03-Apr-2018 05:31

क्या अब मातृत्व भी दमन का शिकार

2 अप्रैल वैशाली जिला बच्चों के हत्यारों के रूप में जाना जाएगा। वह माँ कहाँ रह गई, जो दुर्गा का रूप धारण करती। क्या मातृत्व पर भी राजनीति का पहरा है ?

नहीं हुई कोई कार्यवाई, नहीं पकड़े गये दंगाई, दुसरे दिन भी सोई रही वैशाली पुलिस। धन्य हैं वो आरक्षण का खेल, जो एक माँ से बच्चे को छिन कर भी शान से जी रहा हैं। धन्य है वह आरक्षण से आई ए एस जिलाधिकारी वैशाली जो माँ होकर भी एक माँ का दर्द नहीं समझ पाई। धन्य हैं वह आरक्षण के द्वारा तैयार किये गये पुलिस अधीक्षक वैशाली, जो एक माँ का गोद सुना होने से ना बचा पाये। धन्य हैं आरक्षण जो वैशाली प्रशासन को नृष्कृष्टता की हो ले जाकर रख दिया। धन्य हैं वो माँ जो अपने बच्चों को शिक्षा के मंदिर में जाकर अपने ही बच्चों के साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया। हम धन्य मानते हैं कि वैशाली में आरक्षण की माँग वह लोग कर रहे थे, जो आरक्षण का भरपूर आनंद ले रहे हैं और किसी और अपने ही समाज के लोगों को उसमें शामिल नहीं होने देना चाहते हैं। जिला प्रशासन वैशाली के वरिष्ठ और जिला के मालिक जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक में अगर जरा भी अपने प्राप्त आरक्षण की किमत चुकाने का मन है तो वो दंगाइयों, दललों और आतंकी गतिविधि करने वालों को गिरफ्तार करें और Non बेलेबल एक्ट के तहत हत्या, छेड़खानी, सरकारी संपत्ति को नुकसान, आम आदमी की संपत्ति की भरपाई के लिए कदम उठाये। आजीवन प्रतिबंध और कारावास के लिए बात कानून प्रक्रिया करें। अगर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक में हिम्मत नहीं है तो वो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा देने की कृपा करें। और माने की बिना अनुमति और मेरी लापरवाही के कारण बच्चे की हत्या हुई और जो भी नुकसान पहुंचा है वो मैं अपनी संपत्ति बेच कर और बिहार सरकार और अपने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अपमान के लिए मैं अपना जीवन कृषि में योगदान दूँगा और उस माँ का पालन पोषण करने की जिम्मेदारी उठाता/ उठाती हूँ ?

03-Apr-2018 05:31

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