10-Sep-2018 10:27

गुंडागर्दी को बढ़ावा देते वैशाली पुलिस के थानाध्यक्ष

दुर्भाग्य की बात है कि जिस पुलिस के कंधोंं पर हम भरोसा करते हैं, वह हमारी सुरक्षा करेगा, वह पूर्णरुपेन आज निकम्मी हो चुकी है। वह पुलिस जिसे संविधान द्वारा आम आदमी की रक्षा, सुरक्षा एवं समाज में शांति व्याप्त करने के लिए स्थापित की गई थी। वह आज के समय में

हम सभी को ज्ञात है कि पिछले कुछ समय से लगातार वैशाली बंद, बिहार बंद और भारत बंद का सिलसिला निरंतर बढ़ता जा रहा है। बंद की प्रवृत्ति एक सहयोगात्मक हो सकता था, जिसे आक्रोशात्मक बनाकर समाज में एक दूसरे को लड़ाने का काम हो रहा है। इन सब जगह पर सबसे बड़ी भूमिका अगर किसी की है तो वह होती है पुलिस की। लेकिन हम आज बात कर रहे हैं वैशाली पुलिस की। क्योंकि हम वैशाली के हैं और वैशाली के बारे में सबसे पहले समझना है। ताकि हम आगे हमें पुलिस पर कितना भरोसा किया जाना चाहिए, इस की गहराइयों को समझेंगे। वैशाली पुलिस लगातार अपराध की जननी होती जा रही है। वैशाली पुलिस लगातार अपराधी बनाने के लिए कि काम करती है। वैशाली पुलिस आम जनता के हितों में काम बिल्कुल नहीं करती। जिसका प्रमाण इस दुनिया में शायद कोई नहीं दे सकता। लेकिन सत्य ही है कि वैशाली पुलिस एक दुकान खोलकर बड़े से सरकारी भवन में रोज पैसा वसूली का काम करती। खैर आज हम बात कर रहे हैं भारत बंदी को लेकर, जिसमें पूरे भारत की पुलिस निकम्मेपन की पूरी काबिलियत अपने सामने रख दी। वह कितने निकम्मे हैं, कितने कामचोर हैं, कितने भ्रष्ट हैं, कितने तरीकों से वह षड्यंत्र रच कर समाज को दूषित प्रदूषित करने का काम करते हैं। उन्होंने आज पूरे भारत को यह संदेश दिया है फिर भी हम वैशाली से ही बात करते हैं। तो पूरा भारत में समाहित होता है, जिस लोकतंत्र के नाम पर पूरे राजनेता वैशाली को बदनाम कर रहे हैं। वह वाकई में लोकतंत्र वैशाली का नहीं और जिस की कवायद आज पूरे भारत को देखने को मिल रही, बहुत बड़ी बात है। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस युग के सबसे बड़े झूठे और जुमलेबाज नेता है। दुर्भाग्य है इस देश की राजनीति को गुमराह कर प्रधानमंत्री बने, लेकिन भारत की परिपाटी को बदलने में पूर्णरूपेण नाकामयाब और जिसका नाकामयाबी ही प्रमाण है। कि वह अपने सहयोगियों से कहलवा चुके हैं, कि वह जुमलेबाज हैं। उनके पार्टी जिस के इशारों पर काम करते हैं जो उनके संरक्षक है उनके इशारों पर काम किया करते हैं उन सभी ने कई बार कहा है नरेंद्र मोदी के द्वारा चुनावी वादे सारे के सारे झूठे और जुमले थे। इसका प्रमाण फिर देने की जरूरत नहीं, क्योंकि वह प्रत्यक्ष है और लोग इसे महसूस कर रहे हैं। यह कौन सी परिपाटी बनती जा रही है 70 साल 70 साल कर सत्ता के गलियारों में पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। अब नरेंद्र मोदी की परिपाटी बनाई गई परिपाटी को अब विपक्षी दल आज उनके सामने लाई है। जिस पेट्रोल के बढ़ते कीमतों को लेकर, नरेन्द्र मोदी, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, अरुण जेटली जैसे लोगों ने मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्री को चुरी भेजने का काम कर रहे थे। उनको चुप्पा कहा जा रहा था, उन्हें देश के साथ धोखे की बात कही जाती थी। तो क्या आज नरेंद्र मोदी अपने वादों से लेकर आज भारत की वर्तमान आर्थिक नीति को संभाल पाने के लिए उनके पास कोई नियत और नीति है ? क्या नहीं है और कभी नहीं हो सकता है, या हर आम आदमी जानता है, जो महसूस करता है कि मैं भारत हूं और जो भारत है वह राजनेताओं की गुलामी नहीं कर सकती। वह आम जनता राजनेताओं की फरेब से कोसों दूर रहेगा।

चलिए अब हम मुख्य मुद्दे पर आते हैं जिससे पूरे भारत की पुलिस व्यवस्था को समझने में आपको मदद मिलेगी। आज पूरा का पूरा भारत बंद है, लेकिन किसने बंद किया और किस को यह अधिकार है कि भारत बंद की घोषणा कर सके? यह कौनसा संविधानिक धारा है जो इन राजनेताओं को लगातार यह अधिकार देता है कि आप हमारा शोषण करें। हमें समझने की जरूरत है आज हमारे बच्चे घर में बैठे हैं और लगातार कुछ हफ्तों से बंदियों की वजह से स्कूल बंद कर दी जाती। हम अपने कामकाज में नहीं जा पाते। राशन तक की बातें अब दूर हो जाती, ठेला रिक्शा चलाने वाले मजदूर 100 - 200 कमाकर अपने बच्चों का पेट पालते हैं। बमुश्किल से परिवार के साथ सुख के दो रोटी खा पाते ? क्या इन बंदियों से उनके घर में दो रोटी का निवाला नहीं छिन जाएगा। नहीं और बिल्कुल नहीं मिल पाए ? हम पुलिस की भूमिका पर बात कर रहे हैं ? कौन है यह पुलिस कभी समझ में नहीं आता ? कि पुलिस की भूमिका को कैसे समझाएं ? जहां तक पुलिस की भूमिका को अपने अनुभव से याद करता हूं , तो आज तक किसी अच्छी भूमिका के लिए मैंने खुद महसूस नहीं किया। पुलिस की कोई भूमिका हो हर चौक चौराहे पर 10- 20 ₹ के लिए खाकी वर्दी वाले खड़े होते हैं। चाहे वह बाइक से जाए, चार पहिया वाहन से जाएं, ट्रक से जाएं, बस से जाएं, आप ठेला-रिक्शा लेकर रहें या आप ऑटो से जाए। हर जगह पर आप देख सकते खाकी वर्दी 10-20 ₹ के लिए खड़ी रहती और नहीं देने पर आपको आगे नहीं बढ़ने देती। वह अपने आप को भारत इसी में समझते हैं ? वैशाली पुलिस जिसकी जिम्मेवारी शायद दुनिया के सभी पुलिस तंत्र से बहुत बड़ी भूमिका होती ? लेकिन शायद वैशाली पुलिस को वैशाली शब्द के मायने नहीं पता ? यह तो उसी तरीके अनपढ़ हैं जिनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर होती है ? यह खाकी वर्दी पहनने के बाद यह समझते हैं कि मुझे पैसा कमाना है ? खाकी को यह पुलिस अपने आप को सिर्फ एक पैसा कमाने का हथियार बना चुके ? भूखें-नंगे जैसे पुरे पुलिस विभाग का सही चित्रण अब शायद यह रह गया हैं।

आज वैशाली पुलिस खाकी वर्दी के नाम पर दुकान खोलकर पैसा वसूली करती। जैसे आप कोई प्राथमिकी दर्ज कराने जाए तो आपको 2-4 जीस्ता कागज, कलम एवं कर्बन की फरमाइश और साथ ही बड़ा बाबू के लिए 2-4 हजार उसके बाद मुंशी के लिए 500-1000 साथ ही थाना में बैठे सभी के लिए चाय और समोसे और अगर थानाध्यक्ष और मुंशी की कृपा हुई तो आपको कोल्ड्रिंग तक ले जाना पड़ेगा। वही पासपोर्ट वेरिफिकेशन में जाए तो कम से कम 2000 से लेकर के ₹10000 तक ठग लेते हैं । आप आचरण प्रमाण पत्र के लिए जाएं तो वैसे पदाधिकारी आपको आचरण सर्टिफिकेट देते हैं जिनका खुद का आचरण ठीक नहीं , वैसे पदाधिकारी वहां बैठकर के आचरण सर्टिफिकेट देने के लिए 500 से 5000 तक ले सकते हैं। ना जाने पुलिस को कितना अधिकार दिया गया, लेकिन आम आदमी के लिए इनकी अधिकार इन के मान सम्मान को पता नहीं क्या हो जाता। वह अपने आप को बहुत बड़ा तीस मार खान समझते हैं। चौक चौराहे से लेकर हेलमेट के नाम पर इंश्योरेंस के नाम पर जूते के नाम पर चप्पल के नाम पर हाफ पेंट के नाम पर फुल पैंट के नाम पर ना जाने पुलिस के पास कितने हथियार होते हैं पैसे वसूली के आप के साइलेंसर में जरूरत से ज्यादाा छेेेद है। तो आप की लाइट नहीं जल रही है आपके साइड लाइट खराब है तो आपके इंडिकेटर सही नहीं है तो आपके साइड मिरर नहीं है ओह क्या क्या कहा जाए और कौन है सुनने वाला है। पुलिस वालों का अब शिकायत करेंगे तो इन्हीं के हाथों में जांच आ जाती। आज भारत बंद को लेकर शहर ही नहीं गांव गांव तक लोग तबाह और परेशान है। वह शहर में आज गांधी चौक से लेकर रामअशीष चौक तक नहीं जा सकते। गांधी चौक राजेंद्र चौक, अनवरपुर स्टेशन, हाजीपुर रेलवे जोन के सामने दिग्घी गुमटी सभी जगह पर बैरियर लगाकर कुछ कुछ राजनीतिक लोगों के साथ बैठे हुए हैं। लेकिन किसी भी वैशाली पुलिस में हिम्मत नहीं है कि वह अपने क्षेत्र को साफ सुथरा रख सकते।

आज के भारत बंदी के संबंध में जब नगर थाना अध्यक्ष और सदर थाना अध्यक्ष से बात की गई। तो उन्होंने बताया कि यह मेरी जिम्मेवारी नहीं है, सड़क जाम है उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता । क्योंकि पूरा भारत आज बंद हैं । जब उनसे सवाल किया गया कि महोदय आप बताएं यह सारे क्षेत्र क्या आपके क्षेत्र में हैं ? तो कहाँ हाँ, पर कार्यवाही के नाम पर नहीं जानते भारत बंद हैं। जब मैंने पूछा उनसे कि क्या आप ने परमिशन दिया था ? आज्ञा दी थी कि आप उसको सड़कों को जाम कर सके, लोगों को तबाह कर सके,लोगों को परेशान कर सके। लोगों को गुमराह कर सके, लोगों को मारा मारपीट करने की अनुमति दी थी आपने ? तो उन्होंने कहा कि आपको जो समझना है समझे ? क्योंकि आज पूरा भारत बंद हैं ? दुर्भाग्य है कि आज भारत बंदी में आम आदमी के हितों के लिए उन दोनों थाना प्रभारियों के पास समय नहीं है ? लेकिन यह दोनों थाना प्रभारी अवैध वसूली करने के लिए स्थानों पर ट्रक लगा कर अपना निरंतर कमाई का जरिया खोलकर बैठे हैं। थानाध्यक्षों को फोन पर बात करने के लिए उनके पास ना तो तमीज है और ना बात करने का लहजा। नगर थाना प्रभारी एवं सदर थाना प्रभारी के ही बातों से आप पूरे वैशाली नहीं, बिहार नहीं, संपूर्ण भारत की परिकल्पना कर सकते हैं। यह कैसे नियम से थाना प्रभारी, जो सिर्फ अवैध वसूली के लिए सड़कों पर चलते आम आदमी को परेशान करने के लिए सड़कों पर खड़े होते हैं। गुंडों की तरह आज पुलिसवाला गुंडा शायद भारत में कोई ना हो। मैं पुलिस डिपार्टमेंट के लगभग 90% पुलिस अधिकारी पदाधिकारियों पर उंगली उठा रहा। जिनकी वजह से यह पूरा का पूरा सिस्टम खराब हो चुका है। लोग सवाल उठाते हैं, पत्रकारिता का धर्म सिर्फ सवाल पूछना और वह लोग उठाते हैं जिनके ऊपर प्रश्न आकर खड़े हो जाते। आज जो मैं लिख रहा हूं इसके बाद पुलिस अपनी गुंडागर्दी का आलम पेश करने का तरीका ढूंढेगी और खासकर सदर व नगर थाना प्रभारी को अपनी करनी और कथनी पर एक मत होना होगा। जब मैंने यह दोनों से पूछा कि क्या शाम तक आप दोनों अपनी जिम्मेवारी पूरी नहीं करने के लिए अपना त्याग पत्र देंगे। तो दोनों ने फोन काट दिया। बंदी के संबंध में जब नगर थानाध्यक्ष और सदर थानाध्यक्ष से बात की गई तो उन्होंने बताया था मेरी जिम्मेवारी नहीं। भारत बंद और भारत बंद के नाम पर जो खेल आज खेला जा रहा है वह पुलिस प्रशासन के निकम्मेपन का परिणाम और आने वाले समय में इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए।भारत की पुलिस प्रशासन अगर अपनी भूमिका नहीं निभाती, उन्हें इस्तीफा देना होगा और उन पर कानूनी कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी को पूरा नहीं करने के लिए उनके साथ कठोर से कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए था।

10-Sep-2018 10:27

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