23-Oct-2019 09:19

विवेक से होता है सही और गलत का बोध : आचार्यश्री महाश्रमण

शांतिदूत ने प्रदान की वाणी संयम की प्रेरणा, कल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला प्रदान करेंगे अणुव्रत पुरस्कार, 22-10-2019 मंगलवार , कुम्बलगोडु, बेंगलुरु, कर्नाटक।

तेरापंथ धर्मसंघ के 11 वें अधिशास्ता-शांतिदूत-अहिंसा यात्रा के प्रणेता-महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने मंगल प्रवचन में फरमाया कि जब तक आदमी अंतर्मुखी नहीं बनता है तब तक वह बाह्य आसक्तिपूर्ण प्रवृत्तियों को नहीं छोड़ सकता है। आसक्ति को नहीं छोड़ने के कारण उसे आत्मीय आनंद का अंश नहीं मिल पाता है। व्यक्ति इंद्रियों के माध्यम से बाह्य जगत से जुड़ा हुआ रहता है और सांसारिक कार्यों को संपन्न करता है। व्यक्ति को अपने जीवन में आवश्यक और अनावश्यक का विवेक रखना चाहिए। इसके माध्यम से साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है। हर व्यक्ति को यह प्रयास करना चाहिए कि वह अनावश्यक क्रियाओं से बचे। चाहे अनावश्यक रूप से बोलना, सुनना या खाना कुछ भी हो इससे बचने का प्रयास करना चाहिए। जब आसक्ति की भावना बढ़ जाती है तो वह अनावश्यक कार्यों में आगे बढ़ जाता है।

कई बार इससे गलत परिणाम भी देखने को मिलते हैं। आचार्य प्रवर ने फरमाते हुए कहा कि मौन की साधना अच्छी साधना होती है परंतु व्यक्ति को यह विवेक भी रखना चाहिए कि वह अपने मुंह से कटु बात, झूठ और फालतू बात ना बोले। इन बातों को ध्यान रखने से जीवन में अनेक समस्याएं हल हो सकती है और वाणी का संयम भी प्राप्त होता है। आचार्य प्रवर ने आगे फरमाते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्यों को पथ दर्शन करने वाले होते हैं उनके निर्देशों पर चले तो व्यक्ति विषयानंद से दूर हटकर सहजानंद की ओर बढ़ सकता है। सहजानंद प्राप्त करने के लिए अंतर्मुखी बनने की अपेक्षा रहती है जो व्यक्ति अंतर्मुखी न होकर बहिर्मुखी होते हैं उनमें विवेक की भी कमी होती है।

विवेक व्यक्ति को जीवन में सही और गलत का बोध कराता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति गलत मार्ग पर आगे बढ़ जाता है। गुरु शिष्यों के बाहर की आंख नहीं बल्कि भीतर के चक्षु खोलने वाले होते हैं जिससे उनकी प्रज्ञा अंतर्मुखी बने। भीतर की आंख खुलने पर व्यक्ति सतपथगामी बन जाता है अणुव्रत व्यक्ति को उत्पथगामी पथ से बचाने वाला सतपथ की ओर ले जाने वाला होता है। प्रवचन में मुंबई जैन संघ के अध्यक्ष नितिन सोनावाल, पाटण विश्वविद्यालय के कुलपति श्री बाबूलाल प्रजापति, श्री भंवरलाल जीरावला, महासभा पूर्व अध्यक्ष श्री हीरालाल मालू, अणुव्रत समिति बैंगलोर अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल चिप्पङ ने गुरु चरणों में अपनी भावनाएं प्रस्तुत की।

अणुव्रत समिति द्वारा पुरस्कारों की घोषणा करते हुए अणुव्रत पुरस्कार वर्ष 2018 के लिए प्रसिद्ध अहिंसा विद श्री प्रकाश आमटे को ,अणुव्रत गौरव सम्मान वर्ष 2018 के लिए स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख अणुव्रती डॉक्टर B.N.पांडेय दिल्ली को , वर्ष 2019 के लिए प्रमुख अणुव्रती कार्यकर्ता और नेतृत्वकर्ता श्री धनराज जी बैद, दिल्ली को तथा अणुव्रत लेखक पुरस्कार वर्ष 2018 के लिए प्रसिद्ध नैतिक और संविधान पर लेखन डॉक्टर धर्मचंद चंद जैन (भीलवाड़ा ) वर्ष 2019 के लिए अणुव्रत के सिद्धांतों पर काव्य लेखन करने वाली डॉ पुष्पा सिंघी को प्रदान किए जाएंगे। अणुव्रत समिति के तृतीय दिन इन पुरस्कारों को आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा प्रदान किया जाएगा। मंच संचालन मुनि श्री सुधाकर कुमार जी ने किया।

23-Oct-2019 09:19

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