Live TV Comming Soon The Fourth Pillar of Media
Donate Now Help Desk
94714-39247
79037-16860
Reg: 847/PTGPO/2015(BIHAR)
14-Jan-2020 11:06

शर्मसार महसूस कर रहा बिहार का एक गांव, हर नजर झुकी और चेहरे पर खामोशी

वे कहते हैं कि हम लोग न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारे वकील द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। हम लोग अंतिम दम तक लड़ेंगे।

गांव के लोग दुख में सहभागी हो सकते हैं, लेकिन कुकर्म और पाप में शरीक नहीं। औरंगाबाद के कर्मा लहंग गांव के वाशिंदों की यही सोच है। यह वही गांव है जहां साल 2012 के चर्चित निर्भया सामूहिक दुष्‍कर्म व हत्‍याकांड का एक आरोपित अक्षय ठाकुर पला-बढ़ा। लोगों को यह तकलीफ साल रही कि यहां के वाशिंदे के अपराध ने पूरे गांव को शर्मसार किया है। वहां हर नजर झुकी दिख रही तो चेहरे पर खामोशी भी है। क्‍या है मामला, जानिए विदित हो कि साल 2012 के दिसंबर की एक रात दिल्‍ली में चलती बस में एक पारामेडिकल छात्रा के साथ न केवल सामूहिक दुष्‍कर्म किया गया, बल्कि जबरदस्‍त हैवानियत भी की गई। फिर उसे मरने के लिए सड़क किनारे फेंक दिया गया। पुलिस ने मामले का उद्भेदन कर सभी छह अपराधियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक नाबालिग बाल सुधार गृह में तो शेष पांच तिहाड़ जेल भेजे गए। ट्रायल के दौरान मुख्‍य आरोपित ने तिहाड़ में सुसाइड कर लिया। शेष बचे अक्षय सहित चारों की मौत की सजा पर अंतिम मुहर लगने के बाद सोमवार को दिल्‍ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया। अगर उपरी अदालत से इसपर स्‍टे नहीं लगा तो चारों को 22 जनवरी की सुबह फांसी पर लटका दिया जाएगा।

गलत संगत में बिगड़ बन बैठा गुनहगार अक्षय ठाकुर का कर्मा लहंग गांव औरंगाबाद जिला के टंडवा थाना क्षेत्र में पड़ता है। वहां सरयू सिंह की गृहस्थी राजी-खुशी चल रही थी। तीन बेटों में अक्षय सिंह ठाकुर से उन्हें कुछ खास उम्मीद थी। भाइयों के साथ अक्षय रोजी-रोटी के जुगाड़ में दिल्ली गया और वहां ऐसी साथ-संगत कर बैठा कि निर्भया कांड का गुनहगार बन गया। अब जबकि डेथ वारंट जारी हो चुका है तो स्वजनों के लिए कोई चारा भी नहीं। हालांकि, वे आखिरी क्षण तक अक्षय की जिंदगी के लिए प्रार्थना और प्रयास करते रहेंगे। भाई बोले: अंतिम दम तक करेंगे कोशिश बात करते हुए अक्षय के बड़े भाई विनय सिंह का गला रुंध आता है। वे कहते हैं कि हम लोग न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारे वकील द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। हम लोग अंतिम दम तक लड़ेंगे।

परिवार से गांववालों को सहानुभूति दूसरी ओर कर्मा लहंग गांव का दूसरा कोई वाशिंदा इस मसले पर बात करना भी नहीं चाहता। गांव के लोग बहुत कुरेदने पर महज इतना कहते हैं कि कानून को अपना काम करना है। अदालत का फैसला शिरोधार्य। गांव में रहने तक अक्षय तो भला ही था, दिल्ली जाकर जाने क्या हो गया! एक अन्‍य ग्रामीण ने कहा कि गांव के लोग घटना से दुखी हैं। सरयू सिंह के परिवार से सहानुभूति है, वे लोग दुख में सहभागी हो सकते हैं, लेकिन कुकर्म और पाप में शरीक नहीं हो सकते। उम्र के आखिरी पड़ाव पर पिता पिता सरयू सिंह जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं। आस-औलाद के लिए मोह-माया से वे भी परे नहीं, लेकिन समाज-सरकार का वास्ता भी है। वैसे उन्होंने ही टंडवा थाने में 21 दिसंबर, 2012 को अक्षय का आत्मसमर्पण कराया था। वहां से दिल्ली पुलिस उसे अपने साथ ले गई थी। सामूहिक दुष्कर्म का दोष सिद्ध हो जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। स्वजनों ने क्षमा याचिका दायर की, जिसे अदालत खारिज कर चुकी है। अब 22 जनवरी के लिए डेथ वारंट जारी हो चुका है।

कलेजे में हूक, पर जुबान पाबंद बहरहाल सरयू सिंह के घर चूल्हा-चौका की भी किसी को फिक्र नहीं। कातर आंखों से महिलाएं दुहाई दे रहीं कि ऐसी विपत्ति से किसी का वास्ता नहीं हो। सरयू सिंह की आंखों के आंसू भी एकधार हो चले हैं। कितना हूक है कलेजे में! फिर भी जुबान पाबंद हैं। खेती-किसानी से चल रही गृहस्थी अक्षय के अपराध के समय उसके दोनों भाई भी दिल्‍ली में ही रहते थे। लेकिन उस अपराध के कारण दोनों भाइयों को दिल्ली से तड़ीपार होना पड़ा। जिस कंपनी में मुलाजिम थे, उसने काम से बेदखल कर दिया। अब वे खेती-किसानी के भरोसे गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे। फांकाकशी की नौबत तो कभी नहीं रही, लेकिन सरयू सिंह की साढ़े चार एकड़ जमीन से पूरे परिवार के लिए खुशहाल जिंदगी का भरोसा भी नहीं कर सकते। ...और अब तो अक्षय से मिला अंतहीन दुख भी है।

14-Jan-2020 11:06

जुर्म मुख्य खबरें

समाचार भारत_दर्शन राजनीति खेल जुर्म शिक्षा चिकित्सा धर्म परम्परा व्यक्तित्व कला सम्मान फिल्म सामाजिक_संस्थान रोजगार कानून अर्थव्यवस्था समस्या पर्यावरण सैनिक पुलिस गांव शहर ज्योतिष सामान्य_प्रशासन जन_संपर्क छात्र_छात्रा
Copy Right 2020-2025 Ahaan News Pvt. Ltd. || Presented By : CodeLover Technology