04-Oct-2019 08:17

आस्था इतिहास और चमत्कार का है अद्भुत समागम माँ पचपतरा वनदेवी

लोग चन्दा इकठ्ठा कर रख लेते और कहते माँ सपने में आई और बोली अगर मंदिर बनाया तो पूरे वंश और सन्तान की कर दूँगी नाश

हमारे आस पास भी बहुत से मंदिर है जो ऐतिहासिक पौराणिक और चमत्कारी है जो अपने आप में कई इतिहास समेंते है। आज हम आपको बता रहे हैं गड़खा प्रखण्ड के वनदेवी माता पचपतरा की..... माँ पचपतरा वनदेवी मन्दिर गड़खा प्रखण्ड मुख्यालय से किमी दुरी दक्षिण 15 गाँव के बीच चेवर में स्थित हैं, पचपतरा गांव में मात्र माँ की मंदिर और एक पीपल वृक्ष है।चारों तरफ से मंदिर 3 किमी के दूरी के बाद ही कोई गांव मिलती हैं।फिर भी यहाँ सोमवार शुक्रवार और खास कर नवरात्रि में भक्तों की खूब भीड़ होती हैं।भक्त जो भी माँ से मांगते है माँ उनकी मनोकामनाए पूर्ण करती हैं। किसी को पुत्र किसी को कारोबार तो किसी कुछ यहाँ से कोई खाली नहीं जाता... ★लोग चन्दा इकठ्ठा कर रख लेते और कहते माँ सपने में आई और बोली अगर मंदिर बनाया तो पूरे वंश और सन्तान की कर दूँगी नाश ! माँ से जुड़ी कई रोचक कहानियां पहले माँ जड़ती माई के नाम से प्रचलित थी, ख्याति अन्य कई प्रदेशों में भी है। मंदिर के नाम पर कई लोगों ने कई बार चन्दा दिल्ली कलकत्ता गुजरात उड़ीसा सहित अन्य प्रदेशों के अलावा आस पास के सभी गांव से चन्दा इकठ्ठा करते और फिर बोलते की माँ सपने में आई थी और बोली मैं जड़ती माई हूं धुप में ही रहूंगी अगर मंदिर बनाई तो पूरे वंश और खानदान नाश कर दूँगी।फिर पैसे हजम कर जाते।

पहले थी जड़ती माईं अब बनी वनदेवी सन 2007 में सन्त श्रीधर दास जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य बालयोगी मुरारी स्वामी बाल्य अवस्था में यहाँ आए, उस वक्त मंदिर के चारों तरफ जंगल थी दिन में भी साँप सियार व् अन्य जंगली जानवरों के बसेरा रहती थी, वो उसी जंगल में सोने लगे और माँ की मंदिर बनाने की जिद पर अड़ गए। सन्त श्रीधर बाबा ने मंदिर निर्माण कार्य शुरू किया तो ग्रामीणों ने आ कर पूरी इतिहास बताई तो बाबा ने कहाँ की मंदिर बनेंगी। क्योंकि माँ धूम और वार्षिस में भींग रही है, अगर कुछ होगी तो मेरी जिम्मेवारी होगी। मंदिर कार्य शुरू होते ही लोगो में दहशत फैलाने लगी। लोग तरफ तरफ की चर्चा करने लगे। श्रीधर बाबा ने जड़ती माई का नामकरण वनदेवी माता के रूप में किया। फिर उसी वर्ष शतचण्डी महायज्ञ शुरू हुई। फिर किसानों फसल भी अच्छी हुई। आस पास के लोग खुशहाल हुई। ग्रामीणों के मन से भ्र्म दूर हुआ।

हजारो वर्ष पुरानी है पीपल वृक्ष पचपतरा में मंदिर में प्रांगण में स्थित पीपल वृक्ष हजारों वर्ष पुरानी है 80-90 वर्ष के बुजुर्गों की माने तो वृक्ष को उनके पूर्वज भी इसी अवस्था में देखे थे। बीच चँवर में पड़ने वाले वृक्ष खेती किसानी के लिए बेहद उपयोगी है धूम में छाया लेते है। पशु पक्षियों सहित किसानों की प्यास बुझाने के लिए चापाकल भी लगी है पांच पंचायतों के बीच में है मंदिर माँ की मंदिर 15 गांवो टहलटोला, पंचभिड़िया, जिगना , जिल्काबाद ,मठिया ,बरबकपुर ,कुचाह , मीनापुर ,खदाहा ,मजलिशपुर ,पोहिया ,फतनपुर पिरौना ,पिरारी ,सर्वादिह आदि गांवो और पांच पंचायतों मीरपुर जुआरा, पिरौना , भैसमरा, सरगट्टी और हसनपुरा के बीच में है शायद इस लिए इस गांव के नाम पचपतरा पड़ा। पचपतरा ऐसा गांव जहाँ सिर्फ माँ के घर गड़खा प्रखण्ड के नक्शा में पचपतरा गांव का थाना नम्बर है, एक ऐसा गांव जिसे लोग पहले बिना छान छपर अर्थात छत के गांव कहते थे। 15 गांव में बिच में पड़ने वाले गाँव पचपतरा में सिर्फ माँ के ही घर अर्थात मन्दिर है ग्रामीण बताते है कि यहाँ पर सैकड़ो वर्ष पूर्व गाँव हुआ करता था पर महा मारी बीमारी फैली और लोग पलायन कर गए तथा माँ यही रह गई। अभी भी खेतों में खपर के टुकड़े मिलते है, जिससे यह सत्य प्रतीक होती है। पहले बलिप्रथा थी जिसपर लगी रोक माँ सभी भक्तों की मनोकामनाए पूर्ण करती थी तो कुछ भक्तों द्वारा सुवर बकड़ी आदि पशुओं की बलि दी जाती थी, जिसपर सन्त श्रीधर बाबा ने सन 2007 में पूर्णतः रोक लगा दी, जिसके बाद से आस्था के नाम पर पशु हत्या पर लोग लगी।

नाग का भी स्थान है मन्दिर के आस पास में नाग और विभिन्न प्रकार के सर्पो के बसेरा है, इस स्थान से लोग बाल्टी भी चुरा लेते थे। पर 2007 में यज्ञ हुई और फिर चापाकल लगी तो लोगो को लगा की चोरी हो जाएगी पर यज्ञ के बाद पीपल के वृक्ष और चापाकल पर सर्पो के बसेरा लग गया पर जब भी कोई पूजा करने या पानी पीने जाता तो सर्प हट जाती ख्याति दूर दूर तक फैली लोग देखने आने लगे । लेकिन अब तक किसी को भी सर्प ने दशा तक नही। आज भी प्रायः सर्प देखने को मिलती है। एक भक्त ने ही मन्दिर को बनवाया भव्य पचपतरा माता के दरबार से कोई खाली हाथ नही जाता,मन्नत पूरी होने पर पिरौना निवासी व् पंचायत सचिव रविन्द्र कुमार सिंह उर्फ रवि सिंह द्वारा मन्दिर को भव्य निर्माण करा, भव्य माँ दुर्गा , माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश , हनुमानजी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई,जिसके बाद मन्दिर के महत्तम और बढ़ गई।

04-Oct-2019 08:17

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