06-Feb-2019 05:52

स्वराज भारत का सपना न्याय के साथ ही संभव है : अमोद कुमार निराला

ग्राम कचहरी एवं प्रतिनिधियों को सर्वसुविधा सम्पन्न बनाने के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे माननीय अमोद कुमार निराला।

बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष माननीय अमोद कुमार निराल द्वारा लंबे समय से बिहार सरकार से अपने हक की माँग करते आ रहे हैं। सभी 38 जिलों के ग्राम कचहरी एवं इसके निर्वाचित प्रतिनिधि सरपंच, उपसरपंच एवं पंचगण तथा कर्मीगणों को बिहार सरकार शासन-प्रणाली द्वारा वर्ष 2006 से उपेक्षित रख हुआ हैं। जिस वजह से राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का स्वराज भारत का सपना साकार करने में हम सबों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही सरकर का वाद न्याय के साथ विकास कार्य बाधित हो रही है। स्वयं मुख्यमंत्री नीतिश कुमार द्वारा 13 दिसंबर 2013 को बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों एवं 22 जुलाई 2016 को बेवकास्टिंग के माध्यम से दिये गये वक्तव्य तथा डी जी पी महोदय के ज्ञापांक संख्या 03 अभियान दिनांक 2 जनवरी 2012 आदि निर्गत कई ऐ आदेषों को राज्य के अधिकारी कर्मचारी एवं पुलिस पदाधिकारी मानने से इनकार करते हैं। जिसे अविलंब नियमानुसार ग्राम कचहरी स्तर पर लागू कराया जाय। साथ ही निम्नांकित 21 सूत्री माँग पूरा करते हुए सुबे के ग्राम कचहरी को सर्वसुविधा सम्पन्न बनाया जाए। ताकि माननीय व्यवहार, अनुमंडल आदि न्यायालयों का बोझ कम किया जा सकें एवं आमजन को सस्ता, सुलभ, ससमय और अधिक तत्परता से न्याय मिल सके। साथ ही न्याय के क्षेत्र में बिहार का नाम विश्व स्तर पर स्थापित हो सके।

मुख्य 21 माँगें इस प्रकार से हैं :- 1. माननीय सरपंच को मजिस्ट्रेट का पावर देते हुए न्यायालय सुवधि सम्पन्न बनाया जाए। 2. सुबे के सरपंच, उपसरपंच एवं पंचों को माननीय विधायकगणों की तरह जनसंख्या के आधार पर वेतन, भत्ता, पेंशन, स्वास्थ्य एवं पूर्ण बीमा सुविधा 2006 से दी जाए। 3. ग्राम कचहरीयों में आदेषपाल, भू-मापक (अमीन), कम्प्यूटर ऑपरेटर, ग्राम रक्षा दल, चौकीदार की नियुक्ति कराई जाए। 4. सुबे के 8391 ग्राम कचहरियों को कम्प्यूटरीकृत कराते हुए, प्रतिनिधि एवं कर्मिगणों को प्रशिक्षित की जाए तथा नये संषोधित पुस्तकें, पत्र-पत्रिका, मार्गदर्षिका, बिहार डायरी आदि सभी तरह की विभागीय कागजात उपलब्ध कराई जाए। 5. ग्राम कचहरी संचालित स्थल पर सुव्यवस्थित शौचालय, शुद्ध पेयजल, सोलर लाईट एवं पक्की सड़क से अच्छादित अविलंब कराई जाए। 6. वर्ष 2006 से अब तक का बकाया मानेदय नियत विशेष एवं यात्रा भत्ता, कन्टिजेंसी, भवन का किराया एवं पंचम राज्य वित्त आयोग द्वारा अनुशासित राशि आदि का भुगतान कराया जाए। 7. रिक्त ग्राम कचहरियों में अविलंब सचिव एवं न्यायामित्रों की स्थाई बहाली कराई जाए। 8. अन्य प्रतिनिधियों की तरह निर्वाचित जनप्रतिनिधि सरंपच, उपसरपंच एंव पंचगणों को भी लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत स्थानीय निकाय एम. एल. सी. चुनाव हेतु मतदाता बनायें। 9. नव निर्मित पंचायत सरकार भवनों में विधिवत ग्राम कचहरी का कार्य संचालित कराया जाए तथा शेष पंचायातों में पंचायत सरकार भवन का अविलंब निर्माण हो। 10. पंचायत सरकार भवन/ पंचायत भवनों में झंडोत्तोलन 26 जनवरी ग्राम कचहरी तथा 15 अगस्त को पंचायत प्रधान द्वारा किये जाने का आदेष निर्गत किया जाए।

11. ग्राम कचहरी संचालन नियमावली 2007 की धारा 90 से 122 का शत-प्रतिषत अनुपालन कराई जाए तथा पुलिस प्रषासन का हस्तक्षेप बंद कराते हुए माननीय न्यायाल का पूर्ण सहयोग सुनिष्चित कराई जाए। 12. सरपंच रामनाथ चंद्रवंषी, मृदुला मिश्रा, नंदकिषोर यादव, पंच मोबिन खातुन आदि प्रतिनिधियों की हुइ निमर्म हत्या एवं न्याय प्रतिनिधियों पर हुए कातिलाना हमले के विरूद्ध उच्च स्तरीय जाँच तथा स्पीड ट्रायल के माध्यम से अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए एवं परिजनों को सरकारी नौकरी मुआवजा देने की व्यवस्था कराई जाए। 13. चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित प्रशिक्षण अविलंब हो तथा प्रत्येक जिला / प्रखण्ड स्तर पर संघ अध्यक्ष, प्रधान एवं प्रबुध अनुभवी सरपंच, उपसरपंच को भी स्टेट प्रशिक्षण के रूप् में सम्मिलित किया जाए। 14. बिहार राज्य धार्मिक न्याय परिषद् के मठ, मंदिर, मस्जिद आदि धार्मिक न्यास समितियों में पंचपरमेश्वर को भी सदस्य बनाया जाए। 15. ग्राम कचहरी स्तर पर पशु रक्षा भवन का निर्माण एवं संचालन सरपंचों की देख-रेख में हो। 16. ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों पर हो रहे आए दिन मुकदमें बंद हो तथा प्राप्त वादों को वरीय पदाधिकारी द्वारा जाँच कराकर विशेष प्रतिवेदित घोषित करें। 17. ग्राम कचहरी न्यायपीठ को विकासात्मक कार्यों की समीक्षा तथा एन. ओ. सी. निर्गत करने का अधिकार दी जाए। 18. ग्राम कचरही की समीक्षा न्यायपीठ की उपस्थिति में हो तथा प्रत्येक पंचायत स्तर पर स्वच्छता एवं जनसुविधा हेतु मालवाहक गाड़ी एवं एम्बुलेन्स उपलब्ध कराई जाए। 19. आँगनवाड़ी, मनरेगा, जनवितरण, सात निष्चय एवं पंचम राज्य विŸा आयोग आदि विभाग में प्रतिनिधियों के प्रात्प अधिकार को शत-प्रतिषत जमीनी हकीकत बनाया जाए। 20. सुबे के ग्राम कचहरी, प्रतिनिधि पंच, उपसरंपच एवं सरपंचगणों के साथ हा रहे कातिलाना हमले, मार-पीट, गोली-कांड आदि से घायल पीड़ित प्रतिनिधियों के ईलाज का खर्च सरकार वहन करें एवं हत्या की धमकी, झूठे वादों में फँसाये जाने की साजिष, अपराधिक घटनायें, अविलंब बंद हो, वहीं इच्छुक प्रतिनिधियों को सुरक्षा गार्ड या आग्नेयास्त्र का लाईसेंस दिया जाए। 21. बिहार प्रदेष पंच-सरपंच संघ को सरकारी मान्यता प्रदान करते हुए प्रखण्ड से राज्यस्तर तक के समस्त शासन-प्रषासन के पदधारकगण पूर्ण सहयोग प्रदान करना सुनिश्चित करें।

इन माँगों के संबंध में कहते हुए माननीय अमोद कुमार निराला ने कहा कि पूर्व के लगभग डेढ़ लाख एवं वर्तमान प्रतिनिधि तथा कर्मीगणों के साथ ही बिहार को स्वराज के रूप में स्थापित किया जा सकता हैं। स्वराज के महात्मा गांधी के सपनों को तभु साकार किया जआ सकता हैं जब पंच को परमेश्वर के रूप में घर तक स्थापित किया जाए। पंच, सरपंच सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन के माध्यम नहीं हैं। पंच सरपंच भारत के न्यायिक व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। न्याय के सबसे महत्वपूर्ण एवं मजबूत कड़ी को आज सरकार से आग्रह करने की जरूरत पड़ रही हैं। यह दुर्भाग्य है कि न्याय के लिए न्याय प्रहरी न्यायालय की जगह राजनेताओं के भरोसे पर हैं। संवैधानिक व्यवस्था को सही तरीकों से भारत में लागू नहीं कर पाने का प्रतिफल ही है कि आज बिहार की सरकार अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास ही कर रही हैं। पंच - सरपंच को सीधे तौर पर न्यायालय के प्रमुख स्तंभ सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं जिला कोर्ट के साथ सीधा जोड़ कर संबंध रखना चाहिए।

06-Feb-2019 05:52

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