18-Jul-2019 11:34

अंग्रेजियत से गुरूजनों पर हथियार का प्रयास सरकार की बड़ी भूल : डॉ महेश राय

छुपाते है वो कमियाँ अपनी, लगाकर हमपर आरोप सारे। दमन का हमें भय दिखाकर, छीन रहे वो अधिकार हमारे।

उपरोक्त पंक्तियों के साथ बेगुसराय की एक शिक्षिका श्रीमती रंजना सिंह कहती हैं कि आज जो हुआ, वह सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। सभी प्रकार की वार्ताओं की समाप्ति से पहले ही एक शांति आंदोलन को हिंसात्मक बना दिया। हिंसा का भी शिकार ऐसे निरीह को बनाया गया, जिनके पास पुस्तकें हैं और कलम से इतिहास बनाने वालों को जन्म देने का काम करते हैं। यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि शिक्षक का स्थान स्वयं ईश्वर ने भी सर्वोच्च स्थान दिया है।तानाशाह सरकार ने आज जो शिक्षक गए थे अधिकार प्रदर्शन करने, उल्टे सरकार ने उन शिक्षकों पर ही अपना शक्ति प्रदर्शन करवा दिया। बिहार सरकार की इस प्रकार की बर्बरता के लिए बिहार के तमाम शिक्षकों से मांफी मांगने के साथ सभी मांगों को भी पूरा करना होगा। नहीं तो उस स्थिति में जब सरकार अपना नजरिया नहीं बदलती हैं तो शिक्षक और बड़े समूह में इस आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलायेगी।

हाजीपुर से शिक्षक डॉ महेश राय बताते हैं कि आज बिहार भर से आते हुए नियोजित शिक्षकों पर लाठीचार्ज से पूरे पटना में अफरातफरी मच गई। पटना में पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर शिक्षकों पर लाठीचार्ज कर पीटा। जब पूरा बिहार एकजुट होकर जहां "समान काम समान वेतन" के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे, तब नियोजित शिक्षकों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई हैं। गर्दनीबाग से विधानसभा घेराव करने निकले नियोजित शिक्षकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। लगभग एक घंटे से पुलिस ने नियोजित शिक्षकों को प्रतिबंधित एरिया में आने से रोक रखा था। हजारों की संख्या में पहुंचे नियोजित शिक्षक लगातार बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की तरफ से नियोजित शिक्षकों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जा रहा था। लेकिन उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। पुलिस की तरफ से किए गए लाठीचार्ज में महिला नियोजित शिक्षकों को भी काफी चोटे आई। आज पूरे पटना इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा, पुलिस लगातार नियोजित शिक्षकों को खदेड़ रही थी। यह बहुत ही दर्दनाक मंजर था, जब हम शिक्षकों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया। यह आंदोलन नहीं शिक्षा और शिक्षक के सम्मान की लड़ाई हैं। शिक्षक कभी हिंसक नहीं हो सकता हैं जो आज हुआ वह सरकार के उपर तामाचा का काम करेंगा।

हाजीपुर से ही नवनीत कुमार बताते हैं कि शिक्षकों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस की बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की कड़ी निंदा से भी ऊपर की बातें हो गई। आज शिक्षक अपने हक़ की लड़ाई में विधानसभा घेराव के लिए 1 लाख शिक्षक पूरे बिहार से पहुँचे थे। सभी शिक्षकों में यही जज्बा था पटना पहुंच कर बिहार सरकार की नींव हिला देना है और ये बताना है कि हम जिंदा हैं, मरे नहीं हैं। हम शोषण के विरोध में खड़े हैं, डरे नहीं हैं। उस दंभी सरकार ने अपनी ओछी सोच को फिर सामने लाया और शिक्षकों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन, आँसू गैस का प्रयोग करके आंदोलन को खत्म करने की कोशिश की। लेकिन बिहार सरकार कान खोल के सुन लो कथित सुशासन की सरकार अपने साथ हुए हर अन्याय का हिसाब हमें गिन-गिनकर लेंगे। जितना हमपे जुल्म ढाओगे उतनी मजबूती से खड़े होंगे।

कलम से भविष्य लिखने वालों शिक्षकों पर नीतीश - मोदी सरकार द्वारा आंसू गैस, लाठी और डंडे का प्रयोग करना कितना जायज ? लाठीचार्ज की घोर निंदा पूरे बिहार ही नहीं भारत स्तर पर हो रही है। आखिर इन शिक्षकों से इतनी डर क्यों गई है बिहार सरकार ? लाठी-डंडे और गोली चलाकर न्याय माँगने वालों की आवाज दबाना अंग्रेजियत की निशानी रही हैं और आज उसी अंग्रेजियत को दो कदम और आगे बढ़ाया बिहार सरकार ने। शिक्षकों से हुए बातों में वह कहते हैं कि बर्बरतापूर्वक व्यवहार के लिए हम बिहार सरकार की निंदा करते हैं। वहीं शिक्षक कहते हैं जब तक शिक्षक भूखा है, ज्ञान का सागर सूखा है।। पूर्व में भी आंदोलन होते रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में शिक्षकों की हालत इतनी खराब हो गई कि आज अहिंसात्मक आंदोलन को हिंसात्मक बना दिया गया। पूर्व में भी सरकारें रहीं हैं पर आंदोलन को कुचलने के लिए कभी ऐसा नहीं हुआ। बिहार में अच्छे दिन वाली सरकार के साथ गठबंधन को लेकर भी अच्छे दिन की सारी संभावनाएं समाप्त कर दी गई। केंद्रीय सरकार की लापरवाहियों ने भी अब NDA सरकार से शिक्षकों का भरोसा समाप्त कर दिया है।

18-Jul-2019 11:34

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