24-Jun-2019 06:39

डाँ. हर्षवर्धन और मंगल पांडेय को तत्काल फाँसी दे मोदीजी : माँ

माँ का दर्द वह कैसे समझे, जो माँ को राजनीति का मोहरा बना रखा है

एक ऐसी बिमारी जिसके कारणों का पता पाँच साल पहले लग गया और डाँ. हर्षवर्धन 2014 में मुजफ्फरपुर आकर आश्वस्त कर गये थें कि अस्पतालों की स्थिति बद दी जाऐगी और ऐसा भयावह स्थिति दुबारा देखने को इस बीमारियों के कारण नज़र नहीं आयेगी। तो ऐसा क्या हो गया कि पाँच साल में डाँ. हर्षवर्धन जो लगातार केंद्रीय मंत्री हैं, अपने वादे या मंत्री पद की गरीमा नहीं रख पाए। यह सवाल लगातार उठ रहे हैं लेकिन कोई जबाव देने को तैयार नहीं है। तो आखिर यह मान लिया जाए कि जुमलेबाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जुमलेबाज ही मंत्रीमंडल में हैं। यह मान लिया जाए कि फेंकू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रीमंडल में सारे फेंकू ही मंत्रीजी हैं। यह मान लिया जाए कि प्रचार प्रसार के लिए प्रचलित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रीमंडल में प्रचार प्रसार के लिए ही मंत्रीजी को बैठाया जाता हैं। यह मान लिया जाए कि चुनावों में झुठ बोलने के आदतों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के बाहर भारत को देखते ही नहीं है और उनके नेतृत्व वाली मंत्रीमंडल भी पार्टियों के तलबे चाटने में मसगुल रह जाती हैं।

सुना है और टीवी चैनलों के लाठीमार कार्यक्रमों में डाँ. हर्षवर्धन का बचाव खुब होता हैं। डाँ. हर्षवर्धन के डाँ. के रूप में किये गए कामों की चर्चा कर आज के उनके द्वारा की गई हत्याओं को चुक बता दिया जाता है। हमें याद रखना चाहिए कि डाँ. हर्षवर्धन जब राजनीति से दूर थे, तो सेवा भाव रहा होगा, जिसके कारण उपलब्धियों की लंबी सूची हैं। पर जैसे ही भारतीय जनता पार्टी में आये और नेतृत्व मिला एक ऐसे जुमलेबाज गुजरात के मुख्यमंत्री का, जो झुठ की दुनिया को ही यथार्थ समझता है तो कहाँ से डाँ. हर्षवर्धन अपनी जिम्मेदारियों को समझते। डाँ. हर्षवर्धन जो आज हैं, वह डाँ. हर्षवर्धन की काबिलियत की वज़ह से नहीं, उनके पैसे और जुमलेबाज टीम की जुमलेबाजी के कारण प्राप्त हैं। डाँ. हर्षवर्धन पाँच साल में अपने किये वादे नहीं पूरा कर पाये और फिर आकर एक और वहीं पाँच साल पहले का जुमला फेंक गये। डाँ. हर्षवर्धन की जुबान से निकला 2014 हो या 2019 हाल तो वहीं रहना है। रही उनलोगों की जो बिहार और खास कर मुजफ्फरपुर के वो लोग जो डाँ. हर्षवर्धन के साथ फोटो खिचवाने में मसगूल थे। वो वहीं लोग थे, जो भारतीय जनता पार्टी के लिए हर बार उध गरीबों का वोट खरीदने का काम करते हैं। वे वहीं मुजफ्फरपुर के राजनीतिक दल्ले थे थो शराब और पैसे के बल पर ताकत से गुमराह कर अच्छे दिन लाने का वादा करते गलियों और मुहल्ले जाते हैं। शर्म तो कम से कम उन मुजफ्फरपुर वाले दलालों को तो आना चाहिए था कि कल अपने बच्चों के लिए कहाँ जाओंगे। तुम्हारे बच्चे को भी यही हासिल होगा, जो उन गरीब परिवार को हासिल हुआ।

अब चलते हैं बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जी के पास, जो बहुत ही साधारण व्यक्ति माने जाते हैं। नाम सुना सुना सा लगता है कि कहीं सुना है, मंगल पांडेय। मंगल यानि सबों के लिए हितकारी, लेकिन यह मंगल अमंगल का घोतक निकल गया। सत्ता से जिन लोगों को बिहार की जनता ने धक्के मार कर बाहर निकल दिया था, उसे लालू प्रसाद यादव के कुकर्मों ने जीवित कर दिया। और अचानक " बंदर के हाथ में नारियल " वाली कहावत चरितार्थ हो गई और आनन फानन में ब्राह्मर्षी समाज को खुश करने के लिए राजनीतिक साजिश रचकर मंगल पांडेय को स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया। मंगल पांडेय ने पिछले लगभग तीन साल में 38 जिलों से धनोपार्जन का काम करने में व्यस्तता दिखाई। भाजपा को खुब मंगल पांडेय से सहयोग मिला और जिसका परिणाम ही है कि आज सैंकड़ों बच्चों के हत्यारे को अभी तक गद्दी देकर रखा है। बच्चों की मौत पर भारतीय जनता पार्टी के अलावा सब़ो के आँखोंं में आँसू आयें होंगे, जो दिल से रोया होगा, मगरमच्छ के नहीं।

अब आते हैं राजनीति लाभ की ओर जो आज एक भी समाचारपत्र, समाचार चैनलों पर डाँ. हर्षवर्धन और मंगल पांडेय के द्वारा साजिशतन हत्याकांड के लिए उन्हें गुनेहगार बना हो। जबकि बड़े बड़े समाचार चैनलों के ऐंकर दिल्ली से उठकर मुजफ्फरपुर आकर एक ही काम किया नीतीश कुमार कहाँ हैं। नीतीश कुमार की बड़ी चुनौती है और जिम्मेदारी भी की बिहार के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराये। इसलिए ही मंगल पांडेय को भारतीय जनता पार्टी के कहने पर स्वास्थ्य मंत्रीजी का पद दिया। लोकसभा में अपार सफलता को देखते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली भारतीय जनता पार्टी 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव पर फोकस कर काम कर रही हैं। नीतीश कुमार की छवि खराब कर भाजपा अपना एक चेहरा देने की तैयारी में है। लेकिन क्या राजनीतिक दलों की महत्वाकांक्षा में हम अपने बिहार के बच्चों की बलि देते रहेंगे। नीतिश कुमार जो वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री हैं, उन्हें ठोस निर्णय लेते हुए, मंगल पांडेय को तत्कालीन रुप से हत्यारा घोषित कर जेल में डाल देना चाहिए। कर्तव्यहीनता के लिए मंगल पांडेय को सदन से निष्कासित करते हुए, हत्या का मुकदमा चलाना चाहिए। नीतीश कुमार को याद रखना चाहिए कि मुख्यमंत्री आप हैं, आपको बदनाम कर दिया जाएगा, कानूनी प्रक्रिया और दाव बेहतर आप समझते हैं। भले ही गुजरात में हजारों लोगों के हत्यारे को आगे चलकर दोष मुक्त कर दिया गया, जिसके मुख्यमंत्री काल में जिंदा लोगों को जला दिया गया और आज देश के सर्वोच्च स्थान पर है। कितना धन - बल का प्रयोग हुआ होगा वह इससे लगाया जा सकता है कि आज लोकतंत्र अलग थलग पड़ गया। "लोक" अब अलग हो गयें और "तंत्र" के बल पर आम जीवन को चलाने का प्रयास लोकतांत्रिक भूमि से किया जा रहा है। बहुत जल्दी ही एक राष्ट्रवाद की हवा बहेगी और भारतवासी हत्याकांड, बालात्कार को भुलकर राष्ट्रवाद पर अपने आपको कुर्बान कर देगा।

24-Jun-2019 06:39

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