28-Apr-2018 01:02

कब तक होते रहेंगे मौत के सौदे

जिला प्रशासन और खासकर जिलाधिकारी मैं नहीं है मानवता। क्या बिहार सरकार भारत सरकार निवर्तमान जिलाधिकारी रचना पाटिल और पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पर कर्तव्य निर्वहन नहीं करने के आरोप में कानूनी प्रक्रिया के तहत मौतों के लिए सजा का प्रावधान कराएगी।

वह दिन सबको याद होगा जब लगभग 1 साल पहले सराय बाजार के पास एक बस और आँटो की टक्कर में 13 लोगों को कुचल दिये गये थे। ज्ञात हो कि सड़क सुरक्षा को लेकर के बड़ी-बड़ी आडंबर फैलाई जाती है। लेकिन सराय में हुए घटना जिसे बस और ऑटो की टक्कर में 13 लोगों की मौत हुई थी। कई लोग घायल थे, कितनी की जिंदगी आज भी उस घटना के बाद बदल चुकी है। फिर भी हम सीखने को तैयार नहीं है और जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक महोदयों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगता। दुखद है कि अब यह दोनों बचकर यहां से भाग रहे। जहां रचना पाटिल को सचिवालय में जगह मिली। तो वही पैसे वसूली करने और कराने में माहिर अवैध कारोबार को संरक्षण देने में माहिर पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार को फिर से एक जिले का कमाल मिला। वैशाली पुलिस अधीक्षक के रूप में राकेश कुमार द्वारा संरक्षण बालू माफिया, दारू माफिया, सड़क माफिया एवं अन्य प्रकार के किसी भी माध्यम से राकेश कुमार के बीच में आने वाले सभी लोगों पर विभिन्न विभिन्न प्रकार के मुकदमे दर्ज कराएगा। इसकी सही समीक्षा होनी चाहिए कि राकेश कुमार की योग्यता है कि वह जिले का संचालन कर सकें

वही सड़क दुर्घटनाओं में अनगिनत घटनाएं वैशाली के माथे पर कलंक हैं। लेकिन जिला प्रशासन की उदासीनता ने यह साबित तो कर ही दिया कि हम नहीं सुधरेंगे। करप्शन के चरम बिंदु पर पहुंचे जिला प्रशासन सिर्फ अपने बल पर वैशाली में चंदा खोरी करने के अलावा माफियाओं को संरक्षण दिया। जिसके माध्यम से पैसे की उगाही की गई है। जिसका सीधा प्रमाण यही है कि पिछले दो ढाई सालों में इन दोनों जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के रहते हुए वैशाली का विकास अंतिम पायदान पर रहा। इससे बड़ा प्रमाण क्या चाहिए ? पूरे वैशाली की जनता जानती है कि सड़क दुर्घटनाओं में ऐसा कोई भी दिन नहीं रहा जब हमें मौत की खबरें ना मिली। अमूमन एक मौत की खबर प्रतिदिन मिलती रही और इसी में कभी 10-5 मौत पता नहीं कितने कितने मौतें हुए।

कोई कैसे भूल सकता है कि 7 दिसंबर 2017 को जगत 13 साल के बच्चे पर रामअशीष चौक चौराहे पर ट्रक चढ़ गया। उस छोटे से बच्चे का एक पैर पूरी तरह से कुचल गया था। वह बच्चा अपने बलबूते पर खड़ा हुआ निकला और उसके परिवार के आने के बाद ही उसे अस्पताल नसीब हुआ। मानवता तो छोड़िए चंद कदमों की धूल स्थापित सदर थाना वही चंदा वसूली करते रामाशीष चौक पर पुलिस पदाधिकारी जो दिन भर 10 - 10 रूपये वसूली करते रहते हैं। अपने सामने छोटे से बच्चे को मदद तक नहीं कर पायें।

वही आज फिर से शव का खेल जिला प्रशासन की लापरवाही से हुआ। सवाल सब के दिमाग में आ रहा हूं कि यहां पर जिला प्रशासन की क्या भूमिका थी। लेकिन मैं यह सवाल पूछना चाहता हूं कि भारत नवनिर्माण ट्रस्ट के माध्यम से लिखित रूप में जिलाधिकारी महोदय वैशाली को सराय की घटना 5 दिन पहले समस्या के साथ समाधान की एक प्रति सौंपी गई थी। जिसके बाद पिछले लगभग साल भर में सैकड़ों सड़क दुर्घटनाएं हुई। सैकड़ों लोग मरे गये हैं और कई हजार लोग घायल हैं। मरने वाले मर जाते हैं लेकिन पीछे जो वह दर्द छोड़ जाते हैं। उस को सह पाना उसे सदैव अपनी आंखों में बसाए रखना। हर उस मां के लिए, एक पिता के लिए, एक पत्नी के लिए, एक बच्चे के लिए, एक भाई के लिए, एक बहन के लिए और सामाजिक दोस्त- रिश्तो के लिए बहुत मुश्किल हो जाता हैं। हम मानवता को भूलते जा रहे हैं और मानवीय मूल्यों का जो छय हो रहा है, वह बहुत ही दुखद् हैं। जिला प्रशासन का यह दायित्व बनता है कि वह हमें सुरक्षित सड़क दे। हमें सुरक्षित वातावरण दे । हमें जीने का अवसर दें । हम क्यों टैक्स भरते हैं ? क्यों हम अपने खून पसीने की कमाई सरकार को सुपुर्द करते हैं ? इसलिए कि एक नौकर सा आकर हमारा खून चूसे । अपने दायित्वों का निर्वहन ना करें और सारी बातों की जिम्मेवारी आम जनता पर थोप दे। जब मन करे गाड़ी की चेकिंग शुरू हो जाती है। क्या उसकी सही व्यवस्था की जाती है ? नहीं ? पैसे उगाही का एक अनमोल तरीका है। सड़कों पर मानवता को सुरक्षित रखना आज देश के लिए सबसे बड़ी संकट है । यह खतरा है जिससे समय रहते बदलने की जरूरत है।

28-Apr-2018 01:02

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