21-Jan-2020 01:03

आज का प्रेरक प्रसंग संघर्ष का महत्व

एक साल मुझे मौका दीजिए, जैसा मौसम मैं चाहूं, वैसा हो जाए। फिर आप देखना मैं कैसे अन्न के भंडार भर दूंगा।

किसी गांव में एक किसान रहता था । एक बार उसकी फसल बाढ़ आ जाने से खराब हो गई। उसने दूसरी फसल बोई, अबकी बार पानी ही नहीं आया। लगातार दो फसलें खराब हो जाने से वह भगवान से बड़ा नाराज हो गया और भला-बुरा कहने लगा। उसकी बातें सुनकर भगवान प्रकट हुए। भगवान ने किसान से वरदान मांगने को कहा। किसान ने कहा कि- सिर्फ एक साल मुझे मौका दीजिए, जैसा मौसम मैं चाहूं, वैसा हो जाए। फिर आप देखना मैं कैसे अन्न के भंडार भर दूंगा। भगवान ने उसे ये वरदान दे दिया।

किसान ने गेहूं की फ़सल बोई । उसने जैसा मौसम चाहा, उसे मिला। समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी। क्योंकि ऐसी फसल तो पहले कभी नहीं नहीं हुई थी। किसान ने सोचा अब पता चलेगा भगवान को, कि फसल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने साल हम किसानों को परेशान करते रहे। फसल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से खेत में गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा तो उसने देखा कि बाली में एक भी गेहूं का दाना नहीं था। ये देखकर किसान बहुत दुखी हो गया और उसने परमात्मा से क्हा- आपने ऐसा क्यों किया?

भगवान प्रकट हुए और बोले- ये तो होना ही था, तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया। इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए। जब आंधी और तेज बारिश होती है तो पौधा विपरीत परिस्थिति में खुद को बचाने के लिए संघर्ष करता है, इससे उसके अंदर ऊर्जा का संचार होता है। तभी उसमें से अन्न उपजता है। भगवान की बात सुनकर किसान को अपनी गलती का अहसास हुआ।

कथा का प्रेरणादायक सारांश : लाइफ में कई बार ऐसा समय आता है जब हम हर तरफ से हताश हो जाते हैं तब भगवान को कोसते हैं। लेकिन इसका दूसरा नजरिया भी है। अगर हमें बिना किसी परेशानी के सबकुछ आसानी से मिल जाएगा तो हम संघर्ष का महत्व नहीं समझ पाएंगे

21-Jan-2020 01:03

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