28-May-2018 12:56

राकेश कुमार के पापों से कब मुक्ति पायेंगे मानवजीत सिंह ढिल्लो

पूर्व पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार ने थानों के साथ मिलकर अपराध को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई। जिसका उदाहरण हैं पिछले कुछ महिनों में खुलेयाम हत्याकांड। निष्क्रिय पुलिसिया व्यवस्था के लिए खुब मेहनत किये राकेश कुमार। खामियाजा यहीं है कि मधुरेन्द्र कुमार थ

सर्व विदित है कि राकेश कुमार के आने के बाद वैशाली में अपराध और आपराधियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई। सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर यह कहना कि वैशाली पुलिस को निष्क्रिय बनाने में अवल रहे है राकेश कुमार। हत्याकांड के नये नये रिकॉर्ड बनाने वाले राकेश कुमार ने कैसे वैशाली पुलिस को पोषित किया वह हम बताते हैं। राकेश कुमार के विदाई समारोह को वैवाहिक स्वरूप दिया गया। सरकारी गाड़ियों को सजाकर राकेश कुमार की शादी कराई गई। जिसमें दहेज़ रूप में या रिश्वत पदोन्नति के लिए औधोगिक थानाध्यक्ष द्वारा खर्च कर दिया गया। इसी तरह से प्रत्येक थानों पर कुछ इसी तरह का वसूली चलता रहा है। अपराध समाज का हिस्सा है इसलिए पैसे उगाही के हर माध्यम को मजबूत करने में ही व्यस्त रहे थे राकेश कुमार। हत्या कोई अपराध नहीं होता हैं जबतक आप थानों पर पैसे का बैंग पहुँचाते रहें। अगर सरकार की स्वीकृति होती तो पुलिस अधीक्षक से लेकर प्रत्येक थानों में सी सी टी वी कैमरा लगया जाता तो आज पिछले दो- तीन साल में एक सुंदर फिल्म बनकर तैयार हो जाता। पुलिस कितना बिकता है और कैसे बिकता है वह फिल्मों ने लोगों को अच्छे से बता दिया है। वहीं कहानियों से प्रेरणा लेकर ही शायद वैशाली पुलिस अधीक्षक ने नेतृत्व किया। ना अपराध रोक पाये और ना ही हत्यायें। आम आदमी को अपराधी बनाने में राकेश कुमार की भूमिका सवालिया निशान पैदा करती हैं। दर्जनों मामले सामने आये, जिसमें गुनेहगार को दोषी ना बना कर आम आदमी को बनाया गया। युवाओं पर सबसे ज्यादा जूर्म करने में राकेश कुमार का नाम हमेंशा लिया जाएगा। राकेश कुमार पुलिस अधीक्षक कम अपराधी बनाने की मशीन बने बैठे थे। राजनेताओं की खुब बढ़ चढ़कर चाटुकारिता करते देखा जा सकता था। जिनके आँख और कान खूले थे वह बेहतर समझ रहे थे। कई थानाध्यक्षों को अपने ट्रांसफर से पहले ही सीवान जिला भेजा गया। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि शाम होते होते राकेश कुमार के मनसूबे फेल हो गए और उन्हें सहरसा जिला भेजा गया। आम नवयुवकों से लेकर बाँर्डर पर एक पैर पर खड़े देश के जवानों तक को राकेश कुमार ने मदद नहीं की। कई फौजियों और सेवानिवृत्त सैनिकों को अपराधी बनाने का प्रयास किया। सैनिकों को धमकी देने से लेकर जेल भेजने का भी काम किया। जिसके परिवारों में हत्याय हुई और आरोपियों की गिरफ्तारी के जगह जनसाधारण को जेल भेजा गया। क्योंकि पुलिस अधीक्षक के पास इंसाफ की उम्मीद लेकर गये और पैसे देने से इंकार किया। अपराध की लंबी फेरिहत बनाकर गये राकेश कुमार और उनके द्वारा बनाया गया थानाध्यक्ष आज उसी परिवेश में हैं। आम आदमी को मदद नहीं करना और पैसे उगाही में व्यस्तता आज भी निरंतर जारी है। आप आम आदमी हैं तो आपकी कोई नहीं सुनेगा।

वहीं कुछ ही समय पहले आये वैशाली के वर्तमान पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लो को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पर रहा हैं। मानवजीत सिंह ढिल्लो एक सुलझे व्यक्ति लग रहे हैं और पुलिस पदाधिकारियों को समझने में समय लगा रहे हैं। मुश्किलों से कैसे निकलना हैं यह रास्ता बनाने का मानचित्र खिंचा जा रहा हैं। लेकिन इतना आसान नहीं होगा कि वह इस भंवर से बाहर निकलें। अपराध का ग्राफ बढ़ने का नतिजा ही हैं कि आज भी अपराधी बड़े आराम से किसी को भी मारकर चले जाते हैं। वह कोई नहीं भूला होगा कि एक शिक्षक को विद्यालय में घुस कर और दौड़ा दौड़ा कर मारा। लोग कैसे भूल जाएगें कि राकेश कुमार के नेतृत्व में हाजीपुर की पुलिस कितनी बार मार खाई हैं। जिसमें वरिय अधिकारी भी कई बार शामिल रहे हैं। बालू तस्करी, मानव तस्करी, देह व्यापार, शराब की होम डिलीवरी कराने में राकेश कुमार ने शक्रिय भूमिका निभाई तो आज भी थानों में भी दारूओं का व्यापार संरक्षण की जिम्मेदारी है। एक साधारण आदमी जाकर प्राथमिकी दर्ज नहीं करा सकता। कागज - कलम तक घर से लाने को कहा जाता हैं। मानवजीत सिंह ढिल्लो वर्तमान पुलिस अधीक्षक हैं और उनके आते ही कई बड़ी घटनाओं ने उन्हें समझने का मौका ही नहीं दिया। पुलिस अधीक्षक को उनके ही पुलिस पदाधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। सबसे बड़ी मुश्किल तो तब खड़ी हो गई जब हाजीपुर के युवा व्यवसायी सुशील कुमार सिंह की हत्या कर दी गई। सुशील कुमार सिंह करणी सेना के जिलाध्यक्ष थे और हाजीपुर की राजनीति में एक अपनी खास अलग पहचान बना रहे थे। राजनैतिक कद बढ़ने से बड़ी बाधाएँ खड़ी हो जाती हैं। जो सामने भी आया, कि कितने आराम से औधोगिक थाना से महज 100 मीटर से कम दूरी पर 8-10 गोली मारकर अपराधी आराम से निकल गया। औधोगिक थाना प्रभारी ने पहले ही अपनी मंसा जाहिर कर दिया था जब उन्हें प्रोमोशन की अनुशंसा राकेश कुमार द्वारा विधिवत नहीं किया गया। पासवान चौक पर हुये सुशील कुमार की हत्या कोई साधारण घटना नहीं थी। जिसका विरोध करने की घोषणा दो दिन पहले ही कह दी गई थी। पुलिस इस भरोसे पर थी कि मामला बहुत भयावह हो जाएगी। लेकिन आंदोलन का स्वरुप इतना शांतिपूर्ण रहा कि थानाध्यक्षों की नींद उड़ने लगी। आंदोलन के मायने बदल रहे थे और पुलिस को कोई मौका नहीं मिल रहा था पैसा उगाही करने का। इसलिए पासवान चौक पर औधोगिक थानाध्यक्ष मधुरेन्द्र कुमार द्वारा जातिय रंग दिया गया और बाहर से गुण्डें बुलाकर दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया।

बहुत महत्वपूर्ण सूचना जो विशेष सूत्रों से प्राप्त हुआ कि थानाध्यक्ष औधोगिक के मधुरेन्द्र कुमार राकेश कुमार के विवाह समारोह से पहले ही दुखी थे ही और शांतिपूर्ण बंदी ने बौखलाहट में वह करने पर मजबूर कर दिया, जिससे कई लोगों की जिंदगी पुलिसिया चुंगुल में फंस गया। सर्व विदित है कि 25 मई यानि शुक्रवार को हाजीपुर बंद का आहृवान किया गया था। जिसमें प्रमुख रूप से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष ई. रविन्द्र कुमार सिंह, करनी सेना, हिंदू पुत्र संगठन, बजरंग दल के साथ छोटी छोटी कुछ अन्य संगठनों राजनीतिक दलों ने भी सहयोग समाजिक स्तरों पर किया। जिसके बाद सुबह से शांति पूर्ण बंदी को पहले ही प्लान कर चुके औधोगिक थानाध्यक्ष मधुरेन्द्र कुमार ने बाहर से गुण्डें बुलवाकर आंदोलनकारीयों पर पत्थर और लाठी से मार पीट शुरु कर दिया। जिसमें कईयों को लाठी से चोटें आई और मुख्य रूप से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के मुख्य महासचिव विकाल सिंह को गुण्डों के माध्यम से पीटा गया। जिससे पूर्णतः विशाल सिंह को बहुत ही बड़ी स्थिति में देखा गया। पुरा सर मार मार कर गुण्डों और मधुरेन्द्र कुमार के मिली भगत से फार दिया। फोटों में स्पष्ट भी देखा जा सकता हैं। अहान न्यूज़ की टीम वहाँ पहले से मौजूद थी जिसके बाद वहीं अहान न्यूज़ के चैनल हेड को खुद थानाध्यक्ष औधोगिक मधुरेन्द्र कुमार ने दो बड़ी गलत सूचना देकर थानें से हटाया। जिसमें पहली की मड़ई चौक पर भीड़ ने गर्म तेल की कड़ाही पलट दी जिससे कई लोग घायल हो गये। और दुसरा कि एक ऐम्बुलेंस सुभाष चौक के पास फंसा हैं और कोई मर गया या बहुत बुरी स्थिति में है। जिसके बाद सभी टीम दोनों जगह पहुँची तो किसी भी घटना की पुष्टि किसी ने नहीं की। जब चैनल हेड ने फोन पर बातें की कि यह सारी सूचना गलत हैं तो उन्होंने कहा कि मेरे आँखों के सामने हुआ था। जब वो गलत होने लगे तो बगतें बदल दिया और कहा किसी ने सूचना दी थी, जब सूचना कर्ता टा नाम और संपर्क नंबर माँगा तो बातों को और घुमाते हुए कहा कि थाना पर आई भीड़ ने कहा। जबकि थानें पर हमारी टीम मधुरेन्द्र कुमार के साथ पिछले तीन घंटों से थी। जब कहा गया कि आप हर बात पर ब्यान बदल रहे हैं और सारी बातें रिकार्ड में है तो वह टालते हुए फोन काट दिया। वहीं हिंदू पुत्र संगठन के संरक्षक राजीव ब्राह्मषि ने शांतिपूर्ण बद में सहयोग कर पुलिस को मदद भी पहुँचाई थी, लेकिन पुलिस के कार्यक्रम को देखकर राजीव ब्राह्मषि ने मधुरेन्द्र कुमार से फेसबुक लाईव कर थानाध्यक्ष से खुब बहस किया। राजीव ब्राह्मषि से हुई टेलीफोन पर बातों पहला ही बताया गया था कि मधुरेन्द्र कुमार ने गलत तरीकों का प्लान किया। राजीव ब्राह्मषि ने आगे बताया कि मधुरेन्द्र कुमार ने बाहर से गुण्डें बुलाकर लोगों को अस्त व्यस्त किया।

आगे बढ़ते हुए बता दे कि बंदी के नाम पर गिरफ्तारी करना एक लक्ष्य था। अगर गिरफ्तारी नहीं कि जाती तो पुलिसिया कार्यप्रणाली पर संदेह होता। वहीं थानों में ही ईं. रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि सीधे तौर पर मधुरेन्द्र कुमार ने प्लान करके ही झड़प कराया। ई. रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि औद्योगिक थानाध्यक्ष मधुरेन्द्र कुमार ने हाजीपुर के सहदेव राय की मदद से गुण्डें बुलाये और हम सबों पर हमला कराया। शुक्रवार को हाजीपुर बंद के दौरान पुलिसिया भूमिका काफी दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय रही। खून से लथपथ एक नौजवान को ठीक से उपचार किए बिना जेल भेज दिया गया। नगर के बुद्धिजीवी शांत है क्योंकि वह बालक शायद विशेष जाति अथवा विशेष धर्म के नहीं था। जिस पर बुद्धिजीवी अपनी ज्ञान बांटते रहते हैं और समाज में धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के मुखौटे लगाए होते हैं। अहान न्यूज़ की टीम ने जब थानें में विशाल सिंह के सर पर लगे चोट पर सवाल उठाया तब आनन फानन में पुलिस की गाड़ी से सदर अस्पताल कह कर बिदुपुर थाना ले जाकर रख दिया और इलाज की जरूरत महसूस नहीं की। जिसका नतीजा यह हुआ कि विशाल सिंह की स्थिति बहुत खराब हो गई। आगे ईं. रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि औधोगिक थानाध्यक्ष मधुरेन्द्र कुमार के काम करने के तरीकों ने यह साबित किया कि जातिगत उन्माद फैलाकर माहौल बिगाड़ा जा सकता हैं। ईं. रविन्द्र कुमार सिंह के साथ लगभग दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें जेल भेजा गया है। ईं. रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि जेल से आने के बाद यह आंदोलन जारी रहेगा और इससे भी बड़े स्तर की होगी। सुशील की हत्याकांड बहुत बड़ी षड्यंत्र का परिणाम है। सुशील मेरे छोटे भाई सा था और उसके समाजिक कार्यों में रूचि देखकर मैं बहुत प्रभावित रहा हूँ। इसके लिए एक बड़ा आंदोलन और जिलावासियों को सुरक्षित महौल देने के लिए कार्य प्रणाली का निर्माण वैशाली के लोग बैठकर लेगें। ताकि बाहर से आये पुलिस पदाधिकारी हमारा श्वशन ना कर सके और पुलिस अधीक्षक पद पर बैंठे लोगों को गुमराह ना कर समाज में उनका योगदान पहुँचायें।

28-May-2018 12:56

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