20-Dec-2018 11:33

पुलिस मुक्त वैशाली से ही अपराध मुक्त वैशाली

कर्त्तव्यविहीन पुलिस पदाधिकारियों ने वैशाली के दिलों में अपराधियों का डर बैठाने में हुई सफ़ल।

आज हो या पिछला लगभग दो वर्ष लगातार भेड़-बकरियों की भाँति मानवता की हत्या हो रही हैं। लेकिन वैशाली पुलिस की भूमिका कहीं ईमानदारी से नज़र नहीं आया है। वैशाली पुलिस और वैशाली पुलिस अधीक्षक का नेतृत्व इससे ही स्पष्ट है कि आम आदमी के मन में मौत का डर 100% बैठा दिया गया है। वैशाली पुलिस अधीक्षक से लेकर वैशाली पुलिस की पुरी टीम अपराधियों सहित वैशाली बनाने में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। डर ही सत्य है और सत्य ही मौत हैं और पुलिस डर का पोषक तत्व। आप अगर समाज में थोड़ा भी सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास कर रहे हैं तो आप अपने मौत के ज्यादा करीब हैं। आपकी सुरक्षा की गारंटी वैशाली में कोई नहीं दे सकता है। ख़ास कर वैशाली पुलिस जो खुद ही सुरक्षित नहीं है तो हमारी और आपकी रक्षा कैसे करेगा।

यह बातें करते समय बहुत दुःख हो रहा था लेकिन वैशाली पुलिस की कार्य शैली ने दो सालों में मदद की जगह मौत का खेल ही सामने दिखाया है। पुलिस काम आम आदमी को सुरक्षित रहने देना और सुरक्षित महसूस कराना होता हैं। लेकिन वैशाली पुलिस आम आदमी को वाहन चेकिंग, प्रदूषण चेकिंग, कागज चेकिंग के नाम पर डराती हैं। लेकिन कभी यह महसूस नहीं करा पाई कि आप वैशाली जिला में सुरक्षित हैं। वैशाली पुलिस अपराधियों को पोषित करने में ही सफ़लता प्राप्त कर पाई है घटनाओं से स्पष्ट है। पिछले कुछ सालों में यह स्पष्ट हो गया है कि आपको सुरक्षित रहना है तो खुद के बल पर रहें, वैशाली पुलिस सदैव तत्पर है अपराधियों के लिए। आज पिछले कुछ सालों का ही उठा ले तो कोई भी हत्याकांड की गुत्थियाँँ नहीं सुलझा पाई हैं।

आप वैशाली पुलिस की कार्य शैली देखे तो पायेंगे कि यह वहीं काम करते हैं जहाँ से पैसे बनाये जा सकें। ऐसा कोई भी काम नहीं करते हैं जिससे सरकार का या उनका समय और आर्थिक नुकसान हो जाए। चर्चा यहीं से शुरू करते हैं कि बिहार सरकार ने सबसे बड़ा उद्योग बिहार में पुलिस विभाग के लिए लगाया शराब बंदी। शराब बंदी जैसे ही शुरुआत हुई कि थानों में थानेदारों को छोड़िए, दारोगा, जमदार और चौकीदार तक की चाँदी हो गई। कई बार सामने आया है कि पुलिस कि निगरानी में ही शराब थानों से ही बेची जाती हैं। शराब के नशे में आज भी बिहार और वैशाली की आबादी हैं, जो पहले भी पी रहे थे। अब घर तक पुलिस के ही लोग पहुँचा रहे हैं। शराब वैशाली में आने का पहली रास्ता सोनपुर क्षेत्र जो हाजीपुर नगर थाना होकर ही संभव हैं। दूसरा गंगा ब्रिज थाना जो पटना से होकर आयेगा। तीसरा महनार थाना जो समस्तीपुर के रास्ते ही संभव हैं। राघोपुर पटना के माध्यम से ही संभव है। जंदाहा थाना भी समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर के माध्यम से संभव है। कटहारा थाना से मुजफ्फरपुर के माध्यम से ही संभव है। गरौल थाना से मुजफ्फरपुर के माध्यम से ही संभव है। पटेढ़ी बेलसर के माध्यम से तो मुजफ्फरपुर के माध्यम से ही है। वैशाली थाना में मुजफ्फरपुर के माध्यम से ही संभव हैं।

उपरोक्त यही सभी माध्यम से जिला में शराब आ सकती हैं। आगे यही कहना है कि वैशाली पुलिस के कार्य की जब मैं समीक्षा करने बैठता हूँ तो दलाली से उपर कुछ नहीं दिखता है। आप भारतीय हैं और सभ्य समाज से हैं तो जबर्दस्ती कानून के खिलाड़ियों का सम्मान करते रहिए। नहीं करने की परिस्थितियों में आपके उपर गलत मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। सरकार की उदासीनता ही है कि इन थानों के थानाध्यक्षों को जिम्मेदारी से मुक्ति देकर घर पर खेती के काम में व्यस्त करातें। शराब पीने वाला दोषी है तो व्यापार कराने एवं उसे बढ़ावा देने वाले उपरोक्त थानों के थानाध्यक्षों को भी 20-20 साल की सश्रम सजा हो। ताकि वैशाली की पवित्रता पर कलंक लगाने वालें थानाध्यक्षों की हिम्मत पुलिस की वर्दी से करने की हिम्मत नहीं हो सकें। पैसे कमाने की व्यस्तता के कारण ही गाजल-मूली की तरह आदमी को मारा और काटा जा रहा है और किसी पर आरोप लगाकर जेल भेजकर लोगों का ध्यान भटकाया जाता हैं। आज फिर से एक डर पैदा करने में वैशाली पुलिस कामयाबी पाई हैं। आप डरते रहिए और चुप रहिएगा तभी तो वैशाली पुलिस की खेती कामयाबी की बुलंदियों पर पहुँचेगी।

20-Dec-2018 11:33

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