनीतिक इशारों के सहारे चल रही हैं : नवरुणा चक्रवर्ती (मृतक)

दुनिया के बेस्ट पुलिस टीम के बिहार कप्तान, 84 महीने बाद भी आप ना बता पाए नवरूणा का हत्यारा कौन ?

थानाध्यक्ष, जांचकर्ता बदलते रहें, फिर भी सवाल जहां के तहां। लेकिन आज 7 साल बाद कुछ 2012 के पदाधिकारी सामान्य दारोगा से थानाध्यक्ष और आईजी मुजफ्फरपुर से डीजीपी बिहार बने। परंतु अपाहिज पुलिस व्यवस्था ने नहीं किया कोई सफल कार्रवाई। तो वहीं देश के प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई ने अपनी राजनीतिक कायरता जारी रखी। सीबीआई निष्पक्ष जांच तो छोड़िए, सुप्रीम कोर्ट को भी 6 सालों से कर रही हैं गुमराह। तो यह मान ही लिया जाए कि भारत में न्याय और न्यायापालिका एक भ्रम है। 18 सितंबर 2012 की रात नगर थाना के जवाहरलाल रोड स्थित आवास से सोई अवस्था में नवरुणा का अपहरण कर लिया गया था। इसके ढाई माह बाद उसके घर के पास के नाले की सफाई के दौरान मानव कंकाल मिला था। डीएनए जांच में यह कंकाल नवरुणा का साबित हुआ। इस मामले में पुलिस की लापरवाही और कार्यशैली शुरू से ही संदेहास्पद रही ।पुलिस मामले को प्रेम प्रसंग बता पूरे घटना को अलग रूप देने में जुटी थी ।

पुलिस द्वारा प्रेम प्रसंग बताने और परेशान करने से आजिज़ आकर जब नवरुणा के परिजनों ने एक महीने बाद भी कोई कारवाई होती नही देखी, तब उन्होंने 19 अक्टूबर, 2012 को आत्महत्या की धमकी दी थी. इस धमकी के बाद सकते में आई पुलिस ने पहली बार कोई ठोस कारवाई की और तीन संदिग्ध अपराधीयों को पकड़कर जेल में डाला, जिनसे आजतक वह कुछ उगलवा नही पाई है. कई तो इस गिरफ़्तारी पर ही सवाल खड़े करते है कि क्या बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटी मुर्गियों को हलाल किया गया!!....पुलिस की केस डायरी भी इस बात की गवाही देते है कि 19-20 अक्टूबर से ही कुछ कारवाई होती दिखी. तबतक पुलिस 12वर्षीया नवरूणा के प्रेमी की ही तलाश में पूरी तन्मयता और बेशर्मी के साथ जुटी हुई थी! इसके बावजूद पुलिस लगातार असहयोग करने का तोहमत लगाती रही! बिहार पुलिस की कार्यशैली से ऊबकर मुज़फ़्फ़रपुर के ही एक युवा और दिल्ली में कानून की पढ़ाई कर रहे अभिषेक रंजन ने सुप्रीमकोर्ट में पीआईएल दायर के मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी ।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2014 में नवरुणा मर्डर केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई ।2014 से आजतक कई लोगों की गिरफ्तारी सीबीआई द्वारा की गई और सभी कोर्ट से बेल पर बाहर निकल गए ।इनमें कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमे 90 दिनो तक आरोप पत्र समर्पित नही करने का लाभ संदेहास्पद लोगों को मिला । सीबीआई ने पूरे प्रकरण में शहर के कई रशुखदार और जनप्रतिनिधियों को नोटिस देकर पूछताछ की और दर्जन के करीब लोगों को संदेह के आधार पर जेल भी भेजा ।

2016 में पुनः अभिषेक रंजन ने सुप्रीमकोर्ट में यह आवेदन दिया कि सीबीआई द्वारा तय समय मे जांच पूरी नहीं करना कोर्ट का अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आवेदन के बाद सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई। पर लगातार टाइम पेटिंसन की मांग करनेवाली सीबीआई फिर से टाइम पेटिंसन मांग चुकी है जिसका अंतिम समय नवंबर में है। फिलहाल नवरुणा के पिता अतुल्य चकर्वर्ती और माता मैत्रयी चक्रवर्ती आज भी बेटी के न्याय की आशा लिए बैठे हैं ।

20-Sep-2019 10:52

कानून मुख्य खबरें

समाचार भारत_दर्शन राजनीति खेल जुर्म शिक्षा चिकित्सा धर्म परम्परा व्यक्तित्व कला सम्मान फिल्म सामाजिक_संस्थान रोजगार कानून अर्थव्यवस्था समस्या पर्यावरण सैनिक पुलिस गांव शहर ज्योतिष सामान्य_प्रशासन जन_संपर्क छात्र_छात्रा
Copy Right 2020-2025 Ahaan News Pvt. Ltd. || Presented By : CodeLover Technology