08-Dec-2018 01:59

बाहुबली और कमिशनखोर सांसद अपने धमक के चक्कर में मधेपुरा लोकसभा को गर्त में मिलाया : आम आदमी

सदनों में बाहुबली सांसदों के प्रकोप से सदन की मर्यादा खंडित हो गई हैं और धरातल पर आम आदमी पीस रहा है।

राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के दूसरे चरण में दो दिन मधेपुरा जिले में रहा। यह वहींं मधेपुरा हैंं, जहाँँ के सांसद लगातार आवाज उठाते रहते हैं। पूरे भारत में संसद के द्वारा एक कर्मठ सांसद का उपाधि भी इसी वर्ष कुछ समय पहले दी गई थी। लेकिन, जब आज मधेपुरा के गांव-गांव घूमने का मौका मिला, तो यह महसूस हुआ कि यहां के सांसद जो लगातार जातिवाद धर्म बाद और एक जाति विशेष को लेकर हीरो बनने का प्रयास करते रहते हैं। उनको यह समझ नहीं है कि अपने घर का विकास कैसे करना है। जो आदमी अपने घर का विकास नहीं कर सकता, वह पूरे भारत में और बिहार के कुछ जिलों को टारगेट बनाकर जातिगत उन्माद फैलाते रहते हैं। आम आदमी त्रस्त है लेकिन उन्हें अपने जाति को लेकर के जितने उन्माद सांसद के अंदर दिखती है, उतनी इस क्षेत्र के विकास के संबंध में कहीं नहीं देखी। जो मैं महसूस कर रहा हूँँ।

आज वह कितना निंदनीय है कि ऐसे सांसदों को अगर किसी भी जगह पर कार्यक्रम में कोई बुलाता है या उनको सम्मान देता है। यह लोकतंत्र ही नहीं पूरे भारत के सभ्यता संस्कृति और संस्कार में एक और अद्वितीय गिरावट का संदेश होगा। सांसद जो लगातार सुर्खियों में बने रहने के लिए रोने का नाटक करता है। अलग-अलग तरीकों के नौटंकी कर जो सांसद अपने व्यक्तित्व को गिरा के रखा हुआ है, जिसमें सिर्फ एक जाति की बू आती रहती है। यहाँँ के सांसद जो लगातार जातिवाद धर्म और धर्म के विशेष को लेकर शिरोमणि बनने का प्रयास करते हैं। उनको यह समझ नहीं है अपने घर का विकास कैसे हो और उनकी जिम्मेदारी क्या है।

मधेपुरा के सफर में जब हम आम आदमी से संपर्क कर रहे थे, जो बातें समझ में नहीं आया वह इस प्रकार है। मधेपुरा के सांसद काल राजनैतिक रूप से गुंडागर्दी इतना बढ़ा है कि कोई भी अपना नाम लेने के लिए तैयार है और ना ही उसके विपक्ष में खड़ा होने की क्षमता तरीके से कोई प्रतिनिधि रख रहा है।

छोटे-मोटे कोई मुखिया, जिला परिषद, विधायक ऐसा कोई नहीं है जो पप्पू यादव सांसद के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत रखता हो। वहां के निवासियों ने बताया कि हमारा जिला बहुत ही बुरी स्थिति में है। यहां पर निवास करने वाले जातियों में प्रमुख रूप से राजपूत, भूमिहार, ब्राह्मण, यादव, कुर्मी, कुशवाहा साथ ही साथ अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या भी अच्छी खासी है। दुर्भाग्य है केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक अच्छे दिन और सुशासन की बातें करती। उसी के बीच में यहां के सांसद अपना फायदा उठाते हैं। क्योंकि संसद विपक्ष में है और सरकार पूर्णरूपेण विफल है। यहां के प्रशासनिक लापरवाही कितनी बड़ी है, यहां की सड़कों से गांव के रहन-सहन विद्यालयों की स्थिति से स्पष्ट समझ सकते हैं। बहुत दुख हुआ जब हम लोग के सामने में एक आदमी अस्पताल में गया और अस्पताल से उसके छोटे से सिर दर्द के लिए जिला अस्पताल द्वारा उसे पटना रेफर कर दिया। अस्पतालों की स्थिति बद से बदतर है लेकिन मधेपुरा के सांसद पटना और दिल्ली के अस्पतालों की स्थिति पर लड़ते नजर आते हैं। लेकिन अपने क्षेत्र में एक मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल बनाने में विफल है ।मधेपुरा के अंदर भारत सरकार की कोई भी योजना धरातल पर नजर नहीं है। पता करने पर पता चला यहां के प्रशासनिक अधिकारियों में मधेपुरा के सांसद का बड़ा खौफ है। मधेपुरा के शहर में आम आदमी संप्रदाय सांस भी राजनैतिक रुप गुंडागर्दी में ही सुनता है।

08-Dec-2018 01:59

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