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03-Jun-2018 01:01

राकेश कुमार के गलत नेतृत्व में फंसी युवाओं की जिंदगी, आगे बढ़ाने में लगे सुनील कुमार

पुलिस अधीक्षक का दायित्व निभाने में राकेश कुमार पूर्ण रूप से विफल रहे थे और वैशाली में युवाओं को अपराधी बनाने के लिए थानाध्यक्षों को खुब सहयोग किया। पैसे उगाही में संलिप्तता कितनी थी वह जाँच का विषय हैं, लेकिन थानाध्यक्षों ने खुब पुँजी बनाया और आम आदम

पूर्व के पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार के अत्यधिक कर्तव्य विहीन निष्ठा के कारण वैशाली में युवाओं को अपराधी बनाने में खुब भुमिका निभाई। अपराधियों को संरक्षण और आम आदमी को पुलिस के गिरफ्त में करने का काम किया। थानाध्यक्षों ने जहाँ आम आदमी को परेशान किया , तो पुलिस अधीक्षक को शिकायत दर्ज करने का प्रयास किया, तो पुलिस अधीक्षक ने आम आदमी का कभी नहीं सुना। जो लोग थानाध्यक्षों की शिकायत करने गये, वो आज एक दो प्राथमिकी की शिकार हो गये। थानाध्यक्षों पर कमान नहीं कर पाने के कारण आम आदमी पर खुब जोर किया। थानाध्यक्षों की मनमानी करने की आदत लागातार जारी रही हैं और आज मानवजीत सिंह ढिल्लो के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं।

हम कुछ घटनाओं की चर्चा करते हैं जो एक साधारण नवजवानों को अपराधी बनाने का प्रयास किया। लेकिन नवयुवकों को अपने जीवन में बेहतरीन काम करने के लिए अपने आप को पुलिस के साथ संघर्ष में लगाया। जिसका परिणाम यह है कि ओ लोग अपने आप को सही एवं सत्य के रास्ते पर रखते हुए काम कर रहे हैं। लेकिन थानाध्यक्षों ने ठान रखी है कि वो उन्हें अपराधी बनाकर रहेंगे और थानों में पैसों की गंगा बहायेंगें। अब बताते हैं कि क्या और कैसे आम आदमी या आम युवाओं को छोड़ सेनाओं के अधिकारीयों तक को अपराधी बनाया। वैशाली जिले के पातेपुर प्रखंड के बलिगांव थाना क्षेत्र के रहने वाले अरूण कुमार जो भारत के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। अपने जीवन में भारतीय सेना में अपने जीवन को पूर्ण समर्पित किया, लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद घर आते ही पुलिस रूपी अपराधी फैक्ट्री का शिकार हुए। पिछले वर्ष उनके छोटे भाई की हत्या कर दी गई और आज लगभग 10 महिनों से ज्यादा होने के बाद भी हत्यारा नहीं पकड़ा गया। थानाध्यक्षों में बलिगांव और पातेपुर के साथ साथ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और राकेश कुमार (पूर्व पुलिस अधीक्षक, वैशाली) के मिली भगत से एक भूतपूर्व सैनिक को षडयंत्र के तहत झूठे मुकदमें कर जेल भेज दिया। भाई के गुनेहगार को सजा दिलाने के लिए दर-दर भटकते रहे और राजनैतिक दलों की दलली में राकेश कुमार ने एक फौजी को अपने ही घर में असुरक्षित कर दिया। देश के लिए कई बार मौत से लड़ने वाले फौजी को अपने ही घर और जिले में सम्मान नहीं मिला। यह पूरी जानकारी देते हुए अरूण कुमार कहते है कि मेरा पूरा परिवार फौज में हैं। पिताजी, मैं खुद और मेरा छोटा भाई अपने ड्यूटी पर आज तक एकबार भी हमलोगों को किसी भी प्रकार का सजा नहीं हुआ। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद जो असम्मान वैशाली पुलिस के द्वारा मिला, बहुत दुखी करता है। जातिगत, पूँजीवादी और राजनैतिक दबावों में हमारे परिवार के साथ वैशाली पुलिस ने जो किया वह अविश्वसनीय रहा है। थानाध्यक्षों की शिकायत करने पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के व्यवहार बहुत ही अमानवीय रहा। मेरे भाई की हत्या कर हत्यारे खुलेयाम घुम रहे हैं और हमारे परिवार को ही गुनेहगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा गया। पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार से मिलने पर पुलिस कार्यालय में ही जाति सूचक गालियों के साथ सभी को बर्बाद करने की जिस तरीकों से बातें कि वह मर्यादाओं की सारी हदें पार कर दी। आज अरूण कुमार जो भूतपूर्व सैनिक हैं आज अपने कार्य के लिए जहाँ गर्व महसूस करते हैं तो अपने घर में आज तक पुलिस के कार्य को देखकर इंसानियत बनाये हुए हैं यह बड़ी बात हैं। जबकि राकेश कुमार के नेतृत्व में पूरे परिवार को अपराध की दुनिया में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ा।

वहीं बातें आगे करें तो हिंदू धर्म को एक पहचान बनाने और धर्म की रक्षा करते हुए मंदिर की सेवा में सेवारत ब्राह्मण को हाजीपुर के आदर्श नगर थानाध्यक्ष द्वारा अपराधी बनाने का खुब प्रयास किया गया। हम बातें कर रहे हैं मनोरंजन झा की जो आदर्श नगर थाना के सटे ही मंदिर के पुजारी के पुत्र हैं। मनोरंजन झा ने आदर्श नगर थाना से शरब की बिक्री का विरोध किया तो मंदिर में बने एक खुले झोपड़ी में शराब डलवाकर पुजारी के पुत्र को शराब करोबारी का नाम देकर गिरफ्तारी कर जेल भेजा। जबकि उसी थाना में पदस्थापित हवलदार ने कैमरे के सामने स्वीकार किया था कि थाना प्रभारी के जानकारी में ही थाने से शराब बेची जाती हैं। मनोरंजन बताते हैं कि नगर थाना प्रभारी की गुंडागर्दी तानाशाही का परिणाम है कि मेरे ऊपर केस दर्ज हुआ। ऐसा कोई मामला नहीं छोड़ा जिसमें नाम जोड़ा या जोड़ने का प्रयास नहीं किया गया। मनोरंजन बताते हैं कि नगर थाना कांड संख्या 152/18 मे नये खुलासे मे पता चला है कि पुराने जमीनी विवाद में पैसा न मिलने और व्यक्तिगत दुश्मनी साधने के लिए नगर थानाध्यक्ष सुनिल कुमार के द्वारा महाकालेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी मेरे पिता और परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। उसके बाद भी मेरा परिवार नहीं झुका, तो सुनिल कुमार ने हमारे ऊपर फर्जी बोले तो झूठा केस लगाया। जिसमें मंदिर के पुजारी मेरे पिताजी और दोनों हमारे भाईयों को अभियुक्त बनाया गया। जिसमें शराब खुद प्रभारी और उनके विश्वासी सहयोगी रामेश्वर उपाध्याय ने गलत तरीके से मालखाना में रखे शराब को ही जब्ती दिखाकर सुरेन्द्र झा के बङे पुत्र को जेल भेजा गया और घटनास्थल मेरे पिता के नये मकान से जब्ती सूची बनायी गई। लेकिन जब धावा दल के अधिकारी सिपाही से बात की गई तो उनलोगों ने शराब की बरामदगी थाना कैम्पस बताया गया। जिससे पूरा मामला दुध के तरह साफ हो गया कि सुनील कुमार व्यक्तिगत दुश्मनी निकाल रहे थे। FIR में दर्ज घटनास्थल और धावा दल के सिपाहीयों के ON RECORD बयान से स्पष्ट की मंदिर के पुजारी को गन्दी राजनीति का शिकार बना कर शहर में अपनी दबंगई रसूख और तानाशाही का वर्चस्व कायम किया गया। जिसमें कुछ सहकर्मी का भरपुर सहयोग लिया गया । ज्ञात हो कि सुरेन्द्र झा (पंडित जी) पिछले 40 चालीस वर्षो से मंदिर (बाबा महाकालेश्वर नाथ मंदिर) के पुजारी है और वहीं अपने परिवार सहित रहते है । जहाँ पर मंदिर की गौशाला की भी सेवा मेरे पुरे परिवार द्वारा पुरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ की जाती है। आज इतने समयों में कभी दाग नहीं लगा, लेकिन दारू के व्यापार में घाटें को लेकर थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने सारी मानवीय मूल्यों को ताक पर रख दिया। मनोरंजन आगे बताते हैं कि लेकिन थाना प्रभारी की मनसा बेहद ओछी और गन्दी है वे किसी भी तरह अपने व्यक्तिगत आतम संतुषटि के लिए बदले की कारवाई करके *उन्हे मंदिर से हटाना चाहते है, चाहे शहर जले या दंगा हो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि वे अपने पदोन्नति के घमंड में मानसिक संतुलन खो बैठे है।* उनका ये रवैया शहर के लिए बेहद खतरनाक है जिसके कारण पुर्व में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें इनके खुराफाती दिमाग की उपज है। जिसके भुक्तभोगी आज समूचा हाजीपुर शहर है । सुनील कुमार यहीं नहीं रूके हैं, उनके कार्यालय में हाजीपुर नगर व सदर क्षेत्रों में अनेकों युवाओं को अपराधी बनाया गया। कुछ अपराधी बने भी तो कुछ आज भी अपने आप को पुलिस के आतंक से बचने और एक सभ्य समाज का नागरिक बनने का प्रयास कर रहे हैं। आदर्श नगर थानाध्यक्ष सुनील कुमार द्वारा निरंतर झूठे मुकदमों में फँसाने और अन्य चोरी - डकैती, लूट-पाट आदि में भी नाम डालने की धमकी दी जाती रहती हैं।

वहीं एक और घटनाओं से आपको अवगत कराते हैं कि हिंदू-मुस्लिम लड़ाईयों को लेकर जहाँ भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही दंगा शब्दों का प्रयोग करने में गुरेज़ कभी नहीं किया, वहीं 2014 लोकसभा चुनाव के समय से अब तक लाखों हिंदू संगठन अस्तृत्व में आई। वैशाली में कई घटनाएँ पिछले चार सालों में दिखने को मिला, जब हिंदू लड़के मुस्लिम लड़कियों से प्यार कर शादी की तरफ कदम बढ़ाये और लड़के की हत्या कर दी गई। पुलिस अधीक्षक के रूप में सुरेश चौधरी से लेकर राकेश कुमार तक ने अपने संवैधानिक अधिकार का सही दायित्व नहीं निभाया। वहीं उलट हिंदू लड़कियों का मुस्लिम लड़को से शादी पर वैशाली पुलिस पीठ थपथपाती कई बार नजर आई। वहीं आज जो खुलाशा कर रहे हैं वह सुन कर आप दंग रह जाएगें कि एक लड़का जो हिंदू है और अपनी मुस्लिम पत्नी को सम्मान के साथ रखा था। लेकिन मुस्लिम परिवार ने चुपके से लड़की की शादी कर दी और लड़की शादी के बाद भी अपने नौकरी के दौड़ान अपने हिंदू पति के साथ कई महिनों रही और दोनों के बीच पति-पत्नी के कई बार संबंध बने। लेकिन लड़की ने फिर से अपने घर वालों के साथ मिलकर लड़के पर सात सालों से परेशान करने का आरोप लगाकर, लड़के सहित एक बहुत ही इंसान व्यक्ति जो लड़के के पिता पर भी आरोप लगाय, जिन्हें इस प्यार और शादी के बारे में भनक तक नहीं थी। यह सारी बाते बताते हुए अंजन कुमार बताते है कि कोर्ट में बेल के लिए जब आवेदन दिया तो वकील साहब के जगह खुद ही बहस कर बेल पहली बार में ही लिया। लगभग दो महिने से आदर्श नगर थाना का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन मेरा केस दर्ज नहीं किया जा रहा है। वहीं लड़की के घर वालों द्वारा किये गये प्राथमिकी पर खुद बेल लिया और अपनी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तरस रहे हैं। लड़की के प्राथमिकी पर काम कर रहे आई. ओ. सब मेरे पक्ष में पाकर दो लाख रूपये डायरी लिखने के लिए माँग कर रहे हैं। नहीं तो जीवन को बर्बाद होने से कोई बचा नहीं पाएगा यह धमकी देते रहते हैं। वहीं अपने प्राथमिकी दर्ज थानाध्यक्ष द्वारा टहलाते रहने के कारण 20 दिन पहले लगभग डाक विभाग द्वारा रजिस्ट्री किया। लेकिन अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कि गई। जबकि रजिस्ट्री में आदर्श नगर थानाध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक वैशाली, पुलिस महानिदेशक तक को प्रतिलिपि भेजी गई हैं। लेकिन वैशाली पुलिस की कार्यशैली देकर इंसाफ पर से भरोसा उठने लगा हैं। वैशाली पुलिस की लंबी फेरिहत है जो स्पष्ट कर रही है कि अपराधी बनाने की फैक्ट्री के रूप में काम कर रही हैं।

03-Jun-2018 01:01

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