04-Sep-2018 11:55

राष्ट्र निर्माण के लिए साथ आगे आये सभी क्षत्रिय संगठन

भारत के इतिहास का एक शानदार पृष्ठभूमि रहा हैं , जब-जब देश पर खतरा हुआ, क्षत्रिय समाज सबसे आगे रहा है। यह कहते हुए ई. रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया भारत आज आर्थिक, समाजिक, मानसिक तनाव के दौड़ सै गुजर रहा हैं।

हाजीपुर के जिला अतिथि गृह में मंगलवार दिनांक 4 सितंबर को बिहार क्षत्रिय एकता समिति द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सूचना दी गई, कि बिहार के 21 क्षत्रिय संगठनों का गठजोड़ ही बिहार क्षत्रिय एकता समिति है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस से बात करते हुए, संयुक्त संबोधन में कमेटी के संयुक्त सदस्य राणा सिंह और इंजीनियर रविंद्र सिंह ने सामूहिक रुप से देशभर में चल रहे SC ST और आरक्षण एक्ट पर पूरे भारतवर्ष में खासकर राजपूतों सहित सामान्य वर्ग का राष्ट्रव्यापी विरोध का एक जनआंदोलन का स्वरूप ले रहा है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संपूर्ण देश में लगातार बढ़ती फर्जी मुकदमों की संख्या को देखते हुए SC ST कानून में आंशिक बदलाव किया था। जिसमें शोषित वर्ग की सुरक्षा कायम रखते हुए, किसी भी वर्ग के साथ अन्याय ना हो इसको सुनिश्चित किया था। ज्ञात हो कि भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने एससी एसटी एक्ट में एक छोटा सा बदलाव किया था। जिसमें डीएसपी रैंक के पदाधिकारी द्वारा एक जांच होकर प्राथमिकी दर्ज की मामूली सुधार किया था। ताकि इस एक्ट का दुरुपयोग जो अभी तक भारत में होता आ रहा है, उससे आम जीवन पर अब असर न पड़े। लेकिन राजनेताओं के वोट बैंक की राजनीति ने भारत की जनता के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया। राजनीतिक पार्टियों ने एक ऐसा खेल खेला, जिससे भारत के सभी सामान्य आदमी अपने जीवन की नैया पार करने में असक्षम साबित हो गए। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने देश में लंबित लाखों केस को देखते हुए यह निर्णय लिया था,इन सभी बातों पर ध्यान देते हुए, जिससे न्यायालयों में केस की संख्या का दबाव बढ़ता जा रहा है।इसमें कमी आ सके, सत्य को सत्य समझकर और न्याय पूर्ण बनाने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा इस तरीके का कदम उठाया गया था। लेकिन भारत के संसद में बैठे सांसदों को यह रास नहीं आई और झूठी लोकप्रियता और उच्च न्यायालय की अवमानना करते हुए, भारत के संविधान में संशोधन कर दिया। जिसका प्रतिफल यह रहा कि फिर से भारत के न्यायालयों में न्याय की आशा रखें, भारत की आम जनता अब निराश हो गई। इस कानून से समाज में एक बहुत बड़ी आबादी में असंतोष की भावना आ गई है। जिससे समाज में व्याप्त सामाजिक भाईचारा विखंडित करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सामाजिक रुप से अलग-अलग समाजों में दूरियां बढ़ती जा रही है। जिससे हम धरातल पर यह स्पष्ट तरीकों से देख एवं महसूस करते हैं , इस कानून के तहत अभी तक लगभग 95% से ज्यादा मुकदमें फर्जी तरीके से कराई गई है। द्वेषपूर्ण तरीके से कराई गई है केसोंं को यह दुर्भाग्य ही है सुप्रीम कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने एवं न्याय को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाया है। उस कदम को भारत के संविधान द्वारा एक सिरे से खारिज कर दिया गया। यह स्पष्ट है कि भारत के सदन में किसी भी प्रकार का निष्पादन नहीं किया गया। मिलजुल कर बैठ कर सामाजिक स्तर पर निपटाने का प्रयास होना चाहिए था। लेकिन इस कानून के लागू होने से विभिन्न समाज के लोगों के साथ राजनीतिक और सामाजिक राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने हेतु पूर्ण तरीके से लगातार फर्जी प्राथमिकी होती रही है। जिससे समाज के लोगों को मानसिक शारीरिक और आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ती रही है। जो बाद में बहुत बड़ा कारण बना और ऐसे भी माननीय प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार कहा जाता है " सबका साथ सबका विकास"। लेकिन यह कैसा नारा है जो सिर्फ कागजों और भाषणों में दिखाई दे रहा है। जबकि माननीय प्रधानमंत्री के द्वारा राजनीति से प्रेरित होकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए, समाज में भाईचारा को तोड़ने वाले काले कानून को संवैधानिक रूप से लागू कर दिया। जिसके कारण संपूर्ण देश में करोड़ों करोड़ों लोगों में आक्रोश है और आक्रोशित होकर सड़कों पर नाराजगी व्यक्त करते आ रहे हैं। क्षत्रिय समाज सहित सामान्य वर्ग के गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा देश में कार्यरत तमाम सामाजिक संगठनों ने तय किया है। इसी क्रम में हमारे हिस्से में बिहार में कार्यरत 21 संगठनों को मिलाकर यह समिति बनाई गई है। जो संपूर्ण बिहार में जन समर्थन के साथ युद्ध स्तर पर गांव का दौरा कर जनभागीदारी इकट्ठा करेगी और आगामी कुछ दिनों में राजधानी पटना में एक विशाल रैली का आयोजन कर सरकार से गरीब सामान्य वर्ग के लोगों को आरक्षण की मांग करेंगी। सामाजिक दबाव तमाम राजनीतिक पार्टियों पर बनाया जाएगा और बात नहीं मानने पर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोट का चोट दिया जाएगा।

राणा सिंह बताया कि बहुत समय के बाद यह पहला मौका है, जब क्षत्रिय समाज एक साथ आकर पूरे भारत का नेतृत्व करेगा। हम क्षत्रिय समाज उन सभी वर्गों का उसी तरीके से ख्याल रखेंगे जैसे हमारे पूर्वजों ने रखा है। हम भारत के हमेशा से रक्षक रहे हैं और इस रक्षा के क्रम में हम कदम से कदम मिलाकर लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे। आपराधिक घटनाओं पर भी अपने विचार रखते हुए राणा सिंह ने कहाँ कि यह बिहार अब विहार ना रहा। अपराधियों के संरक्षक अब सदनों में बैठे लोग कर रहें हैं।

वही इंजीनियर रविंद्र सिंह ने कहा यह बहुत ही सौभाग्य का समय आया है, जब बिहार की धरती को अपना एक महत्वपूर्ण प्रयास करना है। क्षत्रिय समाज संपूर्ण भारत में एक साथ आकर एक ऐसा संदेश दे रही है कि हम संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने के लिए आज भी तन मन धन से हम साथ हैं। क्षत्रिय समाज द्वारा यह कदम अद्वितीय है एवं भारत के इतिहास के लिए एक दोहराता हुआ चरित्र चित्रण है। हमें याद रखना चाहिए यह भारत की राजनीति क्षत्रिय समाज के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। क्षत्रिय समाज द्वारा भारत की रक्षा के लिए कटते और मिटते रहें हैं। आज भी क्षत्रिय समाज अपने दायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम है एवं पूर्णरुपेन समझता है कि हमें भारत के लिए क्या करना चाहिए।यह कोई नहीं तय करेगा, कि भारत की राजनीति किस ओर जाएगी। यह तय करने का अधिकार सिर्फ आम जनता को है। आम भारतीयों को इस संकट में जिस तरीके से सदनों में बैठे हुए माननीय द्वारा लगातार धकेला जाता है। वही आपस में ही आप भाईचारा छोड़कर लड़ते और झगड़ते रहे। यह कैसी विडंबना है यह कैसी सरकार है जो भारत के आम आदमी को हमेशा जाति धर्म समुदाय के हिसाब से बाँटती रहती है। धर्म के नाम पर बड़े-बड़े हथकंडे अपनाए जाते हैं। लेकिन यह कोई कहने के लिए तैयार नहीं है कि भारत में क्या वर्तमान प्रधानमंत्री जिस नारों के साथ देश की बागडोर लोगों से लिया, क्या भारत में राम मंदिर बन पाएगा। जिस तरीके से भारत सरकार ने एससी एसटी एक्ट के तहत कानून को उच्चतम न्यायालय को ठेंगा दिखाते हुए उसकी मर्यादा को तार तार करते हुए सदन में यथावत फर्जी मुकदमों का एक सिलसिला जारी रखा। विद्वतजनों के फैसले को सदन में बैठे वैसे लोग जिन्हें न्याय की परिभाषा सिर्फ भाषणों में नजर आती है वह लोग सदन में बैठकर आम जनता के भविष्य के साथ खेलते हैं। भाईचारे का नारा देने वाले राजनेता सदन में बैठकर भाईचारे शब्द को तार तार करते रहें। हमें समझना होगा कि जाति धर्म और समुदाय के हिसाब से बढ़ने के कारण ही आज राजनेताओं को यह मौका मिलता है कि वह हमारे साथ धोखा और फरेब कर सकें। जिस राम मंदिर के नाम पर भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री सदन तक पहुंचे, हमेशा से उन्होंने इस बात को टालते रहे कि कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई काम हो पाएगा। लेकिन यह तो साबित हो गया, जब एससी एसटी एक्ट के लिए उच्चतम न्यायालय के फैसले को सदन में पलट दिया गया और एक कानून बना दिया गया। जिससे पालन करना न्यायालयों के लिए अति आवश्यक, क्योंकि संविधान के रक्षक के रूप में ही भारत की न्यायालय आती है। तो क्या भारत के प्रधानमंत्री जिनके पास खुद के राष्ट्रपति हैं खुद के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं वैसे समय में अगर राम मंदिर का निर्माण नहीं होता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। क्यों नहीं राम मंदिर के नाम पर सदन में अध्यादेश लाकर कानून बना दिया जाए। यह कौन सी रुकावट है जो सिर्फ राजनीति करने के लिए जातिवाद और समाजवाद को तोड़ने के लिए वर्तमान प्रधानमंत्री को हर ताकत देता है। यह दुर्भाग्य है कि हम भारत के ऐसे प्रतिनिधियों के साथ अपने आप को खड़ा पाते हैं जो 24 घंटे में लगभग झूठ ही बोलते हैं। यह दुर्भाग्य है हमारा भारतीय समाज आज एकता और अखंडता के जगह पर अपने आप को विखंडित पाता है।जिस भारत को सोने की चिड़िया कही जाती थी, वही आज के राजनेताओं की झूठ का केंद्र बना हुआ। इसलिए क्षत्रिय समाज ने पूर्णरूपेण अपनी पूरी ताकत के साथ यह निर्णय लिया है कि भारत को एक संपूर्ण राष्ट्र बनाने का प्रयास करेंगे और एक भारत, एक शिक्षा, एक चिकित्सा, एक नागरिकता एवं सभी प्रकार की एकल नीति का निर्माण किया जाएगा। वहीं ई. रविन्द्र सिंह ने हाजीपुर व वैशाली जिले में लगातार हत्याकांड को लेकर कहा कि यह जिला पुलिस की नाकामयाबी का परिणाम हैं। साथ ही यह राजनीति से प्रेरित घटनाएँ हैं, जिसमें कल रात हुए संजीव सिन्हा की हत्या बहुत ही दुखद् और निंंदनीय हैं। कुछ ही समय पहले मनीष सहनी की हत्याकांड को भी गलत रूख में मोड़ दिया गया। वहीं सुशील हत्याकांड में हत्यारा आज तक नहीं पकड़ा गया। जबकि सामान्य जीवन जीने वालों को जेल भेज दिया गया।

वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में राणा सिंह के साथ इंजीनियर रविंद्र सिंह, डॉ विजय राज सिंह, डॉ विनय बिहारी सिंह, अभिषेक कुमार सिंह, धीरेंद्र सिंह, चंद्रशेखर सिंह चौहान, एसके सिंह, नरेश राणा धनवंत सिंह राठौर, अधिवक्ता रवि सिंह, राजनाथ सिंह, जोगिंदर सिंह, नागेंद्र प्रसाद सिंह, मधुसूदन सिंह, राज किशोर सिंह, प्रोफेसर अशोक सिंह, दिवाकर सिंह, राजेश सिंह , प्रेम शंकर सिंह, गोपाल सिंह, राजीव कुमार सिंह, विरांगना विभा सिंह सहित 21 संगठन के प्रमुख लोग उपस्थित थे। यह कैसा ऐतिहासिक कदम रहा है जिसको देखते हुए समाज के वैसे लोग एक मंच पर आने को तैयार हैं। जहां से भारत सरकार को एवं राज्यों की सरकारों को एक संदेश दे सके।

04-Sep-2018 11:55

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