13-Oct-2019 12:05

जहानाबाद की घटना के लिए भारत सरकार के राजनीतिक विचारधारा जिम्मेवार

लगातार देश में कहीं ना कहीं धार्मिक एवं जातिगत बातों को लेकर उग्ररूप में समाज खड़ा हो जाता है उसी का परिणाम है जहानाबाद की घटना

यह कोई नई बात नहीं है, जो जहानाबाद में हो रही है। मेरे द्वारा कही जाने वाली बातें बहुत कड़वी हो सकती हैं, लेकिन उतनी ही कर भी है। जितनी एक डॉक्टर की दवा और आपको ठीक होना है। तो दवा का सेवन करना पड़ेगा। आखिर क्यों कुछ समय बाद जब भी पर्व त्यौहार का समय आता है। तो हिंदू मुस्लिम जैसी घटनाएं क्यों आ जाती है। जब भी चुनाव का वक्त आता है। तो हिंदू मुस्लिम पुनः क्यों जीवित हो जाते हैं। इसके पीछे एक साधारण तो नहीं हो सकता समाज के अंदर जिस तरीके से राजनीति का प्रवेश हो रहा है या हो चुका है या कहें जिस तरीके से राजनीति ने अपना घर बना लिया है। उसे तोड़ने की जरूरत राजनेताओं को अपनी राजनीति से दिख रही है और सिर्फ वही दिखती और जिसके कारण वह अलग-अलग तरीकों से समाज को बांटने का प्रयास करते हैं और समाज को बांटने की क्रम में वह यह भूल जाते हैं। किस समाज से ही राष्ट्र निर्माण होता है। यह कभी नहीं हो सकता, किसी राष्ट्र द्वारा समाज का निर्माण किया गया। इसलिए व्यक्तिवादी राजनीति की जगह समाजवादी विचारधारा को हमें अपनाने की जरूरत है।

राजनीति को इतनी छूट नहीं मिलनी चाहिए, कि वह देश के संविधान से अपने आप को बड़ा मानने लगे। जिसका परिणाम हम सभी लगातार देख रहे हैं। किस संविधान राजनीतिक दलों के बीच में उनकी महत्व कानों को दवाने का कोई माध्यम नहीं है। राजनीतिक दल जैसे चाहते हैं, वह उसी तरीके से अपनी मंशा को पूरा कर लेते हैं। लेकिन संविधान अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए भारत की आम आदमी पर अपनी सारी नैतिक जिम्मेवारी थोप देती है। जिसका परिणाम स्वरूप या होता है। किस समाज में जिस तरीके से राजनीतिक महत्व कांचा बढ़ती है। वैसे वैसे ही कुछ चंद लोगों के द्वारा राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए जातिगत एवं धर्मवाद के नाम पर अराजकता उन्माद फैलाते हैं। यह कोई नई बात नहीं है, जो जहानाबाद में देखने को मिल रहा है। यह एक साधारण राजनीतिक परिपाटी का देन है। भारत के अंदर विभिन्न जाति समुदाय के लोग रहते हैं और इसे समझना पड़ेगा, कि हमें सभी के मान सम्मान की रक्षा स्वतंत्र रूप से करनी और यह सिर्फ जिम्मेवारी आम आदमी की नहीं बन जाती है। इसकी पूरी नैतिक जिम्मेवारी एवं संवैधानिक जिम्मेवारी राज्य एवं देश की सरकार की होती और आज वर्तमान स्थिति में यह है कि राज्य एवं देश की सरकार अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति को पूरा करने के लिए वह हर इच्छा शक्ति के बल पर अपनी बात जनता से मनवा ही लेती है और जिसका परिणाम जहानाबाद की घटना है।

जहानाबाद की घटना का एक दूसरा कारण यह भी है कि अब प्रशासनिक तंत्र अपने राजनैतिक लाभ को लेकर राजनीति से प्रेरित सुरक्षा की संरचना करती है। हर राज्यों की सरकारी अपने वोट बैंक के आधार पर एवं जातिगत आधार पर पुलिस को काम करने को लेकर गाइड करते हैं। प्रशासन का निष्पक्ष ना होना सबसे बड़ा कारण होता है। किसी भी क्षेत्र में अराजकता धर्मवाद जातिवाद की अराजकता फैलना हम सभी लोग यह जानते हैं कि आज की प्रशासनिक नीति प्रशासन की नीतियों के आधार पर नहीं चलती। वह राजनीति के नीतियों के आधार पर अपना लाभ और हानि देखकर ही काम करते हैं। आज प्रशासन या भूल चुकी है कि उनकी जिम्मेवारी संविधान के प्रति है, ना कि राजनीतिक दलों के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के प्रति राजनीतिक दलों के जो भी जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं। वह जनता द्वारा निर्वाचित होते हैं और जनता के प्रति उनकी उदासीनता एवं ठगी को रोकने के लिए एक प्रकार से प्रशासन की अहम भूमिका हो जाती है। लेकिन प्रशासन की राजनीतिक भूमिका में नजर आए तो कैसे संभव है कि समाज में अराजकता ना फैलेगी।

सबसे ज्यादा जो धर्मवाद के नाम पर जो दंगे होते हैं, वह सामान्य है। आजकल लाउडस्पीकर को लेकर ज्यादा हो रहे हैं। हर जाति हर धर्म के लोगों का अपना अपना पर्व और त्योहार है और सभी जाति धर्म के लोग अपने पर्व को अपने स्वाभिमान को ऊंचा रखने के लिए बड़े-बड़े लाउडस्पीकरओं का प्रयोग करते हैं। और यह लाउडस्पीकर इतनी ज्यादा वातावरण को प्रदूषित करती है कि जिस क्षेत्र में या लाउडस्पीकर बजते हैं। उस क्षेत्र में आम जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। यह बहुत आवश्यक है की अब पर्व त्योहारों में लाउडस्पीकर बजाना पूर्णरूपेण बंद करना चाहिए। इसकी किसी भी प्रतिशत का स्थान ना होना चाहिए। जिससे कि किसी को यह मौका मिले कि वह कम या ज्यादा आवाज में लाउडस्पीकर को बजा सकें। पूजा करना एक आस्था का विषय है और इसका कोई भी माध्यम लाउडस्पीकर के माध्यम से होकर ईश्वर तक नहीं पहुंचता है। इसलिए लाउडस्पीकर जैसी ध्वनि प्रदूषण के साथ आम आदमी का जीना हराम करने वाले उपकरणों को बंद करना चाहिए। वही पूजा-पाठ ही क्यों मंदिरों मस्जिदों पर बजने वाले ध्वनि प्रदूषित लाउडस्पीकर रोको भी तुरंत रोक देना चाहिए और यह फैसला करना बहुत आसान है कि सबके लिए वह लागू चाहे वह मंदिर हो या हो मस्जिद आपको मंदिर में आरती गाणी हो। पूजा करना हो या मस्जिदों में नमाज अदा करना, ईश्वर बहरे नहीं है ? इसलिए धर्म के ठेकेदारों को आम आदमी को बहरे करने का ठेका नहीं देना चाहिए।

13-Oct-2019 12:05

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