22-Nov-2019 08:45

चातुर्मास पश्चात भी रहे धर्म की रमणीयता : आचार्यश्री महाश्रमण

धर्मशासन के प्रति निष्ठावान बने रहे, मंगलवार को होगा शांतिदूत का मंगलविहार, 11-11-2019 रविवार , कुम्बलगोडु, बेंगलुरु, कर्नाटक।

आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना केंद्र परिसर में स्थित महाश्रमण समवसरण में चातुर्मासकालीन अंतिम रविवारिय प्रवचन में हजारों लोगों की उपस्थिति मानों यह दर्शा रही थी कि अपने आराध्य का सभी अधिक से अधिक सान्निध्य पाने को उत्सुक हो और गुरुदेव का और अधिक प्रवास बेंगलुरु में चाहते है। अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी का दक्षिण भारत की धरा पर द्वितीय चातुर्मास बेंगलुरु में परीसंपन्नता की और है। मंगलवार को प्रातः तुलसी चेतना केंद्र से शांतिदूत महाश्रमण अपनी धवल सेना के साथ मंगल प्रस्थान करेंगे।

आज की सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि जीवन में हमें मिथ्या आग्रह को पकड़ कर नहीं रखना चाहिए। सम्यक्त्व की प्राप्ति होने पर पूर्व सिद्धांत को छोड़कर सही सिद्धांत को अपना लेना चाहिए। आचार्यवर ने राजा प्रदेशी के आख्यान का समापन करते हुए कहा कि वन में जब हरियाली होती है तो वह अच्छा लगता है परंतु जब पतझड़ जाता है तो वह सुखा अच्छा नहीं लगता है, उसी प्रकार नाट्यशाला में नाटक के समय वाद्य यंत्र बजते हैं परंतु नाटक के समाप्त होने के पश्चात सूना हो जाता है आचार्य श्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि जब तक साधु संत यह विराजते हैं तो त्याग, तपस्या, स्वाध्याय का ठाठ लगा हुआ रहता है परंतु साधु संतों के जाने के बाद सामान्यतया धार्मिकता की बातें कम हो जाती है। यह ध्यान रखना है कि अगर साधु संत चले भी जाएं तो उनकी वाणी को सदैव जीवन में उतारे रखना चाहिए और धार्मिकता को प्रवर्धमान रखना चाहिए। बेंगलुरु चतुर्मास के विषय में फरमाते हुए कहा कि 1 दिन बाद हमारा विहार है स्थान भले ही अरमणीय हो जाए परंतु सभी में त्याग, तपस्या स्वाध्याय की भावना निरंतर बनी रहनी चाहिए। जीवन में अध्यात्म की रमणीयता बनी रहे।

चतुर्दर्शी के अवसर पर गुरुदेव ने हाजरी का वाचन करते हुए सभी को संघ एवं आचार्य के प्रति विनायवान रहने की प्रेरणा प्रदान की। इस अवसर पर मुनिश्री धर्मरुचि ने विचार व्यक्त किये। मुनि कीर्तिकुमारजी ने आगामी विहार की जानकारी दी।

मंगलवार को शांतिदूत का मंगल विहार - तेरापंथ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण सकल धर्म के साथ दिनांक 13 नवंबर 2019 को कुम्बलगोडु स्थित आचार्य श्री महाप्रज्ञ तुलसी चेतना केंद्र में अपना चातुर्मास सम्पन कर हुबली की ओर प्रस्थान करेंगे। सुबह 08 बजकर 21 मिनिट पर चेतना केंद्र से आचार्य श्री का बिरदी के लिए विहार होगा। इस दिन का प्रवास ज्ञान विकास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में होगा। 16 नवंबर को मंड्या, 20 नवंबर को मैसूर, 23 नवंबर को श्रमण बेलगोला में संभावित प्रवास रहेगा। कल 12 नवंबर को प्रातःकालीन कार्यक्रम में मंगलभावना समारोह का भी आयोजन होगा।

22-Nov-2019 08:45

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