30-Nov-2019 10:29

सर्वश्रेष्ठ दान है अभयदान : आचार्य महाश्रमण

महातपस्वी आज लगभग 10 किमी विहार कर पधारे अक्कीहेब्बालू, किसी को भयभीत ना करने की आचार्य श्री ने दी पावन प्रेरणा, 26-11-2019, मंगलवार, अक्कीहेब्बालू, मंड्या, कर्नाटक

जनमानस के अज्ञान रूपी अंधकार को हरने वाले ज्ञानसूर्य पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ कर्नाटक राज्य में अविरल रूप से गतिमान है। शांतिदूत ने आज प्रातः होसाअग्रहरा से प्रातः मंगल प्रस्थान किया। विहार के मध्य एक स्थान पर ग्रामवासियों ने आचार्य प्रवर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। लगभग 10 किलोमीटर का विहार कर शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी अक्कीहेब्बालू स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल में पधारे।

यहां स्थित रंग रंगमंदिर ऑडिटोरियम में अमृत देशना देते हुए परम श्रद्धास्पद आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा दुनिया में अनेक दान है उनमें श्रेष्ठ है अभयदान। न डरना चाहिए और न डराना चाहिए। भयभीत व्यक्ति हिंसा में प्रवृत्त हो सकता है और डराना तो अपने आप मे हिंसा है। अहिंसा के लिए अभयदान आवश्यक है।

आचार्य ने आगे कहा कि भय एक कमजोरी होती है। तीर्थंकर अभय और अभयदाता होते है। भय को पूर्णतः जीत लेने वाला व्यक्ति पूर्ण सुखी होता है। पूर्ण अभय बनना बहुत ऊंची भूमिका की स्थति होती है। आदमी को अभय की दिशा में यथासम्भव बढ़ने का प्रयत्न करना चाहिए। अभय बनने के लिए 'णमो सिद्धाणं' , निर्भय यंत्र का जप भी किया जा सकता है।

'ॐ भिक्षु' और नमस्कार महामंत्र का जप भी इस दृष्टि से किया जा सकता है। आदमी स्वयं अभय बने और दूसरों को अभयदान दे, यह अभीष्ट है। स्कूल के प्रिंसिपल श्री चंद्रशेखर जी ने पूज्य प्रवर का अभिवादन किया। आचार्यवर ने उनको अहिंसा यात्रा के संकल्पत्रयी की प्रेरणा दी।

30-Nov-2019 10:29

धर्म मुख्य खबरें

समाचार भारत_दर्शन राजनीति खेल जुर्म शिक्षा चिकित्सा धर्म परम्परा व्यक्तित्व कला सम्मान फिल्म सामाजिक_संस्थान रोजगार कानून अर्थव्यवस्था समस्या पर्यावरण सैनिक पुलिस गांव शहर ज्योतिष सामान्य_प्रशासन जन_संपर्क छात्र_छात्रा
Copy Right 2020-2025 Ahaan News Pvt. Ltd. || Presented By : CodeLover Technology