21-Dec-2019 11:39

सुनी-सुनाई बातों पर सहज विश्वास मत करो : आचार्यश्री महाश्रमण

पर्वत जंगल बागानों में गूंजा अहिंसा यात्रा का संदेश, 19-12-2019, गुरुवार, डुम्मी, कर्नाटक

हिन्दुस्तान के 20 राज्यों और तीन प्रदेशों में 15000 से अधिक किलोमीटर की पदायात्रा के लक्ष्य से गतिमान अहिंसा यात्रा इन दिनों अपने महानायक आचार्यश्री महाश्रमणजी के नेतृत्व में सत्रहवें राज्य कर्नाटक के पर्वतों, जंगलों और बागानों में विहरण कर रही है। आचार्यश्री और उनकी धवलवाहिनी प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण इस क्षेत्र को और अधिक सौन्दर्य प्रदान किए हुए है। आचार्यश्री की प्रेरणा से अहिंसा यात्रा के तीनों संदेश सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संकल्प स्थानीय जनता अत्यन्त आदर के साथ ग्रहण कर अपने जीवन को एक नई दिशा दे रही है।

आरोह-अवरोह लिए हुए पवर्तीय पथ आज आचार्यश्री के चरणों से पावन बना तो लाखों-लाखों सघन वृक्षों के कारण जंगल का रूप लिए हुए आसपास का क्षेत्र और बागान इस चिरस्मरणीय यात्रा के साक्षी बने। आचार्यश्री के नेतृत्व में साधु-साध्वियों की धवल पंक्ति इस प्राकृतिक प्रदेश में पावन नदी की तरह शोभित हो रही थी। कई ग्रामीणों ने मार्ग में आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री लगभग साढे पन्द्रह किलोमीटर की पदयात्रा कर डुम्मी में स्थित श्री जनाना ज्योति हायर प्राइमरी स्कूल में पधारे।

यहां आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए आचार्यश्री अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आदमी के पास आंखे भी हैं और कान भी हैं। आंखों और कानों से बहुत ज्ञान हो सकता है। पांच इन्द्रियों में श्रोत्रेन्द्रिय और चक्षुरिन्द्रिय ज्ञान प्राप्ति की बहुत सक्षम साधन बनती हैं। दुनिया में दो चीजें हैं शब्द और रूप। शब्द को सुनकर और रूप को देखकर ज्ञान किया जा सकता है। देशाटन करने से ज्ञान और अनुभव बढ सकता है।

आचार्यश्री ने कहा कि सुनी हुई और देखी हुई बात में भी अन्तर हो सकता है। इसलिए सुनी-सुनाई बात पर झटपट विश्वास नहीं करना चाहिए। बात को अच्छी तरह जांच कर ही उसका विश्वास करना चाहिए। सुनकर और देखकर जानने के बाद व्यक्ति को उपादेय (ग्रहण करने योग्य) को स्वीकार और हेय (छोड़ने योग्य) छोड़ना चाहिए। व्यक्ति को अपने जीवन पर ध्यान देकर अच्छाइयों को ग्रहण करने और बुराइयों को छोड़ने को प्रयत्न करना चाहिए। आदमी को गुणग्राही बनना चाहिए। व्यक्ति गुणों से सज्जन और दुर्गुणों से दुर्जन बनता है। जीवनरूपी घट को गुणरूपी मोतियों से भरें। इसमें अवगुणरूपी कंकर न डालें। इससे यह जीवन भी अच्छा बन सकेगा और आगे की गति भी अच्छी बन सकेगी।

21-Dec-2019 11:39

धर्म मुख्य खबरें

समाचार भारत_दर्शन राजनीति खेल जुर्म शिक्षा चिकित्सा धर्म परम्परा व्यक्तित्व कला सम्मान फिल्म सामाजिक_संस्थान रोजगार कानून अर्थव्यवस्था समस्या पर्यावरण सैनिक पुलिस गांव शहर ज्योतिष सामान्य_प्रशासन जन_संपर्क छात्र_छात्रा
Copy Right 2020-2025 Ahaan News Pvt. Ltd. || Presented By : CodeLover Technology