13-Jun-2019 12:29

अच्छे दिन के जुमलेबाजी में आज भी फँसी बिहार सरकार और पुलिस कप्तान बिहार

स्वतः स्वर में बिहार डीजीपी भागते फिरेंगे बिहार के अपराधी, लेकिन भागते दिख रहे डीजीपी बिहार।

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री के साथ डीजीपी बिहार के बैठक के बाद डीजीपी का ब्यान आया था कि बिहार में अब अपराधियों की खैैर नहीं हैं भागते फिरेंगे अपराधी। लेकिन पिछले अपने ब्यान के बाद बिहार के डीजीपी खुद भागते और पेपरों में छपते नजर आ रहे हैं। डीजीपी वर्तमान जो बिहार के हैं 2013 से देखता आ रहा हूँ कि बोलवचन से आगे कोई भूमिका में नहीं दिखाई देते हैं। वहीं जिस जिस क्षेत्रों के प्रभारी रहे हैं, उन्हीं क्षेत्रोंं में मासूम बच्चियों के लिए असुरक्षित क्षेत्र बना है। अपराध का ग्राफ वर्तमान डीजीपी के क्षेत्र का देखा जाएगा तो सबसे ज्यादा नजर आएगा। हत्याकांड पर खास नज़र डालें तो वर्तमान डीजीपी, बिहार के क्षेत्रों में जमीनी विवाद के कारण ही 80% मामले नज़र आयेंगे।

मुजफ्फरपुर में किये सर्वे में पता चला कि मुजफ्फरपुर की जितनी भी विवादित जमीन रही हैं उसे राजनीतिक सहयोग के साथ अपने या अपने लोगों के लिए हथियाने का काम इन्हीं के कार्यकाल में पूरा हुआ है। मुजफ्फरपुर की जमीन से जमीनी हकीकत जानने की ताकत आज बिहार सरकार के पास नहीं है। इसका बड़ा कारण है कि पुलिस विभाग की जिम्मेदारी बिहार में उनके कंधों पर है जिनके क्षेत्रों में हत्याकांड, बालात्कार जैसी घटनाओं का अंबार लगा रहा है। आज वर्तमान डीजीपी बिहार जबसे शराब बंदी का बिहार सरकार की घोषणा हुई तब से आज तक पेपरों की सुर्खियों के हिसाब से ही काम करते नज़र आ रहे हैं।

शायद बिहार भूल गया होगा कि दारू पीना अपराध सब के लिए हैं, लेकिन डीजीपी, बिहार आज तक एक भी कंपनी पर कार्यवाई नहीं किये, जिसके शराब बिहार में पकड़े गए। आज तक लगभग 1000 थानाध्यक्ष की नौकरी खत्म कर देने की जरूरत थी, परंतु सब के सब फल फूल रहे हैं। राज्य के अंदर जो भी शराब की गाडियाँँ पकड़ी गई वो सब बिहार के ही रहे होंगे। बिहार पुलिस वर्तमान डीजीपी के नेतृत्व में क्या कर सकती हैं, उसका अंदाजा अब बिहार की जनता को बखूबी मालूम है। अपराध की दुनिया के संरक्षक के रूप में उत्तर बिहार में जाने जाते हैं। वहीं डीजीपी का फेसबुक यूनिवर्सिटी पर रंगीला पाण्डेय नाम ही काफी है।

बिहार सरकार ने किस आधार पर एक ऐसे आदमी को बिहार की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी, जिसपर आम जनता को भरोसा नहीं है। एक ऐसा पदाधिकारी जिसके कार्यक्षेत्र में कई CBI जाँच सदियों से जारी है। बिहार सरकार को अपने हाथ में सुरक्षा की बागडोर रखते हुए, बिहार को गंभीर डीजीपी देने पर जल्दी विचार करने की आवश्यकता हैंं। बिहार आज या तब तक वर्तमान डीजीपी को नहीं भूलेगा, जब तक की 13 साल की मासूम नवरुणा के साथ घिनौना हरकत के साथ ही साथ उसकी हत्या कर उसके घर के सामने ही नाले में गाड़ दिया था। उस दौड़ान वर्तमान डीजीपी ही तिरहुत कमिश्नरी के सर्वेसर्वा थें। वहीं नवरुणा हत्याकांड में आज भी वर्तमान डीजीपी बिहार पर तलवार लटकी हैं। लेकिन संभावना यहाँ तक हैं कि भाजपा के सहयोग से सभी प्रकार के आरोप से इसी एक-दो साल की अवधि में हो जाएंगे और किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर सदनों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा लेंगे। लेकिन याद रखने की जरूरत यह है कि CBI जिस तरीकों से दो-तीन साल से जाँच कर रही हैं वह अब अंतिम चरण में भाजपा के सहयोग से सम्पन्न करेंगी। लेकिन ईश्वरीय न्यायालय के द्वारा जो न्याय आयेगा वह जरूरत ही श्री राम की मर्जी से नवरुणा को इंसाफ दिलायेगा।

13-Jun-2019 12:29

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