18-Dec-2019 12:46

खेलकूद टीम में अंगद की पाँव की भांति पैर जमाये नाकामयाब कोचों को पुलिस खेलकूद से बाहर करने के संबंध

मैं बिहार पुलिस खेलकूद के कदाचार आंतरिक गंदगी को खत्म करने के लिए जो भी अभियान चलाया था उसको कुंद करने की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होगी और मैं निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष कार्रवाई होने तक मूवमेंट को जारी रखूंगा l

बिहार पुलिस खेलकूद टीम में अंगद की पाँव की भांति पैर जमाये नाकामयाब कोचों को पुलिस खेलकूद से बाहर कर सुदूरवर्ती इलाकों में फील्ड ड्यूटी पर तैनात करने के संबंध में पुलिस मुख्यालय को गंभीरता से विचार करना चाहिए l क्योंकि पुलिस खेलकूद में आराम करने और चकलस करने के लिए वैसे उम्रदराज लोग खेलकूद टीम में कोंच बने हुए हैं जो आज तक एक भी योग्य खिलाड़ी को पैदा नहीं कर पाए हैं l कई कोंच तो खेल बदल बदल कर खेलकूद टीम में बने रहने के लिए अपना मूल खेल बदल कर कभी इस खेल का कोंच बनते हैं तो कभी उस खेल का कोंच बनते हैं l बेहया की हद तो तब होता है जब ए .एस.आई, एस.आई स्तर के लोग ग्राउंड मेंटेनेंस तो टीम वाहक बनकर विभिन्न खेल टीम को बाहर ले जाते हैं और खेल की प्रगति के बदले सैर सपाटा करते हैं और महिला खिलाड़ियों के साथ बाहर में पार्क भ्रमण करते हैं होटल में ठहरते हैं l

जो प्रशिक्षक एन.आई.एस डिप्लोमा या फिर सर्टिफिकेट कोर्स करके भी लंबे समय से एक भी योग्य खिलाड़ी पैदा नहीं किये हैं उनको पुलिस खेलकूद में बनाये रखने के पीछे का मकसद आखिर क्या हो सकता है इसको पुलिस मुख्यालय स्पष्ट करे l खिलाड़ियों द्वारा कोंच पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाया गया है यहाँ तक कि यौन शोषण उत्पीड़न असहयोग इत्यादि इत्यादि का l लेकिन फिर भी उसका गंभीरता व गहराई से अब तक जाँच नहीं हो पाया है और जो जाँच भी होता है तो अधिकारी लिपापोती करते हैं और येन केन प्रकारेण कोई अधिकारी उजागर करने का साहस भी करता है तो उस रिपोर्ट पर लिपापोती बड़े सलीके से कर दी जाती है l

खेलकूद में बने रहने के लिए सारी सर्वीस पीरियड खेलकूद में गुजार देने की परिपाटी बिल्कुल ही उचित नहीं है और इसका मैं जोरदार विरोध करता हूँ और जरूरत पड़ी तो फिर एक और जनहित याचिका पटना उच्च न्यायालय में दायर करूँगा l पुलिस खेलकूद के कोंच के कैरेक्टर पर भी कई बार प्रश्नचिन्ह कई खिलाड़ियों ने लगाया है लेकिन खाली लिपापोती की परिपाटी जारी रहने के कारण पीड़ित भी भयभीत हो जाते हैं कि उन्हें ही प्रताड़ना मिलता है डांट फटकार लगाई जाती है l मैं बिहार पुलिस खेलकूद के कदाचार आंतरिक गंदगी को खत्म करने के लिए जो भी अभियान चलाया था उसको कुंद करने की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होगी और मैं निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष कार्रवाई होने तक मूवमेंट को जारी रखूंगा l

एक बात सबको स्पष्ट रूप से आज बता देता हूँ कि चाहे कोई भी विषम परिस्थिति या कोई भी मुझे डराये धमकाये या झूठा आरोप लगाते हुए केस में फसाये किसी को भी छोड़ने वाला नहीं हूँ l पुलिस अधिकारियों से एक ही निवेदन करता हूँ कि मेरे आरोपों को नजरअंदाज करने से मामला रफादफा नहीं होगा और मेरा मूवमेंट अंतिम मुकाम यानि खेलकूद की पवित्रता बहाल करने तक जारी रहेगा l इसलिए पुलिस विभाग के सभी जिम्मेवार पदाधिकारियों से फिर एक बार बड़े ही विनम्रता से आग्रह अनुग्रह और जनहित में मांग करता हूँ कि मेरे आरोपों की जाँच पूर्णतः गहराई से हो l कोई भी किसी प्रकार की लिपापोती नहीं हो अन्यथा न्यायालय में जाऊँगा और तब पुलिस विभाग की बदनामी होगी तो इसकी जबाबदेही भी जिम्मेवार पुलिस पदाधिकारियों की ही होगी l सादर नमस्कार के साथ सभी पीड़ितों से निवेदन है कि इसी तरह से जानकारी देते रहे ताकि हम जनहित में आप पीड़ितों की लड़ाई लड़ते रहे l सादर -----रमेश कुमार चौबे, महासचिव, नगरिक अधिकार मंच l

18-Dec-2019 12:46

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