22-Nov-2019 08:39

बेंगलोरवासी धर्म-ध्यान में बढ़े निरंतर आगे : आचार्यश्री महाश्रमण

शांतिदूत का मंगल भावना समारोह आयोजित, बेंगलोर पुलिस कमिश्नर पहुंचे पूज्यवर के दर्शनार्थ, 12-11-2019 मंगलवार , कुम्बलगोडु, बेंगलुरु, कर्नाटक।

आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना केन्द्र के महाश्रमण समवसरण में आज अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का मंगल भावना समारोह आयोजित हुआ। धर्म सभा को मंगल देशना देते हुए आचार्यवर ने कहा कि दुनिया में आभूषणों का महत्व होता है। आभूषण को शरीर पर धारण करने से शरीर की शोभा बढ़ती है, परंतु बाहरी आभूषण भारभूत होते हैं इनसे शरीर भले ही शोभायमान हो जाए परंतु आत्मा पवित्र नहीं हो सकती है। पवित्रता और शोभा के लिए आचार्यवर ने फरमाते हुए कहा कि हाथ का आभूषण दान और सेवा होता है। सुपात्र व्यक्ति को दान और रुग्ण की सेवा करना हाथ का आभूषण होता है व गुरु के चरणों में वंदन करना सिर का आभूषण होता है। मुंह का आभूषण उससे निकलने वाले सत्य वचन एवं कान का आभूषण शास्त्र वाणी का श्रवण और श्रुत ज्ञान की बात सुनना होता है। व्यक्ति आत्मा को पवित्र बनाने का प्रयास करें।

बैंगलोर चातुर्मास की संपन्नता के अवसर पर गुरुदेव ने कहा कि मिगसर बदी एकम को मुहूर्त का विचार किए बिना साधु को विहार कर देना चाहिए। साधु निरंतर भ्रमण करता रहे इससे उसे मोह नहीं रहता है। आचार्यवर ने भिक्षु धाम एवं आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केंद्र को तेरापंथ धर्मसंघ के विशेष संस्थान बताते हुए कहा कि इन दोनों जगह पर धार्मिक गतिविधियां निरंतर चलती रहे, इसकी व्यवस्था समाज को करनी चाहिए। बेंगलुरु के चातुर्मास के विषय में फरमाते वे कहा कि इस चातुर्मास ने धर्म-ध्यान, त्याग, तपस्या बहुत अच्छे तरीके से हुए हैं और सबने निरंतर धर्माराधना का लाभ लिया है। बेंगलुरु के समाज को निष्ठावान बताते हुए कहा कि चातुर्मास संपन्न होने के बाद भी धर्म-ध्यान, स्वाध्याय में निरंतरता रखने की प्रेरणा दी और सभी को धार्मिक संस्कार संजोकर जीवन में आगे बढ़ने की अभिप्रेरणा दी।

साध्वीवर्या सम्बुद्धयशा ने वक्तव्य में कहा कि जो समय को सफल करना चाहता है उसे धर्म ध्यान निरंतर करना चाहिए। समय लौटकर कभी नहीं आता है। आचार्यप्रवर के दर्शनार्थ पहुंचे बेंगलुरू पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज समाज को भगवान महावीर के सिद्धांतों की विशेष जरूरत महसूस हो रही है। समाज में अगर वैमनस्य नहीं हो तो सभी समस्याएं हल हो सकती है।

चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति से मंगल भावना के क्रम में प्रवास समिति अध्यक्ष श्री मूलचंद नाहर, महामंत्री श्री दीपचंद नाहर, चेतना केन्द्र अध्यक्ष श्री सोहनलाल मांडोत,श्री प्रकाश लोढ़ा, श्री विमल कटारिया, श्रीचंद दूगड़, श्रीकमलेश झाबक, श्रीराकेश दूधोड़िया, श्रीसूरपत चौरड़िया आदि लोगों ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। मनीष पगारिया द्वारा गीत प्रस्तुत किया गया। साध्वी राजुलप्रभा जी साध्वी आस्थाश्रीजी, साध्वी कीर्तिलताजी आदि द्वारा भी अपनी भावनाएं आचार्य प्रवर के समक्ष प्रस्तुत की गई। कल 13 नवंबर को प्रातः 08 बजकर 21 मिनिट पर शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी धवल सेना के साथ बिरदी के लिए विहार करेंगे।

22-Nov-2019 08:39

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