20-Jan-2020 09:13

♣ तीन लोक का परीचय ♣

स्थूललोक (साकारी दुनियाँ ) यह लोक पांच तत्त्वों से बना है ,स्थूल धरा पर विविध रंगों की दुनियाँ है ,स्थूल वस्तुओं,की साकारी दुनियाँ है आत्मायें परमधाम से आकर इस स्थूल धरा पर स्थूल शरीर धारण करती है और जीवात्मा कहलाती है

1⃣ ब्रह्मलोक ( निराकारी दुनियाँ ) परलोक, परमधाम, मूलवतन, शांतिधाम, निर्वाणधाम, परमात्मा-आत्माओं की दुनियाँ :- जैसे इसके कई नाम है यह लोक सबसे ऊपर है यह सुनहरे लाल रंग का है ना यहाँ शरीर है ,ना कोई जन्म है ना कोई मृत्यु , ना कोई स्थूल वस्तु ,ना कोई आवाज है ,ना कोई संकल्प ( सोच-विचार ),ना कोई कर्म,ना कोई दुःख है ना कोई सुख की अनुभूति है यह लोक इस स्थूल धरा से ऊपर प्रकति के पाँच तत्वों से भी पार आकाश तत्व से भी पार सूर्य-चाँद से भी ऊपर तारामंडल से भी ऊपर (सबसे ऊपर ) यह है लाल प्रकाश की दुनियाँ यह है ही परमात्मा व सभी आत्माओं की दुनियाँ परमात्मा परमधाम निवासी है

शिव भगवानुवाच – “हे वत्सो ! मैं इस जगत में व्यापक नहीं ,मैं तो इस मनुष्य-सृष्टि रूपी वृक्ष का बीज रूप सूर्य ,चाँद और सितारों से भी पार परमधाम का वासी हूँ मैं कलियुग के अंत और सतयुग के आदि अथार्त कल्याणकारी पुरुषोत्तम संगमयुग पर सर्व को मुक्ति तथा जीवनमुक्ति का वरदान देने के लिए अवतरित होता हूँ ” इस सुनहरे लाल प्रकाश की दुनियाँ में सबसे ऊपर है परमात्मा जो ज्योतिर्बिंदु रूप में स्थित है जो आत्माओं के झाड़ का बीज है उसके नीचे आत्माओं का झाड़ है जो उल्टा है यानि परमात्मा स्टार के ठीक नीचे वृक्ष रूपी आत्माओं के झाड़ रूपी उल्टा प्रतीत होता है उस झाड़ में सबसे ऊपर आत्मा झाड़ रूपी वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा-सरस्वती की आत्मायें है और फिर जड़ व तने दिखाई देने वाले जगह पर अन्य ब्राह्मण आत्मायें है जो आत्मा सबसे लाईट होती है वो उस अनुसार ऊपर रहती है फिर नम्बरवार लाईट आत्मा अनुसार आत्मा अपने सेक्शन में स्थित रहती है परमात्मा शिव संगम पर इस स्थूल धरा पर आते है और हम पतितो को पावन बनाकर वापस परमधाम ले जाते है परमधाम आकर आत्मायें अपने-अपने सेक्शन में अपने नम्बर अनुसार फिक्स होती है वहाँ फिर हिलती-डुलती नहीं है एक नियम के अनुसार :- संगमयुग पर पुरुषार्थ कर सम्पुरण पवित्र,सतोप्रधान,परमात्मा शिव समान बनने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करती है वो आत्मा इस अनुसार परमात्मा के निकट रहती है अथार्त आत्मा जितनी-जितनी लाईट होती जायेगी उतना-उतना उस आत्मा का सेक्शन परमात्मा के निकट अथवा दूर का सेक्शन निर्धारण होता है एक नियम अनुसार :-जो आत्मा जितनी लाईट होगी उतना पहले सतोप्रधान दुनियाँ सतयुगी दुनियाँ में पहले-पहले इस धरती पर आयेंगे फिर त्रेता वाली आत्मायें नीचे आकर अपना पार्ट स्थूल धरा पर बजाना शुरू कर देती है फिर अन्य-अन्य धर्म की आत्मायें अपने-अपने समय पर उस सेक्शन से निकल कर इस धरा पर आती है अपना पार्ट बजाना शुरू करती है कलयुग के अंत में एक-एक कर सभी आत्मायें परमधाम से इस स्थूल धरा पर आ जाती है तब इस धरा पर विनाश लीला शुरू हो जाती है फिर सभी आत्मायें झुण्ड समान वापस परमधाम जाना शुरू कर देती है यानि परमधाम कभी भी एक दम खाली नहीं होता है

2⃣ सूक्ष्मलोक (आकारी दुनियाँ ) यह लोक एकदम सफेद रंग की है यह सूक्ष्मलोक भी इस स्थूल लोक से ऊपर ,प्रकति के पाँच तत्वों से भी पार आकाश से भी पार सूर्य-चाँद से भी ऊपर ,तारामंडल से भी ऊपर किन्तु सबसे ऊपर की निराकारी से ठीक नीचे यह लोक है यह लोक वास्तव में ब्रह्मा-विष्णु-शंकर पुरियाँ कहलाती है क्योकि इन तीनों आकारी देवताओं का वास माना जाता है इसलिये यह आकारी लोक कहलाता है यह देह की नहीं बल्कि फरिश्तों का वतन है

3⃣ स्थूललोक (साकारी दुनियाँ ) यह लोक पांच तत्त्वों से बना है ,स्थूल धरा पर विविध रंगों की दुनियाँ है ,स्थूल वस्तुओं,की साकारी दुनियाँ है आत्मायें परमधाम से आकर इस स्थूल धरा पर स्थूल शरीर धारण करती है और जीवात्मा कहलाती है इस स्थूल धरा पर स्थूल कर्म करती है इसी स्थूल धरा पर पाप कर्म कर पापात्मा कहलाती है और पुण्य कर्म कर पुण्यात्मा कहलाती है मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार यही सुख-दुःख भोगता है अपने इस साकारी स्थूल शरीर के माध्यम से यहीं भक्ति मार्ग है तो यहीं ज्ञान मार्ग भी है यही सृष्टि रूपी ड्रामा का रंगमंच है ,यही सभी खेलपाल होते है ,यही कर्मभूमि है इसी साकारी लोक में ही सृष्टि का पाँच हजार वर्ष का अनादि बना बनाया ड्रामा रिपीट होता है यानि सतयुग-त्रेता जैसे स्वर्ग ( नई दुनियाँ ) का युग भी इसी स्थूल धरा पर होते है तो द्वापर-कलयुग जैसे नर्क तुल्य दुखों ( पुरानी दुनियाँ ) का युग भी यही होते है तथा पांचवां गुप्त संगमयुग का काल भी इसी धरा पर आता है और परमात्मा भी इसी संगमयुग पर आकर दिव्य अवतरण ब्रह्मा बाबा का स्थूल तन लोन लेकर इस पुरानी तमोप्रधान दुनियाँ को नई सतोप्रधान दुनियाँ बनाने का,पतित मनुष्यों को पावन बनाने का ,कौड़ी तुल्य मनुष्य से हीरे तुल्य देवता बनाने का,कार्य करते है इसी स्थूल धरा पर आकर करते है

20-Jan-2020 09:13

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