09-Jun-2018 07:22

एक युग शिक्षा का आज अंत हो चला, सदैव गौरवपूर्ण रूप में याद किये जायेंगे शाही जी

ललितेश्वर शाही भारत की शिक्षा, राजनीति, सामाजिक, आर्थिक, परिवारिक हर क्षेत्र के परम्परा का आज शताब्दी वर्ष में अंत हो गया।

ललितेश्वर शाही या एल पी शाही एक ऐसा नाम जिनके नाम पर आज सुबह 3:30 तक वैशाली ही नहीं, बिहार ही नहीं, पूरा हिन्दुस्तान गर्व करता था। आज सुबह शताब्दी जन्मोत्सव वर्ष में उनका अंत हो गया। ललितेश्वर शाही सामाज के उस पैदान पर हमेशा रहे हैं जहाँ से हम एक परम्परा की शुरुआत ही मानते रहे हैं।

ललितेश्वर शाही अपने जीवन के स्वर्णिम काल में अपने पुत्र को खो दिया था। अपने जीवन के उस क्षण में भी अपने राज्य व राष्ट्र के लिए संभाला। अपने पुत्र हेमंत शाही के दुर्भाग्यपूर्ण हत्याकांड से लगभग टुट चुके ललितेश्वर शाही ने पूरे समाज का पथप्रदर्शन किया।

आजादी की लड़ाई से लेकर बिहार एवं भारत की राजनीति को एक आधार देने में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को संपूर्ण भारत कभी नहीं भूल पायेगा। वहीं बिहार का हर कण-कण सदैव ऋणी बना रहेगा।

ललितेश्वर शाही उम्र के शताब्दी में भी यादाश्तों के धनी रहे हैं। जीवन के किसी भी मोड़ पर आपकी मुलाकात को वह अपने सीने में बसाये रखे रहे थे। शायद आप याद ना कर पायें, लेकिन उन्हें सब याद होता था। ऐसे सपूत का बिहार ऋणी रहेगा एवं वैशाली लोकतंत्र की जननी उन्हें अपने आप में पाकर गौरवान्वित महसूस करते रहेगा।

09-Jun-2018 07:22

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