26-Nov-2019 05:53

नौ दिवसीय "राम कथा" का समापन - अर्जुन भारतीय.

नौ दिनों की "राम कथा" में कैकई का चरित्र, जो आमजन में खलनायक के रूप में विराजमान है, राजन जी की "रामकथा" में, वह चरित्र पूर्व प्रायोजित साहसिक,उत्तम एवं ईश्वरीय है।

बंधु बरवा गांव में श्री पुरुषोत्तम सिंह के सौजन्य से आयोजित नौ दिवसीय "रामकथा" का आज समापन हो गया। राम कथा सुनाने अयोध्या से आए प्रसिद्ध राम कथा वाचक परम पूज्य श्री राजन जी महाराज ने 9 दिनों तक बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को राम रस में डूबोए रखा। परम पूज्य राजन जी महाराज के मुखारविंदसे निकली रामरसधार में श्रोता डूब -डूब कर नहाते रहे। मन भरके। परम पूज्य राजनजीके मुखारविंद से "रामकथा" के निकले एक एक शब्द श्रोताओंके मन -मंदिर में रस- बस गए हैं। चतुर्दिक चर्चा रामकथा की भी और कथा सुनाने वाले परम पूज्य राजन जी महाराज की भी। रामकथा की पूर्णसमाप्ति के उपरांत गांव-इलाके में खामोशी छा गई है। राम कथा तथा कथावाचक परम पूज्य राजन जी महाराज की विदाई के कारण। वैसी ही गहरी खामोशी- उदासी छा गई है ,जैसी बेटी की विदाई के बाद घर में छा जाती है। उदासी हममें भी है और आयोजक श्री पुरुषोत्तम सिंह के भीतर भी। पूरे घर-परिवार, गांव -इलाके में।

नौ दिनों की "राम कथा" में कैकई का चरित्र, जो आमजन में खलनायक के रूप में विराजमान है, राजन जी की "रामकथा" में, वह चरित्र पूर्व प्रायोजित साहसिक,उत्तम एवं ईश्वरीय है। कुर्बानी देने जैसी-तभी तो कैकई इतना बड़ा जोखिम उठाती हैं और, राजा दशरथ से बेटे भरत की राजगद्दी तथा राम का बनवास मांगती हैं। अनजाने में नहीं,जानबूझकर। इसमें श्रीराम के लिए असुरों के वध और श्राप के कष्ट झेल रहे लोगों के उद्धार करने के साथ श्रीभरतकी भाई के साथ प्रेम और पिता के आदेश के प्रति समर्पण की परीक्षा लेने के भाव छिपे हुए हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कैकई की भूमिका नी'व की ई'ट की है, जिसके ऊपर एक विराट एवं भव्य "राममहल" का निर्माण हुआ है। श्री भरत अपनी परीक्षा में बेहद अव्वल आते हैं। उनके अंदर बड़े भैया श्री राम के प्रति प्रगाढ़ प्रेम एवं समर्पण अद्वितीय है। पूज्य पिता राजा श्री दशरथ के प्रति भी, राम-भरत मिलाप में इसकी पराकाष्ठा देखी जा सकती है।

जितना प्रेम श्री राम का भरत के प्रति अद्वितीय है ,उससे तनिक भी कम भरत के मन में श्री राम के प्रति नहीं है। श्री राम के निर्मल मन में तो माता-पिता हो' या भाई, गुरुजनों अथवा श्रेष्ठजनों सबकेप्रति आदर एवं प्रेम भाव कूट कूट कर भरे हैं। अपने भक्तों के प्रति तो राम और ज्यादा प्रेमभाव में नजर आते हैं। यूं ,कहा जाए तो श्री राम प्रेम के भूखे हैं। भक्तों के प्रति उनका प्रेम प्रगाढ़ है, उस प्रेम सागर में मस्त होकर भक्त स्नान करते दिखते हैं। परम पूज्य पिता एवं अयोध्या के चक्रवर्ती राजा बेटे श्री राम के प्रेम में प्राण की आहुति देते हैं। और, भाई भरत राम की खड़ाऊ' प्रतीक के तौर पर रखकर राम के प्रति प्रगाढप्रेम एवं निष्ठा का परिचय देते दिखते हैं। "हरि अनंत हरि कथा अनंता" की तरह रामकथा का स्वरूप है। श्री राजन जी महाराज "रामकथा" में इन सभी प्रसंगों को "सोने में सुगंध" के स्वरूप प्रस्तुत करते हैं। उनकी गरिमामई प्रस्तुति से श्रोता आनंदित एवं भाव विभोर बनते हैं। राजन जी महाराज के श्री मुख से 9 दिनों तक यह धारा प्रवाहित होती रही है। तभी तो उनके जाने के बाद रामरसधारा सुखी- सुखी प्रतीत हो रही है।

परम पूज्य राजन जी महाराज की "राम कथा" का प्रभाव बेहद गहरा व असरदार है। संप्रति श्रोता आज से ही फिर से "राम कथा" सुनने के लिए परम पूज्य श्री राजन जी महाराज के आगमन की प्रतीक्षा में पलक पावडे बिछाए रखेंगे। बड़ी उम्मीद के साथ, आकुल- व्याकुल निगाहों से कब आएंगे महाराज ? जब श्री राम चाहेंगे। जय श्री राम ! जय परम पूज्य राजनजी महाराज !!

26-Nov-2019 05:53

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