08-Oct-2019 08:10

विजयादशमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं : अहान न्यूज़

इंसानियत और धर्म के नाम हो जाना! आसां नहीं है रावण का राम हो जाना!!

आज एक ऐसा समय जब हर बात सामाजिकता से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों की तलाश करने का प्रयास हो रहा है, जबकि भारत का इतिहास हमेशा से मानवीय मूल्यों के सिद्धांतों पर ही काम करता रहा है। और इसी को लेकर आज विजयादशमी के शुभ अवसर पर अपने तमाम भारतवासियों को मानवीय मूल्यों पर जीने का अनुरोध करता हूं। अहान न्यूज़ के माध्यम से तमाम भारतवासियों को विजयादशमी की ढेरों शुभकामनाएं एवं बधाई देता हूं।

आज ही के दिन राम -रावण युद्ध में 'रावण' मारा गया था। रावण पर राम की विजय के बाद अयोध्या से लेकर पूरे देश में विजयोत्सव मनाया गया था। तभी से उस विजयोत्सव को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। हर साल की भांति इस साल भी पूरे देश में "रावण -दहन" का कार्यक्रम संपन्न होगा। यहपरंपरा सदियों से चली आ रही है। फिर भी "रावण" जिंदा है। उसका अस्तित्व मिटता ही नहीं। "रावण" हर व्यक्ति के अंदर है। समाज में है और देश में है। दुनिया में भी वह जलाने से नहीं मरेगा। रावण एक प्रवृत्ति है, रावन मरेगा तो, अंदर के दृढ़ संकल्प के बाद मरेगा। अंदर के रावण को मारना होगा। यह काम खुद को करना होगा। फिर उसका अंत हो जाएगा। उसके जलाने की परंपरा को जिंदा रखकर उसे मारा नहीं जा सकता। यह परंपरा तो, एक फर्ज अदाएगी सिद्ध हुई है। बिल्कुल खोखली, जरूरत है गहन चिंतन की और उस पर ठोस अमल करने की सदा के लिए "रावण" मारा जाए, यह यत्न करना लाजिमी है।

"रावण" के मारने का मूल मकसद है कि पहले अपने अंदर का रावण मरे यानी विकृतियों से हम छुटकारा पा सके'। असत्य पर सत्य की जीत हो, आचरणहीनता पर आचरण स्थापित हो। अधर्म पर धर्म का ध्वजा फहरे, अशिक्षा पर शिक्षा का वर्चस्व स्थापित हो, विषमता खत्म हो, समता की स्थापना हो। आदमी में आदमी का भेद मीटे, जाति मजहब का विभेद समाप्त हो। सबके जेहन में देश सर्वोपरि हो, मेल-मोहब्बत और भाईचारे का चतुर्दिक साम्राज्य स्थापित हो। यह स्थिति "रावण" के मिटने की हो सकती है। "वसुधैव कुटुंबकम"की हमारी सोच भी स्थापित हो सकती है। अत: आइए, हम असली "रावण" को मारने का असली प्रयास करें यह देश-समाज के लिए बेहद सुकूनदाई होगा और कल्याणकारी भी हो। विजयादशमी माता दुर्गा की पूजा अर्चना के साथ संपन्न होता है। माता के नौ द्वार वाले शरीर रुपी दुर्ग के भीतर रहने वाली जीवनी शक्ति रूपी दुर्गा के नौ रूप हैं - 1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघंटा 4. कूष्माण्डा 5. स्कन्दमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिध्दीदात्री

हमें आज भारत को इस मातृत्व रूपी दुर्गा जी की आराधना के साथ ही संकल्प लेना चाहिए, कि हम अपने कर्तव्यों के साथ मानवता को जीवंत रखेंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, तब जब मानव मानव की हत्या कर उन्हें एवं उनके परिवार को और द्वितीय हानि पहुंचाते हैं। यह बहुत ही विकट संकट की घड़ी होती है, जब किसी ऐसे लोगों की हत्या कर दी जाती है। जो कि परिवार का मुखिया एवं संचालक होता है। माताओं के गोद सुने हो जाते हैं, तो बहन की राखी टूट जाती है, औरतों के मांग की सिंदूर मिट जाती है, तो बच्चों के सर से पिता का साया उठ जाता है। जिस स्वरुप में प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखी गई, वह आज संकट में नजर आता है और रावण रूपी असामान्य लोग आज समाज में फल-फूल रहे हैं। तो आज के दिन दृढ़ संकल्प करने का दिन है कि हम ऐसे लोगों से बचें एवं भारत की लोकतांत्रिक सरकार इसका ख्याल रखें कि वाकई में जो रावण है उसका अंत हो।

08-Oct-2019 08:10

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