20-Oct-2019 09:31

हिंदू नेता कमलेश तिवारी जी की हत्या से, हिंदुत्व रक्षक मर्माहत : सौरभ सागर

वही हिंदू समाज के संगठन और उसके मानने वाले आहत हैं कि हम दिनरात सोशल मिडिया पर चिल्लाते हैं, नारा लगाते हैं, मोटरसाइकिल दौड़ाते हैं, फिर भी हमारे धर्म के नेताओं कि हत्या क्यूं हो जाती हैं। हम तो उनसे जनसंख्या मे भी ज्यादा हैं, समझार भी ज्यादा हैं और धर्म क

हिंदू नेता कमलेश तिवारी जी की हत्या से, एकतरफ जहाँ हिंदुत्व के रक्षक मर्माहत हैं, तो दूसरे तरफ इस्लाम को और इसके धर्म को, अपनी जान से भी ज्यादा मानने वाले खुश हैं। इस्लाम धर्म का भारतीय मुसलमान खुश इसलिए हैं कि उसने अल्लाह के विरोधियों कि गला काटकर, इस्लाम धर्म का रक्षा किया, जिसके लिए भारतीय कानून से ज्यादा, अपने धर्म कि फिकर हैं। चाहे उसे अपने धर्म के बिच आनेवाले कोई व्यक्ति या कानून क्यूं न हो, वह उसे नही छोड़ेगा। वही हिंदू समाज के संगठन और उसके मानने वाले आहत हैं कि हम दिनरात सोशल मिडिया पर चिल्लाते हैं, नारा लगाते हैं, मोटरसाइकिल दौड़ाते हैं, फिर भी हमारे धर्म के नेताओं कि हत्या क्यूं हो जाती हैं। हम तो उनसे जनसंख्या मे भी ज्यादा हैं, समझार भी ज्यादा हैं और धर्म के नामपर चिल्लाते भी ज्यादा हैं। फिर हमलोगों के साथ ही ऐसा क्यूं होता हैं।

यह सवाल सोचना वाजिब हैं। लेकिन सच्चाई ठीक विपरीत हैं, हम हिंदू केवल अपने धर्म के प्रचारक हैं। उसे हमने न कभी समझा, न कभी माना हैं। हम धर्म के नामपर केवल उछल-कुद करते हैं, उसे मानते नही हैं। यदि हम अपने धर्म को मानते तो उस धर्म के प्रति सजग रहते और सतर्क रहते। हम हिंदू अपने धर्म से पहले इस देश के संविधान और मानवता को पहले मानते हैं। अगर हम हिंदू सही में धर्म के प्रति कट्टर होते तो ऐसी घटनाएं नहीं होती। हम भी अपने धर्म के देवी-देवताओं के उपर उपहास उड़ाने वाले कि सर कलम कर देते। मगर ऐसा नही हैं और न ही कर सकते हैं। क्योंकि यहाँ हम धर्म को बचाने और उसके लिए लड़ने के बजाय, ठेकदारी प्रथा को अपनाएं हुए हैं।

लेकिन सच यही हैं कि धर्म एक आस्था हैं, ठेकदारी नहीं हैं। जिस दिन यह बात समझ में आ जायेगा, किसी भी हिंदू धर्म के अनुयायी का हत्या, इस तरह से मुसलमान के द्वारा नहीं होगा। यहाँ हिंदुओं को केवल धर्म के विषय मे सोचना होगा, चलना होगा और लड़ना होगा, लेकिन जैसे ही अपने ही हिंदू धर्म को राजनैतिकरण और वोटीकरण किजिएगा तो परिणाम, ऐसे ही मिलेंगे। जब परिणाम ऐसे मिलेंगे तो इसमें विचलित होना, दहाड़ लगाना या मर्माहत होना बेकुफी से ज्यादा कुछ नही हैं।

तब यह धर्म के नामपर स्वांग रचना हैं। अगर सही में धर्म के लिए कोई भी सोचता हैं, बोलता हैं और करता हैं, तो उसे पहले धर्म को समझना होगा और कट्टर बनना होगा। जो जैसा तुम्हारे धर्म के बीच और धर्म को मानने वालों के साथ करेगा, उसे प्रति उत्तर देना होगा। अन्यथा........????? (यह लेखक के स्वतंत्र विचार हैं )

20-Oct-2019 09:31

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