27-Dec-2019 02:07

शांत सरोबर रूपी हृदय

बुद्ध बोला– पहले मेरे तीन सवालों की जवाफ दो, फिर आगे देखते है कि नगर सेठ की बात सुनना है या नही !!

एक बार बुद्ध एक नगर के बाजार से गुजर रहा था ।। तभी एक ब्यक्ति आया और बुद्ध को बन्दन करते हुए बोला– भगवन यहां का नगर सेठ आप की निंदा करते हुए आप को कुछ बोल रहा था ।। अगर आज्ञा हो तो बताऊँ!!!!! बुद्ध बोला– पहले मेरे तीन सवालों की जवाफ दो, फिर आगे देखते है कि नगर सेठ की बात सुनना है या नही !!

बुद्ध ने पूछा : १. क्या तुम्हें लगता है कि नगर सेठ ने मेरे बारे में जो कहा वो सत्य है ????? तब ब्यक्ति ने कहा– "नही भगवान मुझे तो उसकी बातों पर तनिक भी भरोसा नही है ।। उसने बोला इसलिए मैं आपको बताना चाह रहा था ।।

२.....क्या तुम्हें लगता है कि जिस बात को तुम बताने जा रहे हो उसे सुनकर मुझे दुःख होगा ????? तब ब्यक्ति ने कहा– हा भगवन , उसे सुनकर दुःख हो सकता है !!!! ३.तीसरा प्रश्न फिर बुद्ध ने किया– क्या तुम्हें लगता है कि जो बात तुम मुझे बताओगे वह मेरे किसी काम की है या उससे मुझे कोई लाभ होगा !!!!??? ' ब्यक्ति ने जवाफ दिया– नही भगवान ये बात नही आपके किसी काम की है ना ही कोई लाभ ही होगा!!

तब बुद्ध ने कहा– "मेरा हृदय एक शांत सरोबर है, जिस में प्रेम, दया, करुणा के पुष्प रखता हूँ ।" जिस बात पर तुम्हें यकीन नही है ।। अर्थात जो बातें ब्यर्थ है ऐसी बातों को सुनकर मैं अपनी शांत सरोबर रूपी हृदय को क्यों मलिन करू !!! ब्यक्ति को ज्ञान मिल चुका था अर्थात किसी की भी बात को दूसरे जो सुनाए वही सही है?? यह बिचार करना चाहिए अर्थात स्वयं की बिबेक को जगाकर निंदनिय बातो से दूर रहना चाहिये ।। आत्मा सदा सुख, शांति, प्रेम, दया, करुणा की सरोबर है इसलिये आत्मा में मन - बुद्धि होने के कारण इसको झूठी बातो से बचाते रहना चाहिये ।।

27-Dec-2019 02:07

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