06-Feb-2019 05:41

क्या हत्या और लूटकांडों में सहयोगी की भूमिका में है वैशाली पुलिस

पिछले एक सालों में लगभग 10 करोड़ की लूट हो चुकी हैं स्वर्णंकारों से और वैशाली पुलिस चैन की नींद में सो रही हैं

पुलिस की परिभाषा जिसने भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से किया होगा, जरूर ही लूटेरा रहा होगा। सुरक्षा आम जनमानस को कभी नहीं चाहिए थी। सुरक्षा उन्हें चाहिए जो दूसरों को लूटकर खाने की परम्परा रखते थे। इसलिए तो लूटेरे आये और भारत की संस्कृति, परम्पराओं के साथ-साथ संस्कार तक को लूट ले गये। अपनी सुरक्षा से लेकर आम जनता के विचारों को दबाने एवं जानने की नियत से ही जासूस और सुरक्षा ना से सुरक्षा बल की स्थापना की। सुरक्षा किसकी हो यह तो लूटेरा, शासक ही तय करते हैं। जिसका सीधा संबंध आज के परिवेष में हमारे भारत में देखा जा सकता हैं। सुरक्षा के नाम पर प्रधानमंत्री से लेकर आम गली-मुहल्लों के नेताओं के पास भी एक सुरक्षा परहरी हैं। लेकिन क्या आजादी के 72 साल बाद भी हमें यानि आम भारतीयों की सुरक्षा के लिए सही कदम उठायें गये। सुरक्षा से कोसों दूर आज भी आम आदमी अपनी आजदी और जीवन से भी कोसों दूरी पर हैं। न्याय और की प्रक्रिया से आम आदमी को पुलिस के बल पर दूर रखा जाता हैं। आगे हम और भी बातों से स्पष्ट करेंगे की पुलिस की वर्तमान भूमिका क्या है हमारे समाज के सामने।

आज हम जो बातें करने जा रहे हैं वह वैशाली पुलिस एवं जिला प्रशासन पर जोड़दार तमाजा का काम करेगी। आज पुरा बिहार 2 फरवरी 2019 को शाम 8 बजे जो हाजीपुर में हुआ उससे वाकिफ हो चुका हैं। अनवरपुर चौक और यादव चौक के बीच स्थित सुरभि ज्वेलर्स में लगभग 2 करोड़ से भी ज्यादा की लूट ने हाजीपुर को भी दहलाकर रख दिया। एक गाड़ी से आकर 6 लोगों द्वारा दिनदहाड़े बीच बाजार में लूट-पाट कर बहुत आराम से चला जाता हैं। आज पाँचवाँ दिन हैं और लगभग 95-96 घंटों में वैशाली पुलिस एक घंटी का भी पता नहीं कर पाई। वैसे यह आशा रखना ही बेईमानी होगी कि वैशाली पुलिस कोई सफलता पायेगी। क्योंकि पिछले 10 सालों या उसे भी पहले के सारे रिकॉर्ड उठाकर देख लिया जाएगा तो आज तक किसी लूट के समानों की रिकवरी नहीं कर पाई हैं। अगर थोड़ी कही सफलता है तो वो इसलिए कि उसमें पुलिस विभाग या राजनेताओं के नुकसान की बातें थी। परंतु आम आदमी के हुए नुकसान का आलम यह हैं कि वह पुलिस द्वारा प्राथिमिकी दर्ज की एक कॉपी लेकर थाने से लेकर कोर्ट का चक्कर काटते काटते अपनी जीवन काट कर निकल चुके हैं।

पिछले तीन दिनों से हाजीपुर नगर स्थित सुरभि ज्वेलर्स में हुए 2 करोड़ रूपये के आभूषणों के लूट के विरोध में वैशाली जिला स्वर्णकार संघ लगातार आंदोलन किया। जिसके तहत आक्रोश मार्च निकाली गई। दूसरे दिन कैंडल मार्च के द्वारा आक्रोश व्यक्त किया गया तथा साथ ही वैशाली जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वैशाली जिला के व्यवसायियों की समस्याओं से अवगत कराया गया। वहीं तीसरे दिन भी धरना-प्रदर्शन करते रहे है स्वर्ण व्यापारी। वैशाली जिला स्वर्णकार संघ की एक टीम बिहार के पुलिस महानिदेषक से मिलकर अपराधियों की गिरफ्तारी एवं व्यवसायियों की सुरक्षा के हेतु माँग की। जिसमें वैशाली जिला स्वर्णकार संघ को अस्वाशन दिया गया कि बहुत ही जल्द इस घटना को उद्भेदन किया जायेंगा एवं जल्द ही अपराधियों को कड़ी-से-कड़ी सजा दिलाई जाएगी। भविष्य में ऐसी घटना ना हो इसकी समुचित व्यवस्था की जाएगी। विशेष जानकारी देते हुए वैशाली जिला स्वर्णकार संघ के नगर अध्यक्ष श्री श्याम प्रसाद सोनी ने कहा कि वैशाली जिला स्वर्णकार अपने स्वर्णकार परिवार के साथ तीन दिनों तक व्यवसाय को पूर्णरूपेण बंद कर आंदोलन का हिस्सा बने रहें। यह एक व्यापक तौर पर स्वर्ण व्यवसाईयों का एकता का अच्छा परिचय भी रहा है। वहीं राजू सोनी ने कहा कि भविष्य में भी हम लोग एकजुट होकर परिस्थिति का सामना करेंगे। ऐसी आषा करते हैं कि पुलिस अगले 72 घंटों में घटना के संबंध में सभी प्रकार के साक्ष्यों के साथ व्यवसाई वर्ग को न्याय दिलाने का काम करेंगे। अगर पुलिस ने लापरवाही बरती तो 72 घंटे के बाद स्वर्ण व्यवसायी इस आंदोलन को बिहार एवं भारत स्तर तक लेकर जायेंगी।

आज तक के वैशाली पुलिस के कार्यों की समीक्षा करे तो लगता है कि यह फिर एक दो दिनों बाद आम घटना में ही गिनती में आ जाऐगी। कहने को तो हाजीपुर पूर्णरूपेण सी सी टी वी कैमरों में कैद हैं पर धिक्कार है कि हम आज भी वैशाली पुलिस के भरोसे पर हैं। वरीय अधिकारीयों तक में कोई ऐसा नहीं दिखता है जो अपने क्षेत्र में हुए आज तक के 2-4 प्रतिशत घटनाओं का भी पैसा रिकवर कर पाई हो। अगर लूट हुई हैं, तो पैसा जाता कहाँ हैं यह सवाल फिर सामने खड़ा हैं। अपराधियों पर लगाम नहीं लगा पाने के कारण वैशाली आप अपराध का बड़ा केन्द्र बना हुआ हैं। अपराध का रिकार्ड यह है कि पैसे लूट कांड अलग-अलग घटनाओं में भी कुछ वर्षों में कई करोड़ो का मामला बन चुका हैं। वहीं हत्या की सूचि पिछले एक साल में सैंकड़ा पार कर चुकी हैं। लेकिन ऐसा कोई मामला है जो वैशाली पुलिस ने साक्ष्य होते हुए भी अपराधीयों को पकड़ा हो। फिर भी भारत एक आशावादी राष्ट्र है तो एक बार फिर उन्हीं पर भरोसा करना हमारे सभ्य होने की निशानी होगी।

06-Feb-2019 05:41

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