15-Jun-2018 09:45

हत्यारे सांसदों, विधायकों और जिला प्रशासन को कौन देख रहा है

पूर्व जिलाधिकारी रचना पाटिल ने वैशाली जिला प्रशासन को निकम्मा बना दिया। क्यों नहीं सांसदों, विधायकों एवंं जिला प्रशासनों पर कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की। अपनी जिम्मेदारियों को खुलें तौर पर दरकिनार कर संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया। लगातार मौत का खेल खेलत

पिछले कुछ वर्षों में वैशाली की सड़कों पर लगातार मौत का खेल चल रहा है। कितने परिवार की खुशियाँ बिखड़ गई और कितनों की दुनिया उजड़ गई। कितनों को सर से पिता का साया उठ गया, तो कितने पिताओं ने अपने जीते जी बच्चों को मुखाग्नि दी। कितनी पत्नीयों के पति बीच मझधार में छोड़ चले गये, तो कितनों की पत्नीयाँ घर की खुशियों को अपने साथ लेकर चली गई। कितने वृद्धों के पुत्र और पौत्र इस सड़क ने छीन लिया, जिसके सहारें अपनी अंतिम यात्रा की तैयारी में थी। कुछ ऐसे रिश्तों पर सड़कों ने वार किया जिसका कोई नाम नहीं होता पर एक झलक से प्यार के दो मुस्कुराहट बिखड़ जाती थी। कितने साथी चले गये जो एक दूजे की हर पल के साथी थे। कुछ जिंदगी ऐसी भी थी जो जन्म से पहले ही गुजर गए और उनका कोई जान पहचान भी नहीं हो पाया। हमने जो खोया हैं वह अब मिल नहीं सकता, लेकिन जो पास में हैं उसे सुरक्षित तो करें। लगातार सड़को का निर्माण जारी रहता है पर सड़कें कम और सड़कों में गढ्ढे हैं। सड़क सुरक्षा के नाम पर सिर्फ सड़क सुरक्षा सप्ताह और महिना मनाया जाता हैं और पैसे उगाही के लिए बैनर, पोस्टर, गाड़ियों पर प्रचार-प्रसार, बड़े-बड़े होडिंग, टेलीविजन चैनलों पर लंबी लंबी भाषण, पेपरों में प्रेसविज्ञप्ति, मोबाइलों पर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के माध्यम से प्रचार-प्रसार एवं ना जाने कितने जुमलें और फेंकू अप्रत्यक्ष रूप से प्रगट हो जाते हैं। लेकिन सब आम आदमी को ही जागरूक करने में लग जाता हैं। जिस जिम्मेदारी के लिए उन्हें हमने बैठाया, वह भी नौकर के रूप में। नौकरशाह और समाज सेवा के नाम पर हमारा ही श्वसन करने लगे हैं। सड़क सुरक्षा का कोई पैमाना नहीं हैं। आप मरों और चार लाख रुपये लों। लेकिन यह चार लाख क्या उन राजनेताओं, अधिकारियों, ठेकेदारों, इंजीनियर आदि से वसूली कर दिया जाता तो समझ आता कि जिम्मेदारी जिसने नहीं निभाई उससे वसूली हुई। जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले की पूरी प्रोपर्टी बेच कर मृतकों को सहानुभूति स्वरूप दिया गया है। लेकिन ऐसा नहीं होता हैं और हमारे यानि आम आदमी पर भिन्न-भिन्न प्रकार से टैक्स रूपी चंदा वसूली किया जाता हैं। टैक्स के कितने प्रकार है वह सरकार बताती भी नहीं हैं, वह संसदों में अंग्रेजी में भाषण देकर जनता के बीच कभी नहीं आते हैं। सड़क सुरक्षित हो यह जिम्मेदारी होती हैं, जिला प्रशासन की। जिला अधिकारी के पास यह शक्ति होती हैं कि आम आदमी को सुरक्षित रखें। सांसदों, विधायकों पर शिकंजा कसने में कोताही नहीं बरती जाए और वैशाली के तीन सांसद और आठ विधायकों पर कानूनी रूप से हत्याकांडों को संरक्षित और सम्पोषित करने के तहत अपराधिक मुकदमे चलाये जाए। साथ ही हत्याकांड के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर जेलों में डाल दिया जाए। जो जनप्रतिनिधि जनता को सुरक्षित नहीं रख सकता वह खुले आसमान में साँसे कैसे ले सकते हैं।

हम टैक्स भी भरें और राजनेता और ब्यूरो क्रेट्स यह कह देते हैं कि आम आदमी की अपेक्षाएं बहुत बड़ी हैं। हाँ हैं हमारी अपेक्षाएँ बड़ी, तो क्या, हम हैं तुम्हें पालने वाले, हम ही हैं तुम्हें अन्नदाता, हम तुम्हारे बच्चों, पत्नी, माँ-पिता के दाता, तुम्हारे सारे रिश्ते को हम ढ़ोते और पालते हैं। अब तुम आना चुनाव में कहने कि हम सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा, घर आदि देंगे। आरे मेरे पैसों पर जीते हो और हमें आँखे दिखाते हों। हमें चलने का ढंग नहीं, तब तो तुझे और तुम्हें कई पीढ़ियों को संभाल रहे हैं। राजनीतिक दलों का निरंतर स्तर गिरने का परिणाम ही है कि राजनीति में चोर, गुण्डें और विभिन्न क्षेत्रों के अपराधियों को राजनीतिक दलों ने विधायक और सांसद बनाया है। सदनों का महत्व क्या हो वह कोई अपराधी कैसे जान सकता है। बिहार के पथ निर्माण मंत्री के कई बार लंबे लंबे ब्यान आ चुके है कि दिपावली तक सड़कों का मरम्मत हो जाएगा, तो क्रिसमस पर, तो कभी नये साल पर, तो कभी होली से पहले, लेकिन अब वह साल गया और नये साल की दिपावली और क्रिसमस सामने हैं। वहीं केंद्रीय परिवहन के विभाग और मंत्री शान से कुंभकर्ण की नींद सो रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति बद से बत्तर हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के नाम पर कुछ कुछ दूरियों पर पैसा वसूली का ठेका दे रखा हैं। कोई देश का नेता नहीं बता सकता कि उसके पूर्वजों के पैसे से देश चल रहा हैं। देश में जनता का योगदान ही नहीं हैं। याद रहे कि यह सारा पैसा आम आदमी का है और उनके ही पैसों पर राज होता हैं। हम भारत के संविधान का अक्षरसः पालन करते हैं, भले ही हमें अधुरा ज्ञान हो। हमने अपनी जिम्मेदारी उसी तरह राजनेताओं को सौंपा हैं जैसे आज भी हम अपने घरों और अन्य व्यापार के जगहों पर चौकीदार रखते हैं। हमारें एक एक समान और पैसे का हिसाब देना हैं और सुविधाओं से अब आम आदमी समझौता नहीं करेंगें।

आज फिर से वैशाली में मौत की लड़ी लग गई और कितने परिवार उजर गया। वैशाली जिला प्रशासन और राजनेता अपने अपने मांद में बैठे रह गये। आम जनता का ख्याल रखने में जिला प्रशासन की कोई दिलचस्पी नहीं रही हैं यह सड़क घटनाएँ साबित करती हैं। कौन भूल सकता हैं पत्रकार आदित्य प्रकाश की मौत, वहीं सराय बाजार में 13 लोगों की बस - आँटो टक्कर शायद ही किसी के दिमाग से निकले। रोज-रोज कोई ना कोई सड़क दुर्घटना देखने या सुनने को मिलती हैं। लेकिन कोई आगे बढ़कर ना राजनेता सामने आये और ना ही कोई प्रशासनिक अधिकारी। सब मस्त होकर 4-4 लाख बाँट रहे हैं। अब समय आ गया है कि वैशाली अपने पैरों पर खड़ा हो, दुनिया को एक संदेश दे। जिला निवासी इन 3 सांसदों, 8 विधायकों का विरोध करें। साथ ही साथ सभी प्रकार प्रशासनिक अधिकारियों का विरोध होना चाहिए। जिला प्रशासन को नोटिस भेजा जाए और वैशाली जिला के गैर राजनीतिक लोगों के साथ जिला का संचालन उन्हीं के सहयोग से किया जाए। जिस प्रकार 20 सूत्री जैसी कमिटियाँ बनती हैं। आज वैशाली जिले के 20 सूत्री कमिटी भी दलाली में व्यस्त हैं। साथ ही प्रखंड स्तर के कमिटियाँ भी दलाली में व्यस्त हैं। आम लोगों को सिर्फ़ अपनी बातें कहने के लिए बुलाई जाती हैं। नरेंद्र मोदी से लेकर वार्ड सदस्य तक आम आदमी को सुनाते ही रहते हैं। परंतु आम आदमी की बातों को सुनने का कोई सरल माध्यम नहीं है। सुचना के अधिकार अधिनियम सरकार अपने पक्ष में बना रखी हैं। आवेदन से प्रथम अपील और द्वितीय अपील तक दलाली में व्यस्त हैं। वहीं अधिकारी सूचना के अधिकार का दलाली के लिए खुब प्रयोग कर रहे हैं। अब भारत को सुस्पष्ट बनाने के लिए आम आदमी को अपने हाथों में अधिकार को सीमित करने की जरूरत है।

सड़कों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन और राजनेताओं पर आश्रित रहने की जरूरत नहीं है। प्रशासन को साथ में खड़ा कर काम लेने की जरूरत है। वहीं राजनेताओं को लाईन में खड़ी कर योजनाओं को हर व्यक्ति तक पहुँचाने का काम करने की आवश्यकता है। राजनेताओं पर घोड़े की लगाम की तरह ही लगाम की जरूरत है। तभी खुले तौर पर हत्या का नंगा खेल बंद होगा। पूर्व जिलाधिकारी रचना पाटिल को भारत नव निर्माण के माध्यम से पत्र लिखकर सुझाव भी दिया गया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और पत्र देने के तीसरे दिन ही सराय में 13 लोगों की मौते हुई थी। निरंतर बढ़ती जा रही सड़कों पर मौत का खेल एक एक कर लगभग परिवार में मौत का तांडव खेल रही हैं। कब बंद होगा यह मौत का खेल इसके लिए अब प्रशासन के जगह प्रशासन पर शासन करने वालों की जरूरत है। पैसा हमारा तो अब हम ही तय करें कि कैसे चलेगा वैशाली जिला और जिला प्रशासन।

15-Jun-2018 09:45

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