31-Dec-2019 09:04

असफलता से सबक लो, नई सफलता का द्वार खुलेगा : आचार्य महाश्रमण

बल्लारीवासियों के लिए वरदान बना वर्ष का अंतिम दिन, अहिंसा यात्रा का बल्लारी में भव्य स्वागत, 31-12-2019, मंगलवार, बल्लारी, कर्नाटक

सन् 2019 का अंतिम दिन बल्लारीवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहा, क्योंकि उनके आराध्य आचार्यश्री महाश्रमणजी नव वर्ष के मौके पर उन पर आशीर्वाद बरसाने उनकी भूमि पर जो आए थे। सांप्रदायिक भेद इस असांप्रदायिक व्यक्तित्व के आभामण्डल में कहीं विलुप्त प्रायः बना हुआ था। अहिंसा यात्रा प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री के स्वागत में बल्लारी जैन-अजैन समाज उमड़ आया। लोहे की खदानों के निकट बसे बल्लारी के निवासीजन आचार्यश्री की ओर वैसे ही खिंचे हुए चले जा रहे थे, जैसे लोह चुम्बक की ओर खिंचा चला जाता है। आचार्यश्री ने भव्य स्वागत जुलूस के मध्य तेरापंथ भवन, जैन स्थानक और जैन आराधन में पधारकर श्रद्धालुओं पर आशीर्वाद बरसाया। आराधन भवन में मूर्तिपूजक समाज के उपाध्याय श्री कनकसुन्दरजी आदि संतों तथा स्थानक भवन में स्थानकवासी समाज की वयोवृद्ध साध्वी चन्दनबालाजी आदि साध्वियों ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया। ओबलापुर से करीब 11.6 कि.मी. की यात्रा संपन्न कर आचार्यश्री बल्लारी के श्री मेधा डिग्री काॅलेज में पहुंचे।

मेधा डिग्री काॅलेज में आयोजित कार्यक्रम में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कहा कि आदमी कभी राग में चला जाता है और कभी द्वेष में चला जाता है। मनोनुकूल आदि स्थिति सामने आने पर आदमी राग में और मन के प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न होने पर द्वेष भाव जाग सकता है। राग और द्वेष में जाना साधना के विपरीत तथा मध्यस्थ रहना साधना के अनुकूल स्थिति होती है। समता की साधना पुष्ट होती है तो आदमी मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ जाता है। जीवन में द्वन्द्वात्मक स्थितियां आ सकती हैं। लाभ-अलाभ, सुख-दुख, मान-अपमान आदि स्थितियों में सम रहने का प्रयास करना चाहिए।

जो कठिनाइयों को सहता है, वह आगे बढ़ सकता है। जीवन में कभी असफलता भी मिल सकती है, किन्तु हर असफलता एक नई सफलता की राह दिखा सकती है, बशर्ते की उस असफलता से सबक लिया जाए। आदमी कुछ कठोर जीवन जीने की मानसिकता रखे तो वह परमसुख पाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, उसे सफलता भी प्राप्त हो सकती है। आदमी को कभी निराश नहीं बनना चाहिए। आदमी को यह मानकर चलना चाहिए कि पुरुषार्थ कभी बेकार नहीं जाता। वह कभी न कभी अपना फल देता ही है। तत्काल फल न मिलने की स्थिति में निराश नहीं बनना चाहिए।

आचार्यश्री ने कहा कि जैन हो या अजैन गुडमैन बनना चाहिए। गुडमैन बन जाएं तो जीवन अच्छा हो सकता है। जैनों में भी धार्मिकता रहे और अजैनों में भी धार्मिकता रहे। धर्म तो सबके लिए उपयोगी है। बल्लारी निवासी लोगों ने आचार्यश्री से अहिंसा यात्रा के संकल्प स्वीकार किए। तेरापंथी सभा-बल्लारी के अध्यक्ष श्री तगतमल गोलेछा, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री बसन्त छाजेड़ और श्री पारसमल खिंवेसरा ने आचार्यश्री के स्वागत में अपने श्रद्धासिक्त भाव व्यक्त किए। तेरापंथ महिला मंडल की महिलाओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बल्लारी तेरापंथ समाज की बेटियों ने आचार्यप्रवर की अभ्यर्थना में गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया।

31-Dec-2019 09:04

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