02-Apr-2020 08:57

सोने से पहले खुद पढ़े और अपने बच्चों को जरूर सुनाएं

👉 त्याग और प्रेम🌹 भगवान ने उत्तर दिया- नारद! यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। जो भक्त मेरे लिए कलेजा दे सकता है उसके लिए मैं भी अपना विधान बदल सकता हूँ

एक दिन नारद जी भगवान के बैकुंठ धाम को जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक संतानहीन दुखी मनुष्य मिला। उसने नारद जी से कहा-नारद जी मेरे कोई संतान नही है आप मुझे आशीर्वाद दे दो तो मेरे भी सन्तान हो जाय। नारद जी ने कहा-मैं तो आशिर्वाद नही दे सकता पर भगवान के पास जा रहा हूँ। उनकी जैसी इच्छा होगी लौटते हुए जरूर बताऊँगा। नारद भगवान के धाम पहूँचे तो उन्हें उस निसन्तान व्यक्ति की बात याद आ गयी उन्होंने भगवान से उस संतानहीन व्यक्ति की बात पूछी तो भगवान ने उत्तर दिया कि उसके पूर्वजन्म के प्रारब्ध-कर्म ऐसे हैं कि अभी सात जन्म तक भी उसके कोई सन्तान नहीं होगी। नारद जी ने बात सुनी तो चुप हो गये। इतने में एक दूसरे महात्मा उधर से निकले, उस व्यक्ति ने उनसे भी प्रार्थना की। उनने आशीर्वाद दिया और दसवें महीने उस निसन्तान गृहस्थ के पुत्ररत्न उत्पन्न हो गया। एक दो साल बाद जब नारद जी उधर से लौटे तो उनने कहा- भगवान ने कहा है-तुम्हारे अभी सात जन्म संतान होने का योग नहीं है।

इस पर वह व्यक्ति हँस पड़ा। उसने अपने पुत्र को बुलाकर नारद जी के चरणों में डाला और कहा-एक महात्मा के आशीर्वाद से यह पुत्र उत्पन्न हुआ है आप भी इसे अशीर्वाद दीजिये। नारद को भगवान पर बड़ा क्रोध आया कि व्यर्थ ही वे हमसे झूठ बोले और हमारी फजीहत भी करवाई। मुझे आशीर्वाद देने की आज्ञा कर देते तो मेरी भी प्रशंसा हो जाती, सो तो किया नहीं, उलटे मुझे झूठा और उस दूसरे महात्मा से भी तुच्छ सिद्ध कर दिया। नारदजी क्रोधित होते हुए विष्णु लोक में पहुँचे और गुस्से मे भगवान को भला बुरा कहा। भगवान ने नारद को प्रेम से बैठाया ठंडा जल पिलाया और सान्त्वना देते हुए इसका उत्तर कुछ दिन में देने का वायदा किया। नारद वहीं ठहर गये। एक दिन भगवान ने कहा-नारद लक्ष्मी बीमार हैं- उसकी दवा के लिए किसी किसी भी भक्त का कलेजा चाहिए। तुम जाकर माँग लाओ। नारद कटोरा लिये पूरे ब्रह्मांड में जगह-जगह घूमते फिरे पर किसी ने न दिया। अन्त में उस महात्मा के पास पहुँचे जिसके आशीर्वाद से पुत्र उत्पन्न हुआ था। उसने भगवान की आवश्यकता सुनते ही तुरन्त अपना कलेजा निकालकर दे किया। नारद ने उसे ले जाकर भगवान के सामने रख दिया।

भगवान ने उत्तर दिया- नारद! यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। जो भक्त मेरे लिए कलेजा दे सकता है उसके लिए मैं भी अपना विधान बदल सकता हूँ। तुम्हारी अपेक्षा उसे श्रेय देने का भी क्या कारण है तुम समझ ही गये होंगे। जब कलेजे की जरूरत पड़ी तब तुमसे यह न बन पड़ा कि अपना ही कलेजा निकाल कर दे देते। तुम भी तो भक्त थे। तुम दूसरों से माँगते फिरे और उसने बिना आगा पीछे सोचे तुरन्त अपना कलेजा दे दिया। त्याग और प्रेम के आधार पर ही मैं अपने भक्तों पर कृपा करता हूँ और उसी अनुपात से उन्हें श्रेय देता हूँ।” नारद चुपचाप सुनते रहे। और उनका क्रोध शान्त हो गया।

भगवान के खेत मे बोने पर वह हजार गुना लौट कर आता है कभी हम ट्राय करके तो देखें।उनके साथ किये गये सौदे में कभी घाटा नही लगता पर पहले वो लेता है उनके पास बोवो और काटो का सिद्धांत है पर एक बार बोयें तो सही फिर न मिले तो कहना फिर वो उनके लिए अपने विधान को भी बदलना पड़े तो देर नही करते। तो आइए अपनी प्रतिभा, समय,प्रभाव एवं धन का उपयोग इस सुंदर सृष्टि को सजाने ,सँवारने व उसे और सुंदर बनाने में करें और नित्य कुछ न कुछ अच्छा जरूर करें ताकि चेन की नींद सो सकें।

02-Apr-2020 08:57

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