07-Jun-2018 03:17

सुशील हत्याकांड में राजनाथ सिंह और वसुंधरा राजे सिंधिया पर हो कार्रवाई

आम आदमी को डर में रखने का यह बेहतरीन तरीका, जनता में हो मौत का डर यहीं चाहते हैं राजनेता। कब तक बचते रहेंगे वो जिनकी जिम्मेदारी है की हमें सुरक्षित रखें। शर्म और बेशर्मी की हद पार कर गयें, राजनेता। जूमले और फेंकने से आम जनता नहीं रहेगी सुरक्षित।

हाजीपुर, वैशाली में हुए हत्याकांड ने पुरे भारत में हंगामा मचाया। चुनाव आने वाले हैं और नेताओं का डर आम जनता में व्याप्त हो। अपनी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले राजनेताओं और नौकरशाहों ने आम आदमी का जीवन डर में बदल दिया है। इसलिए आज का यह आलेख पढ़ने के बाद ही समझ आयेगा कि इसके हेड का मतलब क्या हैं? हम सुशील कुमार हत्याकांड पर नजर डाले जो वैशाली पुलिस की जुबानी हैं तो पता चलता हैं कि राजनाथ सिंह गृहमंत्री पद पर बैठकर मदारी का रोल प्ले कर रहे हैं। पुरे भारत की जनता को बंदर बनाकर नचा रहे हैं। गृहमंत्री में नीहित हैं हमारी सुरक्षा, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री जो अपने आपको प्रधान सेवक कहते हैं झूठ और जूमले फेंक कर सत्ता हासिल किया। तो हम अगर सुरक्षित नहीं है तो इसमें कोई ताजुब नहीं होना चाहिए। वैशाली पुलिस ने बताया कि राजस्थान के जयपुर के सेंट्रल जेल से सुशील कुमार की हत्या का प्लान किया गया। वकई यह हकीकत ही हैं क्योंकि पुलिस बोल रही हैं, तो हमें सत्य ही मानना पड़ेगा। चाहे वह ईमानदारी से कह रही हो या पैसे लेकर, लेकिन जो व्यवस्था है उसमें पुलिस जो कहे वह सत्य ही माना जाता हैं। चाहे कोर्ट में गवाहियों में सब झूठा क्यों ना हो जाए। अगर वैशाली पुलिस कहती हैं कि प्लान राजस्थान के जयपुर के सेंट्रल जेल में हुआ तो पहला आरोपी तो जेल सुप्रीटेंडेंट (जेल अधीक्षक) हैं। दूसरा गुनेहगार वहाँ के जिलाधिकारी महोदय, क्योंकि जेल की जिम्मेदारी उनमें ही निहित है। तीसरा गुनेहगार वहाँ के कमिश्नर स्तर के पदाधिकारी, फिर राज्य सरकार के सभी वो पदाधिकारी जो जिम्मेदार हैं जेल की देखरेख और सुरक्षा के लिए। वहीं सबसे बड़ा राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को मुख्य आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर वैशाली लायें। क्योंकि उपयुक्त सभी लोग की संवैधानिक जिम्मेदारी थी कि जेल में बंद कैदियों पर नजर रखे और उन्हें अपराधियों से दूर रखे। सुशील कुमार की मौत के लिए ये सभी मुख्य आरोपी हैं, जबकि वैशाली पुलिस अपने निकम्मेपन का एक बार फिर परिचय दिया।

हम आज आपको अवगत कराते हैं कि भारत सरकार में गृहमंत्रालय की भूमिका क्या होती हैं और हमारे गृहमंत्री राजनाथ सिंह कैसे सोये हुये हैं। भारत सरकार के समस्त मंत्रालयों में गृह मंत्रालय का स्थान सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। प्रोटोकॉल नियमों के अनुसार, मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री के पश्चात् गृह मंत्री का नाम आता है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्ण देश में शांति एवं सुव्यवस्था बनाए रखना है। गृह मंत्रालय द्वारा इतने अधिक एवं महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न किए जाते हैं कि उन्हें देखते हुए यह प्रतीत होता है कि मानों गृह मंत्रालय ही सम्पूर्ण भारत की सरकार हो। गृह मंत्रालय के कार्य कि विवेचना यहाँ उचित नहीं है लेकिन खास बाते यह हैं कि गृह मंत्रालय एक बहु-कार्यकारी मंत्रालय है। संघीय सूची के अंतर्गत आने वाले लगभग समस्त कार्यों का सम्पादन इसी मंत्रालय के माध्यम से होता है। इसके द्वारा सम्पादित किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कार्य है। लेकिन यहाँ चर्चा देश में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखना, गृह मंत्रालय द्वारा मुख्यतः ऐसे मामलों का निपटारा किया जाता है, जो कि देश में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित हैं। यदि किसी राज्य में शांति एवं व्यवस्था के भंग होने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन आरोपित किया जाता है तो उस राज्य के प्रशासन का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में भी केन्द्रीय सरकार की समस्त शक्तियों का प्रयोग गृह मंत्रालय द्वारा ही प्रयुक्त किया जाता है। राज्यों की पुलिस, जेल, रेलवे पुलिस, सतर्कता ब्यूरो, केन्द्रीय रक्षा, कॉलेज, इत्यादि विभिन्न संगठनों का नियोजन तथा उनके कार्यों के समन्वय द्वारा यह मंत्रालय सम्पूर्ण देश की कानून एवं शांति व्यवस्था पर दृष्टि रखता है।

अब यह तय करने का समय आ गया है कि क्या जेल अपराध का अड्डा बन गया हैं। जेल में लोगों को इसलिए भेजा जाता हैं ताकि अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को सुधार किया जा सके। लेकिन देश में लगातार यह बात बढ़ती जा रही हैं कि जेल में षड़यंत्र रचा जाता हैं। जेल में भी राजनेताओं की लंबी पैठ का ही नतीजा है कि जेल अब सुधार की जगह अपराधियों का अड्डा बन गया है। जेल सुप्रिटेंडेंट, जिलाधिकारी, कमिश्नरी स्तर के पदाधिकारी, राज्यों के पदाधिकारियों सहित राजस्थान के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को गिरफ्तार करें। साथ ही राजनाथ सिंह सबसे बड़े साजिशकर्ता के रूप में हैं या राजनाथ सिंह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने आप को कानून के हवाले करें। भाजपा के सभी मंत्री जिसमें नेतृत्व करने वाले भारत के प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी को इन सभी को बर्खास्त करने की ओर कदम बढ़ाना चाहिए।

वैशाली लगातार अपराधियों का केंद्र बना हुआ है और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व पर लगातार सवाल उठते रहते हैं। वैसे ही नेतृत्व की कमी झेल रहा वैशाली और पुलिस प्रशासन में द्वारा जातिवाद फैलाने का काम दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अब भारत सरकार अपराधियों को कहाँ रखेगी और क्या प्लान कर रही हैं। भारत सरकार जो वर्तमान सरकार हैं उसमें पहले पैदान से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक गुंडे पाल रखे हैं। लगभग 60% से ज्यादा अपराधी है जो भाजपा के सांसद या विधायक हैं। वहीं लगभग प्रदेश अध्यक्ष अपराधी हैं, जमीन माँफिया, हत्याकांड के आरोपी, जिंदा जलाने के आरोपी तो दुकान खाली कराने से लेकर जमीन खाली कराने में शामिल हैं। पूर्ण रूप से फिल्मों की तरह शहरों एवं गाँव के लोग ऐसे लोगों से मौत के डर से नहीं बोलते हैं। सुशील कुमार हत्याकांड अब तक वैशाली के लिए सवाल था, लेकिन अब यह भारत स्तर पर जा खड़ा हुआ। इस कांड के प्लान में सहयोगियों में भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया से लेकर वरिय अधिकारी और जेल अधीक्षक तक शामिल हुए। यह किस रूप में शामिल हुए इसकी समीक्षा कानूनी रूप से होने चाहिए। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती हैं हम आम आदमियों के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए। वैशाली पुलिस अधीक्षक को कानून की रक्षा करने के लिए सभी को गिरफ्तार कर वैशाली लाये और जेल में डाले साथ ही साथ कोर्ट में पेश करें।

07-Jun-2018 03:17

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