14-Dec-2019 09:49

अयोध्या पर फैसले के बाद अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के केस में शुरू हुई सुनवाई...

स्वयम्भू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्‍वेश्‍वर की ओर से पंडित सोमनाथ व्‍यास और अन्‍य ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में स्‍थानीय अदालत में मुकदमा दाखिल किया था

अयोध्या में रामलला विराजमान के पक्ष में सुप्रीम फैसले के बाद अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर मुकदमा सुर्खियों में आने वाला है ! इलाहाबाद हाई कोर्ट का दो दशक पुराना स्टे खत्‍म होने से स्‍वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्‍वेश्‍वर के मुकदमे की सुनवाई फिर से वाराणसी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्‍ट ट्रैक कोर्ट) सुधा यादव की कोर्ट में शुरू हो गई है ! भगवान विश्‍वेश्‍वर की ओर से ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराए जाने की अर्जी पर कोर्ट 9 जनवरी को सुनवाई करेगी |

स्वयम्भू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्‍वेश्‍वर की ओर से पंडित सोमनाथ व्‍यास और अन्‍य ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में स्‍थानीय अदालत में मुकदमा दाखिल किया था | भगवान विश्‍वेश्‍वर के पक्षकारों की ओर से कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद ज्‍योतिर्लिंग विश्‍वेश्‍वर मंदिर का अंश है | वहां हिंदू आस्‍थावानों को पूजा-पाठ, राग-भोग, दर्शन आदि के साथ निर्माण, मरम्‍मत और पुनरोद्धार का अधिकार प्राप्‍त है | इस मुकदमे में वर्ष 1998 में हाई कोर्ट के स्‍टे से सुनवाई स्‍थगित हो गई थी, जो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में फिर से शुरू हुई है |

सिविल जज ने मुकदमे की सुनवाई शुरू करते ही दिवंगत वादी पंडित सोमनाथ व्‍यास और डॉ. रामरंग शर्मा के स्‍थान पर प्रतिनिधित्‍व करने के लिए पूर्व जिला शासकीय अधिवक्‍ता (सिविल) विजय शंकर रस्‍तोगी को वादमित्र नियुक्ति किया है | वाद मित्र की ओर से पुरातात्‍विक सर्वेक्षण कराने की अर्जी से हलचल तेज हो गई | कोर्ट ने इस अर्जी पर विपक्षी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद और सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड (लखनऊ) से आपत्ति तलब की है |

वाद मित्र विजय शंकर रस्‍तोगी ने कोर्ट में दी गई अर्जी में कहा है कि कथित विवादित ज्ञानवापी परिसर में स्‍वयंभू विश्‍वेश्‍वरनाथ का शिवलिंग आज भी स्‍थापित है | मंदिर परिसर के हिस्‍सों पर मुसलमानों ने आधिपत्‍य करके मस्जिद बना दिया | 15 अगस्‍त 1947 को भी विवादित परिसर का धार्मिक स्‍वरूप मंदिर का ही था. इस मामले में केवल एक भवन ही नहीं, बल्कि बड़ा परिसर विवादित है. लंबे इतिहास के दौरान पूरे परिसर में समय-समय पर हुए परिवर्तन के साक्ष्‍य एकत्रित करने और धार्मिक स्‍वरूप तय करने के लिए भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से सर्वेक्षण कराया जाना जरूरी है | वादमित्र ने भवन की बाहरी और अंदरूनी दीवारों, गुंबदों, तहखाने आदि के सबंध में ASI की निरीक्षण रिपोर्ट मंगाने की अपील की है |

14-Dec-2019 09:49

धर्म मुख्य खबरें

समाचार भारत_दर्शन राजनीति खेल जुर्म शिक्षा चिकित्सा धर्म परम्परा व्यक्तित्व कला सम्मान फिल्म सामाजिक_संस्थान रोजगार कानून अर्थव्यवस्था समस्या पर्यावरण सैनिक पुलिस गांव शहर ज्योतिष सामान्य_प्रशासन जन_संपर्क छात्र_छात्रा
Copy Right 2020-2025 Ahaan News Pvt. Ltd. || Presented By : CodeLover Technology