14-Jun-2018 05:09

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स्थानीय बुजुर्गों ने तो वहाँ के वृक्षों के बारे मे कहा कि इन वृक्षों का संवंध समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है

अलावलपुर का निरोगधाम ।पटना से 11 किमी दूर पुनपुन नदी के तट पर स्थित इस जगह की चर्चा जव विहार और झारखंड के तटीय इलाकों मे जोर पकड़ी तो हमारे प्रतिनिधि ने निरोगधाम जाकर वहाँ की विशेषता इतिहास तथा और खूबियो के बारे मे पता लगाया जिसमें निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते है निरोगधाम वास्तविक रूप से अलौकिक जगह है। हमारे प्रतिनिधि के अनुसार निरोगधाम मे मंदिरों मे वृक्ष के रूप मे ही सभी देवी देवताओं की स्थापना की गयी है। स्थानीय बुजुर्गों ने तो वहाँ के वृक्षों के बारे मे कहा कि इन वृक्षों का संवंध समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है।यहाँ पीपल शम्मी खैर पलास जैसे औषौधियो पौधों से बुखार मधुमेह हृदयरोग जैसे असाध्य रोगों का भी इलाज किया जाता है।पूर्व की मान्यताओं के हिसाब से यहां के भभूत से पशु पालक अपने पशुओं का इलाज किया करते थे तब से इस जगह का नाम निरोगधाम प्रचलन मे आया। हमारे प्रतिनिधि ने जब इसके इतिहास के बारे मे पता लगाया तो जानकारी मिली की 400 वर्ष पूर्व राजस्थान के सूरजचंद तथा भावचंद नामक दो भाइयों ने पाटलिपुत्र के पुनपुन नदी के तट पर अपना ब सेरा डाला।रात के स्वप्न मे एक बूढ़े बाबा ने वहाँ रहकर उनकी सेवा करने की बात कही जिससे प्रभावित होकर दोनो भाई मिट्टी का पिंडी बनाकर वहाँ लोगों की सेवा करने लगा।उन दोनो के सेवा भाव से प्रभावित होकर स्थानीय नबाब ने 2200 बीघा जमीन दान मे दी थी।

निरोगधाम की ख्याति फैलने के साथ ही सरकारी प्रयासों से इस जगह को सड़क एवं अन्य सुविधाओं से जोड़ा गया। इस जगह के विकास एवं इस स्तर पर इसके ख्याति के लिए ब्रह्म बाबा सेवा एवं शोध संस्थान के संस्थापक सह संयोजक संजय कुमार सिंह तथा अन्य लोगों का श्रेय जाता है।

जिनके प्रयासो से ब्रह्मज्योति पत्रिका, ब्रह्मचालीसा जैसे साहित्यिक संसाधनों से निरोगधाम की ख्याति का महिमा मंडन किया जा रहा है। आने वाले समय मे कोई आश्चर्य की बात नही कि निरोगधाम देश स्तर पर सनातन संस्कृति का एक केंद्र बन जाय।

संपर्क करने पर हमारे प्रतिनिधि को संजय कुमार सिंह ने बताया कि समाज मे रहकर समाज और राष्ट्र के सुसंचालन तथा उत्थान के लिए सभी वर्ग के संस्कारी युवाओं को अपने रचनात्मक प्रयास करनी चाहिए ।

14-Jun-2018 05:09

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