16-Nov-2019 07:35

बस्ती का नाम वशिष्ठ नगर कर पांचवें उपधाम मखौडाधाम के रूप में हो विकास

प्रभू श्रीराम के जन्म शिक्षा से लेकर मंदिर निर्माण के फैसले में गुरुवशिष्ठ की धरती का रहा योगदान-चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी

गुरु वशिष्ठ की धरती को जाता है मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभू श्रीरामचन्द्रजी के मंदिर निर्माण का श्रेय जो कि हम सबके लिए गौरव का विषय है।ये बातें आज समाज सेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ने हर्रैया में जानकारी देते हुए कहा कि जिस तरह हम गर्व से कहते हैं कि प्रभू श्रीराम के कुल गुरु वशिष्ठ हमारे जिले के थे व मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम भरत लक्ष्मण शत्रुहन के प्राकट्य का श्रेय इस जनपद के पवित्र मखभूमि मखौडा व यहीं के निवासी श्रंगीऋषि को जाता है। ठीक उसी प्रकार सुप्रिमकोर्ट के फैसले का आधार बना बाल्मीकि रामायण व पुरातत्व विभाग में कार्यरत जनपद के ही मूल निवासी डा.राकेश तिवारी व बुद्धरश्मि मणि त्रिपाठी की रिपोर्ट जो कि खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर तैयार रिपोर्ट जनपद के अगौना गांव के मूल निवासी डा.मणि ने 50वैग्यानिको की टीम के साथ खुदाई में मिले भग्नावशेषों की सही उम्र कार्बन डेटिंग पद्धति से निकालकर कोर्ट को बताया था जबकि अवशेषों का एकत्रीकरण कर रिपोर्ट पुरातत्व विभाग के महानिदेशक बस्ती शहर के ही मझरिया विक्रम के मूल निवासी रहे डा.राकेश तिवारी के निर्देशन में तैयार हुआ

अयोध्या में विवादित स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की खुदाई से पहले उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग ने 1990 से 1992 के बीच अपने सर्वेक्षण में यह तथ्य खोज निकाले थे कि बाबरी मस्जिद विवादित स्थल पर मंदिर के अवशेष पर बनाई गई थी। यही तथ्य उच्चतम न्यायालय में अहम आधार साबित हुआ। उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक डॉ. राकेश तिवारी की मानें तो अयोध्या में विवादित स्थल पर वर्ष 1528 में मीर बाकी द्वारा बनाई गई बाबरी मस्जिद के निर्माण में टूटे हुए मंदिर के अवशेष लगाए गए थे।अयोध्या फैसले में ASI रिपोर्ट का सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार जिक्र किया।

श्री तिवारी ने राज्य का पुरातत्व निदेशक रहते हुए 1990 में उच्च न्यायालय के आदेश पर विवादित ढांचे के भीतर और बाहर के हिस्सों का दस्तावेज तैयार किया था। इस दस्तावेज में उन्होंने हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करवाकर वहां मिले चिन्हों, अवशेषों की एक सूची बनाई थी। इसमें करीब 100 रंगीन और श्वेत-श्याम फोटोग्राफ शामिल थे।मस्जिद के नीचे इस्लामिक ढांचा नहीं मिला,जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अपना आदेश।श्री तिवारी 1989 से 2013 तक उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग में कार्यरत रहे बाद में वहां के निदेशक भी रहे। वर्ष 2013 में इस पद से रिटायर होने के बाद वह 2014 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक बने और इस पद पर उन्होंने 2017 तक कार्य किया। डॉ. तिवारी ने समाजसेवी श्री पाण्डेय से फोन पर बातचीत में बताया कि विवादित ढांचे के भीतर पत्थर के करीब 14 खम्भे थे। इन खम्भों पर योगासन की मुद्रा में खंडित मूर्ति, कलश व मंदिर के अन्य अवशेष लगे हुए थे। यह पूरी सामग्री उन्होंने तत्कालीन प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय को सौंपी थी।

इसके बाद 1990 से 1992 के दौरान (विवादित ढांचे के विध्वसं से पूर्व) डॉ. राकेश तिवारी ने तत्कालीन प्रदेश सरकार के निर्देश पर विवादित स्थल के आसपास करवाए जा रहे समतलीकरण के कार्यों को दस्तावेज़ के रूप में बनाया था पुरातत्व विभाग की टीम को प्रदेश सरकार ने वहां जाकर दस्तावेजीकरण के आदेश दिए थे। डॉ. तिवारी बताया कि दस्तावेज तैयार करने के दरम्यान वहां विवादित स्थल के आसपास समतलीकरण के दौरान की गई खुदाई में शिव की त्रिशूल वाली मूर्ति मिली, नागा शैली के मंदिर के अवशेष मिले। इनमें आमलक मुख्य था जो मंदिर के शिखर पर लगाया जाता है और आंवले के आकार का होता है। 6 दिसम्बर 1992 को जब विवादित ढांचा ढहा दिया गया तो कारसेवक उसका मलबा उठाकर रामकथा कुंज ले गए थे।गुरु नानक देव की अयोध्या यात्रा भी इस बात का सुबूत है कि विवादित स्थल ही राम जन्मस्थान है SC के फैसले में भी इस बात का जिक्र है। श्री पाण्डेय ने आज डा.राकेश तिवारी के बडे भाई राकेश तिवारी से भेंट कर उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया व मांग किया कि प्राकट्य से लेकर मंदिर निर्माण के फैसले तक गुरुवशिष्ठ की पावन भूमि व यहां के तपस्वियों व प्रबुद्धजनों के योगदान के मध्येनजर जनपद का नाम वशिष्ठ नगर या मखौडाधाम रखते हुए अयोध्या के तर्ज पर इसका विकास करते हुए पांचवें उपधाम के नाम से विकसित किया जाय श्री पाण्डेय पूर्व में भी मंदिर निर्माण हेतु मखभूमि मखौडा आमरण अनशन के दौरान से ही ये मांग करते चले आ रहे हैं उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम इसके लिए व्यापक अभियान भी चलायेंगे इस मौके पर अभयदेव शुक्ल आलोक मिश्र अमरनाथ शुक्ल, रामधीरज चौधरी,चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी, सुनील पाण्डेय भी मौजूद रहे

16-Nov-2019 07:35

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