07-Dec-2019 07:03

मिथ्या दोषारोपण से बचे : आचार्य महाश्रमण

शांतिदूत ने प्रातः 8 और शाम को 5.5 कि.मी. का विहार किया, बेलूर जैन समाज ने किया आचार्यवर का स्वागत, 06-12-2019, शुक्रवार, बेलूर, हासन, कर्नाटक

तीर्थंकर के प्रतिनिधि जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के 11वें अधिशास्ता परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज प्रातः अपनी धवल सेना के साथ इबिडु स्थित श्री नंगुनदेश्वरा स्कूल से मंगल विहार किया। लगभग 8 किलोमीटर विहार करके बेलूर के गवर्नमेंट हाई स्कूल में पधारे। जैन शासन प्रभावक आचार्यश्री के पधारने पर बेलूर के सकल जैन समाज ने स्वागत अभिनंदन किया।

यहां धर्म सभा में धर्म प्रेमी श्रद्धालुओं को उद्बोधन प्रदान करते हुए शांतिदूत श्री महाश्रमण जी ने कहा कि आदमी के जीवन में सच्चाई, ईमानदारी, प्रमाणिकता के प्रति रुझान रहना चाहिए। व्यक्ति को किसी के प्रति जूठा आरोप नहीं लगाना चाहिए। सच्चा दोष भी दुर्भावनापूर्वक नहीं बताना चाहिए। 18 पापों में अभ्याख्यान एक पाप है। आदमी के मन में जब द्वेष की अग्नि भभक्ति है तो मिथ्या आरोपन करता है।

गुरुदेव ने एक कथा के माध्यम से प्रेरणा देते हुए फरमाया कि जो व्यक्ति मिथ्या आरोप लगाता है, उसके घोर कर्मों का बंध होता है। कर्म उदय होने पर फिर उसे कटु परिणाम भोगने पड़ते है। व्यक्ति सत्य की राह पर चले, जीवन में कभी किसी पर जूठा आरोप नहीं लगाए।

आचार्यवर के बेलूर पदार्पण पर श्री जैन संभावनाथ संघ के केवलचंद जी आदि वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। जैन महिला मंडल, कन्या मंडल ने गीतिका द्वारा महातपस्वी की अभिवंदना की। सायंकाल लगभग 5.5 का विहार करके पूज्यप्रवर बेलूर के प्लांटर्स क्लब हाउस पधारे। आगामी 8, 9 दिसम्बर को आचार्य श्री महाश्रमणजी का चिकमंगलूर में प्रवास रहेगा।

07-Dec-2019 07:03

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